'अमेरिकी नियंत्रण से कम मंजूर नहीं'; ग्रीनलैंड पर ट्रंप ने साफ-साफ कर दिया एलान; नाटों देशों से ये कहा
- Edited by: शिव शुक्ला
- Updated Jan 14, 2026, 09:09 PM IST
ट्रंप ने यह भी कहा कि ग्रीनलैंड अमेरिका की ‘गोल्डन डोम’ मिसाइल रक्षा परियोजना के लिए बेहद अहम है और वे इस द्वीप का इस्तेमाल अमेरिका की सुरक्षा मजबूत करने के लिए करना चाहते हैं।
ट्रंप की ग्रीनलैंड पर दो टूक।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को साफ-साफ शब्दों में कहा कि उन्हें ग्रीनलैंड पर अमेरिका के नियंत्रण से कम और कोई विकल्प स्वीकार नहीं है। यह बयान उन्होंने उपराष्ट्रपति जेडी वेंस द्वारा डेनमार्क और ग्रीनलैंड के अधिकारियों के साथ होने वाली अहम वार्ता से कुछ घंटे पहले दिया।
राष्ट्रीय सुरक्षा के उद्देश्य से ग्रीनलैंड की आवश्यकता
ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में लिखा कि अमेरिका को राष्ट्रीय सुरक्षा के उद्देश्य से ग्रीनलैंड की आवश्यकता है। इस लक्ष्य को हासिल करने में नाटो (उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन) को अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए, वरना रूस या चीन इस क्षेत्र में प्रभाव बढ़ा सकते हैं। पोस्ट में उन्होंने कहा कि ग्रीनलैंड के अमेरिका के हाथों में आने से नाटो और भी अधिक शक्तिशाली और प्रभावी बन जाएगा। इससे कम कुछ भी स्वीकार नहीं है।
उधर, वाशिंगटन में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोके रासमुसेन और ग्रीनलैंड की विदेश मंत्री विवियन मोट्ज़फेल्ड के साथ इस मुद्दे पर बैठक प्रस्तावित है। ट्रंप ने यह भी कहा कि ग्रीनलैंड अमेरिका की ‘गोल्डन डोम’ मिसाइल रक्षा परियोजना के लिए बेहद अहम है और वे इस द्वीप का इस्तेमाल अमेरिका की सुरक्षा मजबूत करने के लिए करना चाहते हैं। उन्होंने रूसी और चीनी जहाजों से उत्पन्न संभावित खतरों का हवाला भी दिया। हालांकि, ग्रीनलैंड के कई निवासियों और विशेषज्ञों ने इन दावों पर सवाल उठाए हैं।
द्वीप बिकाऊ नहीं
ग्रीनलैंड, नाटो सहयोगी देश डेनमार्क का अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र है। हाल के दिनों में यह क्षेत्र भू-राजनीतिक खींचतान के केंद्र में आ गया है, क्योंकि ट्रंप लगातार अमेरिका के नियंत्रण की बात कर रहे हैं, जबकि ग्रीनलैंड के निवासी कह चुके हैं कि उनका द्वीप बिकाऊ नहीं है। व्हाइट हाउस ने इस आर्कटिक द्वीप पर बलपूर्वक कब्जे की संभावना से भी साफ तौर पर इनकार नहीं किया है।
कूटनीतिक स्तर पर गतिविधियां तेज
इस बीच, कूटनीतिक स्तर पर गतिविधियां तेज हो गई हैं। अमेरिका में डेनमार्क के राजदूत अमेरिकी कांग्रेस के आर्कटिक कॉकस से जुड़े सीनेटरों से मुलाकात करने वाले हैं। अमेरिकी कांग्रेस में न्यू हैम्पशायर की डेमोक्रेट सीनेटर जीन शाहीन और अलास्का की रिपब्लिकन सीनेटर लिसा मुर्कोव्स्की ने एक द्विदलीय विधेयक पेश किया है, जिसमें रक्षा या विदेश विभाग के फंड का इस्तेमाल किसी नाटो सदस्य देश के संप्रभु क्षेत्र पर उसकी या उत्तरी अटलांटिक परिषद की सहमति के बिना कब्जा करने या उसे अपने साथ मिलाने पर रोक का प्रावधान है।
इसके अलावा, दोनों दलों के सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल सप्ताह के अंत में डेनमार्क और ग्रीनलैंड के अधिकारियों से मुलाकात के लिए कोपेनहेगन जाने वाला है।