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नेतन्याहू की बड़ी गलती! हमास के पास इजराइल के ही हथियार, इसी से लड़ रहा जंग

Hamas Is Fighting With Israeli Weapons: इजराइल और हमास के बीच बीते 9 दिनों से युद्ध जारी है। आखिर हमास के पास के इतने हथियार कहां से आ रहे हैं, जिससे वो इजराइल का सामना कर रहा है? अगर ये कहा जाए कि इजराइल के ही हथियार से हमास जंग लड़ रहा, तो गलत नहीं होगा। आपको बताते हैं कैसे...।

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इजराइल के पीएम नेतन्याहू ने क्या गलती कर दी?

Photo : AP

Israel-Hamas War Updates: इजराइल के खिलाफ युद्ध की शुरुआत हमास ने की थी, एकसाथ 20 मिनट में इजराइल पर 5 हजार रॉकेट दागे। इस हमले के बाद इजराइल ने हमास के हमलावरों को माकूल जवाब दिया, मगर ये जंग अभी अपने अंजाम तक नहीं पहुंच पाई है। युद्ध लगातार जारी है, 9 दिनों के भीतर इस युद्ध में अब तक दोनों ओर से 3600 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 12 हजार से अधिक लोग घायल हैं। इजराइल की तुलना में हमास को अधिक नुकसान हुआ है, इस बीच ये सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर हमास के पास के इतने हथियार कहां से आ रहे हैं, जिससे वो इजराइल का सामना कर रहा है?

हमास के हथियार का सबसे बड़ा स्रोत इजराइल!

अगर ये कहा जाए कि इजराइल के ही हथियार से हमास जंग लड़ रहा, तो गलत नहीं होगा। आपको इसके पीछे की असल वजह समझनी चाहिए। दरअसल, इजराइल की ओर से गाजा पट्टी पर पिछले कई हमलों से हमास को हथियार बनाने में काफी मदद मिली है। दोनों के बीच पुरानी दुश्मनी है, जब कभी भी हमास पर इजराइल रॉकेट या मिसाइल दागता था तो उसमें लगे मेटल पाइप, सरिया, मेटल शीट और बिजली के तारों को हमास के लड़ाके इकट्ठा कर लेते थे। विशेषज्ञों ने दावा किया है कि इन सामानों को हमास के लड़ाके इकट्ठा करके वर्कशॉप में ले जाते थे और उसकी मदद से खुद के लिए विस्फोटक और रॉकेट तैयार करते थे।

ईरान, सीरिया और सुडान से भी मिलता है रॉकेट!

मतलब साफ है कि विस्फोटक और रॉकेट को तैयार करने में लगने वाली चीजें हमास को बड़ी ही आसानी से मिल जाती थी। जिसके जरिए आज इजराइल के हथियार से ही वो युद्ध में इजराइल पर हमला कर रहा है। कहा जाता है कि हमास को ईरान, सीरिया और सुडान जैसे देश भी रॉकेट सप्लाई करते हैं। हमास की तरह से जो रॉकेट इजराइल पर दागे जाते हैं वो काफी हाई-फाई नहीं होते हैं।

इजराइल अब हमास का नामोनिशां खत्म करने का दावा कर रहा है। वो ग्राउंड ऑपरेशन के जरिए गाजा पट्टी में रह रहे हमास के लड़ाकों को मिटाने की बात कह रहा है। आम नागरिकों को दिया अल्टीमेटम खत्म हो गया है, जिसमें इजराइली डिफेंस फोर्स ने लोगों से जल्द से जल्द शहर को खाली करने का निर्देश दिया था। इजराइल की सेना जमीनी रास्ते से अब आगे बढ़ रही है और हमास को चुन-चुन कर खत्म करने के मूड में है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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