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'जमीनी हमला करने की कोशिश की, तो एक भी दुश्मन सैनिक नहीं बचेगा जिंदा', ईरानी कमांडर की चेतावनी

मेजर जनरल हातमी ने कमांडरों को निर्देश दिया कि ईरान तब तक अपने दुश्मनों को नहीं छोड़ेगा, जब तक देश से युद्ध का खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हो जाता और सभी के लिए सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो जाती।

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ईरान की अमेरिका को चेतावनी

Photo : AP

Iran-US War: अमेरिका-इजराइल से युद्ध के बीच ईरान की सेना प्रमुख का बड़ा बयान सामने आया है। ईरानी सेना के कमांडर-इन-चीफ मेजर जनरल आमिर हातमी ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका और इजराइल ने जमीनी हमला करने की कोशिश की, तो एक भी दुश्मन सैनिक जिंदा नहीं बचेगा। गुरुवार को सेना के ग्राउंड, एयर, नेवल और एयर डिफेंस बलों के कमांडरों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा कि अगर दुश्मन जमीनी घुसपैठ करता है, तो किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।

दुश्मन की कार्रवाई का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार

उन्होंने यह भी कहा कि ईरानी सेना किसी भी दुश्मन की कार्रवाई का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है, चाहे वह रक्षात्मक हो या आक्रामक। मेजर जनरल हातमी ने कमांडरों को निर्देश दिया कि वे दुश्मन की हर गतिविधि और हरकत पर कड़ी नजर रखें और उससे निपटने के लिए पूरी तैयारी रखें। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान तब तक अपने दुश्मनों को नहीं छोड़ेगा, जब तक देश से युद्ध का खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हो जाता और सभी के लिए सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो जाती।

70 लाख लोग अमेरिका से लड़ने के लिए तैयार

वहीं, ईरान के संसद अध्यक्ष ने गुरुवार को दावा किया कि 70 लाख ईरानी इस्लामिक गणराज्य पर अमेरिका के किसी भी जमीनी आक्रमण का मुकाबला करने के लिए तैयार हैं। मोहम्मद बगेर कलिबफ, जिनका नाम अमेरिका के साथ संभावित वार्ताकार के रूप में सामने आ रहा है, ने युद्ध की शुरुआत से ही अमेरिका को चुनौती देते हुए कई ऑनलाइन पोस्ट किए हैं।

उन्होंने X पर लिखा, अभी, एक सप्ताह से भी कम समय में, देश भर में चल रहे एक शक्तिशाली राष्ट्रीय अभियान ने लगभग 70 लाख ईरानियों को आगे ला दिया है, जिन्होंने पहले ही घोषणा कर दी है कि वे हथियार उठाने और अपने राष्ट्र की रक्षा के लिए खड़े होने को तैयार हैं। यह दावा कई दिनों से सोशल मीडिया पर चल रहा है। कलिबफ ईरान में ऐसा कहने वाले पहले उच्च पदस्थ अधिकारी हैं, जो लगभग 90 मिलियन लोगों का घर है।

यह आंकड़ा कहां से आया है, यह स्पष्ट नहीं है, लेकिन सरकारी मीडिया और टेक्स्ट मैसेज अभियानों के माध्यम से लोगों से स्वयंसेवक बनने का आग्रह किया गया है। सरकार ने सेवानिवृत्त सैनिकों से भी युद्ध में भाग लेने की इच्छा व्यक्त करने का आह्वान किया है, जबकि अर्धसैनिक क्रांतिकारी गार्ड के पूर्णतः स्वयंसेवी बासिज बल ने 12 वर्ष की आयु के बच्चों को भी अपने संगठन में शामिल करना शुरू कर दिया है।

Amit Mandal
अमित कुमार मंडलauthor

अमित मंडल टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में न्यूज डेस्क पर Assistant Editor के रूप में काम कर रहे हैं। प्रिंट, टीवी और डिजिटल—तीनों माध्यमों में कुल मिलाकर 15 सालों से अधिक का अनुभव उन्हें खबरों को देखने की व्यापक दृष्टि देता है। ब्रेकिंग न्यूज, लाइव ब्लॉग, स्पेशल स्टोरीज और एक्सप्लेनेर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। एंगल चुनने की कला, खबरों की गति को समझना और समय पर सही जानकारी पहुंचाना—ये उनकी सबसे बड़ी खूबियां हैं। अमित अपने करियर में करीब 20 हजार से अधिक न्यूज आर्टिकल, एनालिसिस और एक्सप्लेनर पब्लिश कर चुके हैं।

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