G7 Summit Digital Safety Minors: आज के डिजिटल युग में बच्चे और युवा इंटरनेट, सोशल मीडिया और एआई का सबसे ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं। तकनीक ने जहां उनके लिए पढ़ाई-लिखाई और स्वास्थ्य से जुड़ी नई राहें खोली हैं, वहीं इसके गंभीर खतरे भी सामने आए हैं। इसी चिंता को देखते हुए फ्रांस के एवियन में चल रहे जी-7 शिखर सम्मेलन में एक ऐतिहासिक और बड़ा फैसला लिया गया है।
जी-7 देशों के साथ मिलकर भारत, ब्राजील, मिस्र, केन्या और दक्षिण कोरिया जैसे वैश्विक साझेदारों ने एक साझा घोषणापत्र जारी किया है। इस घोषणापत्र में 18 साल से कम उम्र के बच्चों और युवाओं को इंटरनेट की दुनिया में सुरक्षित माहौल देने के लिए एक रोडमैप तैयार किया गया है।
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'सेफ्टी-बाय-डिजाइन' पर जोर
वैश्विक नेताओं ने टेक कंपनियों और डिजिटल सर्विस प्रोवाइडर्स को सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि वे बच्चों की सुरक्षा को बाद की बात न समझें। अब कंपनियों को अपने ऐप्स और प्लेटफॉर्म्स में 'सेफ्टी-बाय-डिजाइन' का फॉर्मूला (Safety by Design Internet) अपनाना होगा।
इसका मतलब है कि ऐप्स में पहले से ही ऐसे 'डिफॉल्ट सेटिंग्स' होने चाहिए जो बच्चों के लिए सुरक्षित हों। इसके साथ ही पैरेंटल कंट्रोल टूल्स (माता-पिता के लिए नियंत्रण विकल्प) को इतना आसान बनाया जाए कि वे अपने बच्चों के डेटा और ऑनलाइन एक्टिविटी पर नजर रख सकें।
'कन्वर्सेशनल एआई' और डीपफेक पर कड़ा रुख
घोषणापत्र में चैटबॉट्स और बातचीत करने वाले आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (जैसे चैटजीपीटी आदि) के बच्चों पर पड़ रहे मानसिक असर को लेकर भी चिंता जताई गई है। कंपनियों से कहा गया है कि वे एआई टूल्स में उम्र की पहचान करने वाली तकनीक (Age Assurance) और सेफ्टी सेटिंग्स को तुरंत लागू करें।
नेताओं ने साफ कर दिया है कि बच्चों से जुड़े यौन शोषण की सामग्री, बिना सहमति के बनाई गई अश्लील तस्वीरें और 'डीपफेक' (AI से बनाए गए फर्जी वीडियो/फोटो) को इंटरनेट पर पूरी तरह प्रतिबंधित करना एक ऐसा नियम है, जिस पर कोई समझौता (Non-negotiable) नहीं किया जाएगा। कंपनियों को ऐसी आपराधिक सामग्री को तुरंत पहचानने और हटाने के लिए अपने सिस्टम को मजबूत करना होगा।
जागरूकता और कानूनी सहयोग
कंपनियों को कानून लागू करने वाली एजेंसियों (पुलिस आदि) के साथ मिलकर काम करना होगा, ताकि बच्चों को ऑनलाइन ड्रग तस्करी या उग्रवाद के जाल में फंसने से बचाया जा सके। इसके अलावा, बच्चे असली और एआई द्वारा बनाई गई नकली (Synthetic) चीजों में आसानी से फर्क समझ सकें, इसके लिए डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा दिया जाएगा। नेताओं ने अधिकारियों से कहा है कि वे इस साल के अंत तक इस योजना की प्रगति की समीक्षा करें।
