Iran War News: ईरान के खिलाफ खाड़ी देशों की मोर्चेबंदी और तेज हुई है। ये चाहते हैं कि अमेरिका, ईरान पर हमले करता रहा। एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट में खाड़ी और इजराइल के अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि खाड़ी के देश ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमले तब तक होते देखना चाहते हैं कि जब तक कि उसकी पूरी तरह से 'निर्णायक हार' न हो जाए। खाड़ी देशों का मानना है कि महीने भर की बमबारी एवं हमलों के बावजूद ईरान पूरी तरह से कमजोर नहीं हुआ है। इस बीच, जेद्दा में सऊदी अरब, कतर और जॉर्डन के नेताओं ने मुलाकात की है।
ईरानी नेतृत्व में बदलाव तक चाहते हैं हमले
रिपोर्ट में नाम उजागर न करने की शर्त पर अधिकारियों ने कहा कि सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत और बहरीन के अधिकारियों ने निजी बातचीत में यह स्पष्ट किया है कि वे नहीं चाहते कि सैन्य अभियान तब तक समाप्त हो जब तक ईरानी नेतृत्व में बड़े बदलाव न आएं या ईरान के व्यवहार में नाटकीय परिवर्तन न हो। हालांकि क्षेत्रीय नेता फिलहाल अमेरिकी प्रयासों का व्यापक समर्थन कर रहे हैं, लेकिन एक खाड़ी राजनयिक ने बताया कि कुछ मतभेद भी हैं। सऊदी अरब और यूएई तेहरान पर सैन्य दबाव बढ़ाने की मांग में सबसे आगे हैं।
ईरान के खिलाफ सबसे ज्यादा आक्रामक है UAE
एक राजनयिक ने कहा कि यूएई खाड़ी देशों में सबसे आक्रामक रुख अपनाने वाला देश बनकर उभरा है और वह डोनाल्ड ट्रंप पर जमीनी हमला (ग्राउंड इन्वेज़न) करने के लिए जोर दे रहा है। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध के बीच सऊदी अरब, कतर और जॉर्डन के नेताओं ने जेद्दा में बैठक की है। समृद्ध खाड़ी देशों सऊदी अरब और कतर के नेता तथा अमेरिका के प्रमुख सहयोगी जॉर्डन के राजा ने सोमवार को आमने-सामने बैठक की, जिसमें क्षेत्रीय तनाव और अमेरिका-इजराइल-ईरान युद्ध को और बढ़ने से रोकने के उपायों पर चर्चा की गई।
'ईरान ने महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर हमले किए'
सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान बिन अब्दुलअजीज ने कतर के अमीर तमीम बिन हमद अल थानी और जॉर्डन के राजा अब्दुल्ला द्वितीय का हवाई अड्डे पर स्वागत किया। सऊदी अरब के तटीय शहर जेद्दा में आयोजित इस शिखर सम्मेलन के बाद तीनों नेताओं ने बयान जारी कर चेतावनी दी कि ईरान द्वारा जारी हमले, जिनमें नागरिक और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर हमले शामिल हैं, एक खतरनाक बढ़ोतरी का संकेत हैं। इन वार्ताओं का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय प्रतिक्रिया का समन्वय करना, तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयासों का समर्थन करना और उस संघर्ष के आर्थिक प्रभावों को संभालना था, जिसने ऊर्जा बाजारों और व्यापार मार्गों को प्रभावित किया है।
