Dragon-Elephant Should Dance Together: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज तियानजिन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की। करीब 7 साल बाद पीएम मोदी चीन की यात्रा पर पहुंचे हैं। दोनों नेताओं के बीच यह वार्ता शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के वार्षिक शिखर सम्मेलन से इतर हुई। पीएम मोदी और शी जिनपिंग के बीच यह लगभग पिछले 10 महीनों में पहली मुलाकात थी। व्यापार और शुल्क संबंधी अमेरिकी नीतियों के कारण भारत और अमेरिका के संबंधों में अचानक गिरावट आई है। ऐसे में भारत और चीन के नेताओं के बीच यह मुलाकात महत्व रखती है। इस मुलाकात पर पूरी दुनिया की निगाहें थी। खास तौर पर डोनाल्ड ट्रंप के रुख के मद्देनजर ये मुलाकात अमेरिकी राष्ट्रपति को जवाब है कि किस तरह एकजुट होकर मनमानी को रोका जा सकता है। इस मुलाकात में दोनों नेताओं ने क्या-क्या कहा और दोनों देशों का किस बात पर जोर रहा, जानिए।
हाथी और ड्रैगन एक-दूसरे की सफलता का जश्न मनाएं
प्रधानमंत्री मोदी से कहा कि दोनों देशों का मित्र बनना सही विकल्प है और हाथी (भारत) और ड्रैगन (चीन) को एक-दूसरे की सफलता का मिलकर जश्न मनाना चाहिए। पीएम मोदी ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से कहा कि भारत आपसी विश्वास, सम्मान एवं संवेदनशीलता के आधार पर चीन के साथ अपने संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है क्योंकि दोनों देशों के बीच सहयोग 2.8 अरब लोगों के कल्याण से जुड़ा है। पीएम मोदी ने टेलीविजन पर प्रसारित अपने वक्तव्य की शुरुआत में कहा कि दोनों पक्षों द्वारा सीमा से सैनिकों को पीछे हटाए जाने से शांति और स्थिरता का माहौल बना। पीएम मोदी ने कहा, हमारा सहयोग दोनों देशों के 2.8 अरब लोगों के हितों से जुड़ा है। इससे समस्त मानवता के कल्याण का मार्ग भी प्रशस्त होगा। हम आपसी विश्वास, सम्मान और संवेदनशीलता के आधार पर अपने संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा, पिछले साल कजान में हमारी बहुत ही उपयोगी चर्चा हुई जिसने हमारे संबंधों को एक सकारात्मक दिशा दी। सीमा से सैनिकों की वापसी के बाद अब शांति और स्थिरता का माहौल है। हमारे विशेष प्रतिनिधि सीमा प्रबंधन पर भी एक समझौते पर पहुंच गए हैं। उन्होंने कहा, कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर से शुरू हो गई है। दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानें भी फिर से शुरू हो रही हैं।
प्रधानमंत्री मोदी के मुख्य बिंदु:
- कजान बैठक ने संबंधों को सकारात्मक दिशा दी – सीमा पर शांति बनी, प्रत्यक्ष उड़ानों की बहाली की तैयारी हुई।
- भारत-चीन साझेदार हैं, विरोधी नहीं।
- दोनों देशों में सहमति अधिक, मतभेद कम।
- भारत दीर्घकालिक दृष्टिकोण से संबंधों को विकसित करने का इच्छुक है।
- वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बीच भारत-चीन सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण।
- सीमा मुद्दे का न्यायसंगत, उचित और आपसी स्वीकार्य समाधान खोजने को तैयार।
- दोनों देश रणनीतिक स्वायत्तता और स्वतंत्र विदेश नीति का पालन करते हैं, किसी तीसरे पक्ष का प्रभाव नहीं।
- सहयोग से 21वीं सदी को वास्तविक “एशियाई सदी” बनाया जा सकता है।
- भारत-चीन का सहयोग बहुपक्षवाद और अंतरराष्ट्रीय मामलों में संतुलन को मजबूत करेगा।
- पीएम मोदी ने SCO में चीन की सफल अध्यक्षता पर बधाई दी और तियानजिन शिखर सम्मेलन की सफलता की शुभकामनाएं दीं।
‘ड्रैगन’ और ‘हाथी’ एक साथ डांस करें
वहीं शी जिनपिंग ने कहा, हम दोनों के कंधों पर अपने लोगों के भले के लिए काम करने, विकासशील देशों का कायाकल्प करने एवं उनकी एकजुटता को बढ़ावा देने और मानव समाज की प्रगति को गति देने की ऐतिहासिक जिम्मेदारी है। दोनों के लिए यह सही विकल्प है कि वे ऐसे दोस्त बनें जिनके बीच अच्छे पड़ोसियों वाले और सौहार्दपूर्ण संबंध हों, वे ऐसे साझेदार बनें जो एक-दूसरे की सफलता में सहायक हों और ‘ड्रैगन’ और ‘हाथी’ एक साथ डांस करें।
