Asif Khawaja: सऊदी अरब पर हूतियों का हमला लगातार जारी है और उसने भारी नुकसान पहुंचाया है। इन हमलों के आगे सऊदी अरब बेबस दिख रहा है और मक्का सैन्य पैक्ट के बावजूद पाकिस्तान-तुर्की की ओर से उसे कोई सैन्य मदद नहीं मिल रही है। ऐसे में पाकिस्तान ने एक बार फिर सऊदी अरब को कोरा आश्वासन ही दिया है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने स्पष्ट किया है कि अगर यमन के हूती विद्रोहियों के साथ संघर्ष बढ़ता है, तो पाकिस्तान सऊदी अरब के साथ व्यावहारिक और कूटनीतिक दोनों स्तरों पर मजबूती से खड़ा रहेगा।
रक्षा मंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने हूती विद्रोहियों पर पवित्र शहर मक्का को निशाना बनाने का आरोप लगाया है। इस घटनाक्रम के बाद पूरे मुस्लिम जगत में व्यापक आक्रोश देखने को मिल रहा है और क्षेत्र में तनाव और गहरा गया है।
सऊदी अरब का आरोप और हूतियों का इनकार
सऊदी गठबंधन ने दावा किया कि उसने मक्का की ओर बढ़ रहे हूती विद्रोहियों के एक ड्रोन को हवा में ही मार गिराया। हूतियों का खंडन: यमन के हूती विद्रोहियों ने रियाद (सऊदी अरब) के इन आरोपों को तुरंत खारिज कर दिया और इसे पूरी तरह से झूठ करार दिया। जियो न्यूज से बातचीत के दौरान रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने पाकिस्तान का रुख साफ करते हुए कहा। अगर स्थिति बिगड़ती है, तो हम व्यावहारिक और कूटनीतिक दोनों तरह से सऊदी अरब के साथ खड़े होंगे।
मक्का रक्षा गठबंधन पर क्या कहा
पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब के बीच हुए त्रिपक्षीय समझौते—'मक्का रक्षा गठबंधन' (Makkah Defence Alliance)—पर टिप्पणी करते हुए आसिफ ने पुष्टि की कि इस तरह का रक्षा समझौता अस्तित्व में है। हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी औपचारिक समझौते के बिना भी पाकिस्तान कदम उठाने के लिए बाध्य है।
उन्होंने आगे कहा, अगर पवित्र स्थलों पर हमला होता है, तो प्रतिक्रिया देना हमारी एक शाश्वत प्रतिबद्धता है, भले ही कोई सांसारिक समझौता हो या न हो। रक्षा मंत्री ने कहा कि दुनियावी समझौतों की अपनी पवित्रता और शर्तें होती हैं, लेकिन मक्का और मदीना जैसे पवित्र स्थलों की रक्षा करना हर मुसलमान का धार्मिक कर्तव्य है। इसके लिए किसी समझौते को अलग से लागू करने की आवश्यकता नहीं है।
क्षेत्रीय तनाव में बढ़ोतरी की आशंका
सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच बढ़ते जुबानी और सैन्य टकराव के बीच पाकिस्तान के रक्षा मंत्री के इस खुले समर्थन को बेहद अहम माना जा रहा है। यदि यह संघर्ष आगे बढ़ता है, तो पाकिस्तान की प्रत्यक्ष भागीदारी से मध्य पूर्व में रणनीतिक समीकरण और जटिल हो सकते हैं।
