US Iran Peace Deal: अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त करने और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को दोबारा खोलने के लिए हुए ऐतिहासिक समझौते का दुनिया की महाशक्तियों ने पुरजोर स्वागत किया है। यूरोप के चार सबसे शक्तिशाली देशों फ्रांस, ब्रिटेन (UK), जर्मनी और इटली के राष्ट्राध्यक्षों ने एक साझा द्विपक्षीय बयान जारी कर इस राजनयिक सफलता पर खुशी जताई है। चारों देशों के नेताओं ने संयुक्त बयान में अमेरिका और ईरानी सरकार को बधाई दी। इसके साथ ही उन्होंने पर्दे के पीछे रहकर इस असंभव सी दिखने वाली डील को मुमकिन बनाने वाले मध्यस्थ देशों- पाकिस्तान और कतर की भूमिका को भी सराहा है। आइए एक नजर में जान लेते हैं यूरोपीय देशों के इस संयुक्त बयान के कूटनीतिक मायने क्या हैं।
वैश्विक अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने का मौका
चारों देशों के नेताओं का मानना है कि पिछले तीन महीनों से मिडिल ईस्ट में जारी हिंसक संघर्ष ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी थी। संयुक्त बयान में कहा गया, "यह समझौता पूरे क्षेत्र में स्थिरता बहाल करने और वैश्विक अर्थव्यवस्था को मजबूती देने का एक बड़ा और सुनहरा अवसर है। अब यह बेहद जरूरी है कि दोनों पक्ष विस्तृत बातचीत को जल्द पूरा करें और इस समझौते को पूरी तरह और तेजी से जमीन पर लागू करें।" यूरोपीय देशों ने इस प्रक्रिया में हरसंभव मदद देने का भरोसा जताया है।
होर्मुज को सुरक्षित करने के लिए खुद मोर्चा संभालेगा यूरोप
होर्मुज जलमार्ग को बिना किसी शर्त और पाबंदी के व्यापारिक जहाजों के लिए खोलना वैश्विक व्यापार के लिए संजीवनी जैसा है। इसे लेकर यूरोप के चारों देशों ने एक बड़ा सैन्य और रक्षात्मक कदम उठाने का एलान किया है।
यूरोपीय देशों ने कहा है कि वे अंतरराष्ट्रीय नियमों और अपने संवैधानिक प्रावधानों के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य में एक 'पूरी तरह स्वतंत्र और रक्षात्मक मिशन' शुरू करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इस मिशन का उद्देश्य व्यापारिक जहाजों को सुरक्षा का भरोसा देना और युद्ध के दौरान समुद्र में बिछाई गई खतरनाक बारूदी सुरंगों को हटाने (Mine Clearance Operations) का काम करना होगा।
परमाणु मुद्दे पर सख्त संदेश: "ईरान कभी नहीं बना पाएगा परमाणु बम"
शांति समझौते का स्वागत करने के साथ ही फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी और इटली ने ईरान को अपनी सबसे बड़ी चिंता से भी अवगत करा दिया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा, "ईरान को कभी भी परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।"
यूरोपीय नेताओं ने कहा कि वे इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए अमेरिका, ईरान और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के साथ मिलकर काम करने को तैयार हैं। उन्होंने ईरान के सामने एक बड़ा ऑफर भी रखा कि यदि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर अंतरराष्ट्रीय बिरादरी के सामने 'स्पष्ट और सत्यापन योग्य' कदम उठाता है, तो वे उस पर लगाए गए कड़े आर्थिक प्रतिबंधों को हटाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
लेबनान में मजबूत सीजफायर की वकालत
बयान के अंत में चारों देशों ने लेबनान की स्थिरता, संप्रभुता और उसकी क्षेत्रीय अखंडता के प्रति अपनी पूर्ण प्रतिबद्धता दोहराई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस समझौते के साथ ही लेबनान फ्रंट पर एक मजबूत और टिकाऊ युद्धविराम लागू होना बेहद जरूरी है, ताकि सीमा पर निर्दोष नागरिकों की जान बचाई जा सके। राजनयिकों का मानना है कि अगले 60 दिनों के भीतर स्विट्जरलैंड में होने वाली तकनीकी वार्ताओं में इन यूरोपीय देशों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होने वाली है, क्योंकि अमेरिका और ईरान दोनों ही यूरोप के आर्थिक और कूटनीतिक रुख को नजरअंदाज नहीं कर सकते।
बता दें कि ईरान और अमेरिका के बीच हुए समझौते ने लेबनान में लोगों को राहत और खुशी दी है। ईरान ने कहा है कि इस समझौते के तहत सभी मोर्चों पर संघर्ष समाप्त होगा। इसमें लेबनान भी शामिल है, जहां लंबे समय से तनाव और हिंसा की स्थिति बनी हुई थी। घोषणा के बाद जश्न की कई तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हैं। लेबनानी नागरिकों ने उम्मीद जताई है कि अब क्षेत्र में शांति स्थापित होगी और सामान्य जीवन बहाल हो सकेगा।
