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'परिवार बढ़ाइए, नहीं तो...', घटती आबादी के खतरे पर मस्क ने यूरोप को किया आगाह

मस्क ने कहा है कि 'यूरोप के लोग यदि अपना परिवार नहीं बढ़ाते हैं तो यह इलाका खत्म होने लगेगा।' यूरोप में घटते जन्म दर को लेकर मस्क की यह एक महीने के भीतर दूसरी चेतावनी है। इससे पहले टेस्ला के मालिक ने कहा कि घटती आबादी पर रोक के लिए यूरोप के लोगों को कम से कम तीन बच्चे पैदा करने चाहिए।

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यूरोप के घटते जन्म दर पर मस्क ने चिंता जताई। तस्वीर-AP

Elon Musk News : यूरोप में युवाओं की घटती आबादी पर दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति एलन मस्क ने एक बार फिर चिंता जाहिर की है। मस्क ने कहा है कि 'यूरोप के लोग यदि अपना परिवार नहीं बढ़ाते हैं तो यह इलाका खत्म होने लगेगा।' यूरोप में घटते जन्म दर को लेकर मस्क की यह एक महीने के भीतर दूसरी चेतावनी है। इससे पहले टेस्ला के मालिक कह चुके हैं कि घटती आबादी पर रोक के लिए यूरोप के लोगों को कम से कम तीन बच्चे पैदा करने चाहिए।

हाल की रिपोर्टों में दावा किया गया है कि यूरोप का जन्मदर 2.1 के नीचे आ गया। इसे बढ़ाए जाने की जरूरत है। मस्क ने 2024 के मैप का हवाला देते हुए कहा कि इटली की तरह बाकी यूरोप का जन्मदर घटकर 1.18 पर आ गया है। X पर अपने एक पोस्ट में मस्क ने कहा, 'या तो यूरोप बड़ा परिवार रखना शुरू करे अथवा यह खत्म होना शुरू हो जाएगा।' इससे पहले एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि यूरोप में जनसंख्या की स्थिरता बनाए रखने के लिए प्रति महिला 2.7 की जन्मदर होनी चाहिए। इससे पहले जन्मदर का यह आंकड़ा 2.1 घोषित किया गया था।

यूरोप में इटली में जन्मदर गिरकर 1.29 हुई

यूरोप एक गंभीर जनसंख्या संकट का सामना कर रहा है। अधिकांश यूरोपीय देशों में जन्म दर निरंतर गिर रही है और बुजुर्गों की संख्या बढ़ रही है। इटली में जन्मदर गिरकर 1.29 पहुंच गई है। अमेरिका की भी हालत ठीक नहीं है। अमेरिका में जन्मदर गिरकर 1.66 पर पहुंच गई है। यह गिरावट न केवल सामाजिक संतुलन को प्रभावित कर रही है, बल्कि आर्थिक और राजनीतिक स्थिरता के लिए भी एक चुनौती बनती जा रही है।

जन्मदर में गिरावट के पीछे हैं कई वजहें

जनसंख्या में गिरावट के पीछे कई कारण हैं। युवाओं में विवाह और बच्चे पैदा करने की प्रवृत्ति कम हुई है। महंगाई, नौकरी की अनिश्चितता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की प्राथमिकता के कारण परिवार की अवधारणा पीछे छूटती जा रही है। इसके अलावा, महिलाओं की शिक्षा और करियर के प्रति बढ़ती रुचि ने भी पारंपरिक पारिवारिक ढांचे में बदलाव लाया है। इसका सबसे बड़ा प्रभाव कार्यबल पर पड़ता है। युवाओं की कमी के कारण श्रमिकों की संख्या घट रही है, जिससे आर्थिक उत्पादन प्रभावित हो रहा है। साथ ही, पेंशन और स्वास्थ्य सेवाओं पर बुजुर्ग आबादी का बोझ तेजी से बढ़ रहा है। कई देश अब कुशल प्रवासियों पर निर्भर हो रहे हैं, जिससे सामाजिक और सांस्कृतिक तनाव भी बढ़ सकते हैं।

Alok Rao
आलोक कुमार रावauthor

19 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय आलोक राव ने प्रिंट, न्यूज एजेंसी, टीवी और डिजिटल चारों ही माध्यमों में काम किया है। इस लंबे अनुभव ने उन्हें समाचारों की समझ, प्रेजेंटेशन, डिटेलिंग और न्यूजरूम डायनेमिक्स में असाधारण दक्षता प्रदान की है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों में विशेष रुचि रखने के साथ-साथ जियो-पॉलिटिक्स एवं डिफेंस की स्टोरीज में इनकी खासी दिलचस्पी है। आलोक ने अलग-अलग माध्यमों में काम करते हुए समाचारों की समझ, प्रस्तुति और विश्लेषण में मजबूत दक्षता विकसित की है और अब तक 25,000 से अधिक आर्टिकल तैयार कर चुके हैं। तथ्यों की गहन जांच, मजबूत न्यूज सेंस और तेज निर्णय क्षमता उनकी पत्रकारिता की प्रमुख खासियतें हैं।

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