जिनपिंग ने मोदी से बातचीत के दौरान कहा कि भारत और चीन को अपने संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक परिप्रेक्ष्य से देखना चाहिए। जिनपिंग ने कहा, दोनों पक्षों को अपने संबंधों को रणनीतिक ऊंचाइयों और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से देखना एवं संभालना होगा ताकि हमारे द्विपक्षीय संबंधों का निरंतर, मजबूत और स्थिर विकास हो सके। चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ की खबर के अनुसार, शी ने मोदी से कहा कि चीन और भारत प्रतिद्वंद्वी नहीं बल्कि सहयोगी हैं तथा दोनों देश एक-दूसरे के लिए खतरा नहीं बल्कि विकास के अवसर हैं। उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एकतरफा नीतियों पर स्पष्ट रूप से निशाना साधते हुए कहा कि दोनों देशों को बहुपक्षवाद को बनाए रखना चाहिए।
जिनपिंग ने कहा कि भारत और चीन को एक बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था बनाने और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को अधिक लोकतांत्रिक बनाने के लिए भी काम करना चाहिए। उन्होंने कहा, हमें बहुपक्षवाद को बनाए रखने, एक बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को अधिक लोकतांत्रिक बनाने के लिए मिलकर काम करने और एशिया एवं दुनिया भर में शांति और समृद्धि में उचित योगदान देने की अपनी ऐतिहासिक जिम्मेदारी को भी आगे बढ़ाना होगा। जिनपिंग ने पीएम मोदी से कहा कि दुनिया इस समय ऐसे बदलावों से गुजर रही है जो सदी में एक बार होते हैं। उन्होंने कहा, अंतरराष्ट्रीय स्थिति अस्थिर और अराजक है। चीन और भारत पूर्व में स्थित दो प्राचीन सभ्यताएं हैं, हम दुनिया के दो सबसे अधिक आबादी वाले देश हैं और हम ‘ग्लोबल साउथ’ के सबसे पुराने सदस्य भी हैं।
शी जिनपिंग के मुख्य बिंदु
- कजान बैठक 2024 ने चीन-भारत संबंधों को नए सिरे से शुरू किया और सहयोग में प्रगति हुई।
- चीन और भारत–दो प्राचीन सभ्यताएं, विश्व की सबसे बड़ी जनसंख्या वाले देश और ग्लोबल साउथ के प्रमुख सदस्य हैं।
- दोनों पर जिम्मेदारी है कि जनता का कल्याण करें, विकासशील देशों की एकता व पुनर्जागरण को बढ़ावा दें, मानव प्रगति में योगदान दें।
- 'ड्रैगन-एलीफेंट डांस' यानी सौहार्दपूर्ण सह-अस्तित्व दोनों देशों के लिए सही विकल्प, पीएम मोदी से बोले जिनपिंग
- 2025 – चीन-भारत कूटनीतिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ है।
चार प्रमुख सहयोग क्षेत्र (शी जिनपिंग):
- रणनीतिक संवाद और आपसी विश्वास – एक-दूसरे को साझेदार और अवसर के रूप में देखें, न कि प्रतिद्वंद्वी या खतरे के रूप में।
- विकास व सहयोग का विस्तार – दोनों देश विकास व पुनर्जागरण के महत्वपूर्ण दौर में हैं; एक-दूसरे की सफलता का समर्थन करें।
- आपसी चिंताओं का समाधान – पंचशील के सिद्धांतों का पालन करें; सीमा पर शांति बनाएं; सीमा विवाद पूरे संबंधों को परिभाषित न करें।
- बहुपक्षीय सहयोग – वैश्विक न्याय व निष्पक्षता की रक्षा करें; बहुध्रुवीय विश्व और लोकतांत्रिक अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को बढ़ावा दें।
इस मुलाकात से होगी ट्रंप को टेंशन
पीएम मोदी और जिनपिंग के बीच यह लगभग पिछले 10 महीनों में पहली मुलाकात थी। व्यापार और शुल्क संबंधी अमेरिकी नीतियों के कारण भारत एवं अमेरिका के संबंधों में अचानक गिरावट आई है। ऐसे में भारत व चीन के नेताओं के बीच यह मुलाकात महत्व रखती है। ट्रंप ने यूक्रेन युद्ध और रूस से तेल आयात को लेकर भारत को निशाने पर लिया, लेकिन चीन के तेल आयात पर पूरी तरह चुप्पी साध ली। हालांकि, ट्रंप ने चीन पर भी टैरिफ लगाने की धौंस दी थी, जिसे चीन ने जवाबी कार्रवाई करके अपने तेवर साफ कर दिए। ऐसे में दोनों देशों के बीच अगर नजदीकी बढ़ी तो ट्रंप की मुश्किलें बढ़ना तय है। वह पहले ही भारत-अमेरिका के बीच 25 वर्षों से बने संबंधों को भारी नुकसान पहुंचा चुके हैं। ऐसा समझा जाता है कि मोदी-जिनपिंग वार्ता का मुख्य उद्देश्य उन द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना रहा जिनमें पूर्वी लद्दाख सीमा गतिरोध के बाद गंभीर तनाव पैदा हो गया था। लेकिन इस मुलाकात का मकसद ये भी है कि अगर एशिया के दो दिग्गज साथ आ जाएं तो दुनिया की कोई ताकत उन्हें नहीं रोक सकती।
