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रूसी तेल पर अमेरिकी 'नरक जैसे प्रतिबंधों' पर भड़के क्रेमलिन ने दी चेतावनी-'पटरी से उतर जाएगी यूक्रेन शांति वार्ता'

रूसी कच्चे तेल पर प्रतिबंध लगाने वाले बिल को अमेरिकी हाउस से मंजूरी मिलने के बाद, क्रेमलिन ने इस कदम की निंदा की और कहा कि इससे यूक्रेन संघर्ष को खत्म करने के लिए हो रही शांति वार्ता पर असर पड़ेगा।

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रूसी तेल पर पर मची रार (फाइल फोटो)

अमेरिका द्वारा रूसी कच्चे तेल की खरीद पर प्रतिबंध लगाने वाला नया बिल पास करने के कुछ ही घंटों बाद, क्रेमलिन ने गुरुवार को चेतावनी दी कि इस बिल का यूक्रेन युद्ध को खत्म करने की बातचीत पर असर पड़ेगा। एक बयान जारी करते हुए, क्रेमलिन ने कहा कि रूस अमेरिका में तथाकथित 'भयानक प्रतिबंध' (Hellish Sanctions) वाले बिल को अपनाए जाने को 'दोस्ताना न होने वाला कदम' मानता है।

उसने आगे कहा कि अगर ये नए अमेरिकी प्रतिबंध लागू किए जाते हैं, तो यूक्रेन में शांतिपूर्ण समाधान खोजने की कोशिशें और मुश्किल हो जाएंगी।

अमेरिकी हाउस ने रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले बिल को मंज़ूरी दी

अमेरिकी हाउस ऑफ़ रिप्रेजेंटेटिव्स ने गुरुवार को एक बिल पास किया, जो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस पर प्रतिबंध लगाने और भारत और चीन सहित तेल और गैस के क्षेत्र में उसके व्यापारिक साझेदारों पर भारी टैरिफ लगाने का अधिकार देगा। पिछले महीने अमेरिकी सीनेट द्वारा पास किए गए 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ़ 2026' को बुधवार शाम हाउस ने 262-159 वोटों से मंज़ूरी दे दी और अब यह कानून बनने के लिए ट्रंप के पास जाएगा।

इस कानून के पक्ष में 203 रिपब्लिकन, 58 डेमोक्रेट और एक निर्दलीय सदस्य ने वोट दिया। सात रिपब्लिकन और 152 डेमोक्रेट ने इसका विरोध किया। खास बात यह है कि इस बिल का नाम साउथ कैरोलिना के रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम के नाम पर रखा गया है, जिनकी जुलाई में मौत हो गई थी। उन्होंने इस बिल के लिए समर्थन जुटाने में एक साल से ज्यादा समय बिताया था।

'मकसद ट्रंप को चीन, भारत और अन्य देशों पर भारी टैरिफ लगाने का अधिकार देना'

इस बिल का मकसद न सिर्फ रूस के नेतृत्व और ऊर्जा क्षेत्र पर प्रतिबंध लगाना है, बल्कि उन जहाज़ों के 'शैडो फ्लीट' (गुप्त बेड़े) पर भी प्रतिबंध लगाना है जो मॉस्को को तेल की डिलीवरी पर लगे प्रतिबंधों से बचने में मदद करते हैं। इसका मकसद ट्रंप को चीन, भारत और अन्य देशों पर भारी टैरिफ लगाने का अधिकार देना भी है ताकि रूसी तेल और गैस पर उनकी निर्भरता कम हो सके, साथ ही ईरान पर अतिरिक्त प्रतिबंध भी लगाए जा सकें।

Ravi Vaish
रवि वैश्यauthor

रवि वैश्य टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क पर कार्यरत एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता में 20 वर्षों का व्यापक अनुभव हासिल है। खबरों की बारीकियों को समझने और तेजी से प्रस्तुत करने में उनकी विशेष दक्षता है। टीवी पत्रकारिता में रिपोर्टिंग और डेस्क—दोनों क्षेत्रों में अनुभव होने के कारण वे समाचारों को बहुआयामी दृष्टिकोण से देखते हैं। देश–दुनिया की ताजातरीन अपडेट्स, ब्रेकिंग न्यूज, एक्सप्लेनर और विशेष स्टोरीज तैयार करने में वे सिद्धहस्त हैं। उनकी प्राथमिकता हमेशा यही रही है कि हर खबर तेज, सटीक और जानकारीपूर्ण रूप में पाठकों तक पहुंचे। रवि वैश्य अब तक 22,000 से अधिक खबरें लिख चुके हैं, जिनमें कई एक्सक्लूसिव रिपोर्ट्स, इंटरव्यू, ग्राउंड रिपोर्ट्स, विश्लेषण और एक्सप्लेनर शामिल हैं।

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