US Iran Conflict: अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष एक बार फिर तेज हो चली है। जॉर्डन में ईरानी हमले में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत के बाद अमेरिका ने शनिवार (स्थानीय समयानुसार) को ईरान पर नए हवाई हमले शुरू कर दिए हैं। अमेरिका का कहना है कि इन हमलों का मकसद ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करना और अमेरिकी सैनिकों पर हुए हमलों का जवाब देना है।
इसी बीच ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई (Mojtaba Khamenei) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर तीखा हमला बोलते हुए दोनों देशों के बीच पिछले महीने हुए अंतरिम समझौते (Interim Deal) को "बेकार और विश्वसनीयता से परे" करार दिया है। ईरान ने इस समझौते के तहत अपनी सभी प्रतिबद्धताओं को निलंबित (Suspend) कर दिया है।
'ट्रंप के हस्ताक्षर का कोई मूल्य नहीं'
ईरान के सर्वोच्च नेता मुजतबा खामेनेई ने शनिवार को जारी एक कड़े बयान में कहा कि पिछले महीने दोनों देशों द्वारा हस्ताक्षरित अंतरिम समझौते पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के हस्ताक्षर "मूल्यहीन और अमान्य" हैं। उन्होंने अमेरिका पर समझौते का बार-बार उल्लंघन करने का आरोप लगाया।
खामेनेई ने सोशल मीडिया पर लिखा, "अब जब अमेरिकी दुश्मन संघर्ष को बढ़ाने की कोशिश कर रहा है और भारी कीमत और अधिक अपमान झेलने की ओर बढ़ रहा है, तो उसे पता होना चाहिए कि ईरान के गौरवशाली राष्ट्र और 'प्रतिरोध के मोर्चे' के पास उसके लिए कभी न भूलने वाले सबक तैयार हैं।" उन्होंने आगे कहा कि इस समझौते के उल्लंघन ने अमेरिका का असली चेहरा बेनकाब कर दिया है, जो उसकी "बेईमानी, तर्कहीनता, अविश्वसनीयता और दुर्भावनापूर्ण स्वभाव" का प्रमाण है।
ईरान ने क्यों तोड़ा समझौता?
ईरान के उप विदेश मंत्री काज़ेम गरीबाबादी ने सरकारी टीवी पर पुष्टि की कि ईरान अब इस समझौते की शर्तों को लागू नहीं कर रहा है। ईरान का दावा है कि इस महीने अमेरिका द्वारा किए गए हवाई हमलों में कम से कम 50 लोगों की मौत हो चुकी है और 500 से अधिक लोग घायल हुए हैं, जिसके बाद ईरान के पास इस समझौते को निलंबित करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था।
