Pakistan Defence Budget: पाकिस्तान अपनी जनता के लिए दो वक्त की रोटी का इंतजमा भले ही न कर पाए लेकिन अपनी रक्षा तैयारी पर दिल खोलकर खर्च कर रहा है। शिक्षा, स्वास्थ्य और योजनाओं के लिए उसके पास पैसे नहीं हैं लेकिन उसके रक्षा बजट (Defence Budget) में इजाफे को देखकर लगेगा कि उसके सामने बुनियादी समस्याएं एवं चुनौतियां नहीं हैं। पाकिस्तान ने अपने रक्षा बजट में करीब 18 प्रतिशत की भारी वृद्धि की है। अपने रक्षा बजट में भारी वृद्धि उसने ऐसे समय की है जब महंगाई चरम पर है। वह पीओके (PoK) के लोगों को सस्ता आटा और दाल नहीं दे पा रहा है। इसके खिलाफ वहां लोग हिंसक प्रदर्शन कर रहे हैं।
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18.77 ट्रिलियन पाकिस्तानी रुपये का बजट प्रस्तावित
शहबाज सरकार ने शुक्रवार को जुलाई 2026 से शुरू होने वाले वित्तीय वर्ष के लिए 18.77 ट्रिलियन पाकिस्तानी रुपये (लगभग 67.49 अरब डॉलर) का बजट प्रस्तावित किया है। इस बजट में रक्षा खर्च बढ़ाकर 3 ट्रिलियन पाकिस्तानी रुपये (करीब 10.79 अरब डॉलर) कर दिया गया है, जो पिछले वर्ष के 2.55 ट्रिलियन रुपये से अधिक है। रक्षा बजट में यह बढ़ोतरी ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत के साथ हुए संक्षिप्त लेकिन तीव्र सैन्य टकराव के एक साल बाद की गई है। इस संघर्ष ने पाकिस्तान की रणनीतिक कमजोरियों को उजागर किया था और सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने की आवश्यकता पर नया जोर दिया था।
सेना पर कहां कितना खर्च
- पाकिस्तान का रक्षा बजट 18 % बढ़ा
- थल सेना - 1 लाख 28 हजार 400 करोड़
- एयरफ़ोर्स - 57 हजार 300 करोड़
- नौसेना - 29 हजार 300 करोड़
- कुल बढ़ोतरी: 405 अरब
सैन्य तैयारी, रक्षा क्षमता को मजबूत बनाने पर जोर
सरकार ने बजट में विकास कार्यों पर होने वाले खर्च को दबाव में रखते हुए रक्षा व्यय को प्राथमिकता दी है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा की जरूरतों और आर्थिक सुधार के प्रयासों के बीच संतुलन बनाने की चुनौती को दर्शाता है। रक्षा खर्च में 18 प्रतिशत की वृद्धि पाकिस्तान के नए बजट की प्रमुख विशेषताओं में से एक है। सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि सैन्य तैयारी और रक्षा क्षमता को मजबूत करने पर उसका फोकस जारी रहेगा। यह आवंटन ऐसे समय में किया गया है जब पिछले वर्ष भारत-पाकिस्तान संघर्ष के बाद सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ी हुई हैं। इस संघर्ष के बाद दोनों देशों ने अपनी सैन्य तैयारियों और परिचालन क्षमताओं का पुनर्मूल्यांकन किया था।
गरीबी और महंगाई पाकिस्तान में चरम पर
हालांकि, रक्षा बजट में यह बढ़ोतरी पाकिस्तान की कमजोर आर्थिक स्थिति के बीच हुई है। इस्लामाबाद एक ओर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की शर्तों का पालन करने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर ऐसे अलोकप्रिय कदमों से बचना चाहता है जो देश के भीतर राजनीतिक विरोध और जन असंतोष को बढ़ा सकते हैं। गरीबी और महंगाई पाकिस्तान में चरम पर हैं। पाकिस्तान के सभी प्रांतों में गरीबी बेहिसाब बढ़ रही है। पाकिस्तान में पिछले छह वर्षों में गरीबी सात प्रतिशत बढ़ गई है जिससे लगभग 2.7 करोड़ लोग गरीबी के दायरे में आ गए हैं और इसके साथ ही देश में कुल गरीबों की संख्या बढ़कर सात करोड़ हो गई है। देश के राष्ट्रीय आर्थिक सर्वेक्षण में यह बात सामने आई है।
2024-25 में गरीबी बढ़कर 28.9 प्रतिशत हुई
पाकिस्तान आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26, को बृहस्पतिवार को वार्षिक प्रक्रिया के तहत जारी किया गया। यह प्रक्रिया संघीय बजट पेश किए जाने से पहले आर्थिक संकेतकों को साझा करने के लिए की जाती है। इस सर्वेक्षण में सामने आया है कि वर्ष 2018-19 में गरीबी का स्तर 21.9 प्रतिशत था, जो 2024-25 में बढ़कर 28.9 प्रतिशत हो गया। सर्वेक्षण के अनुसार ग्रामीण गरीबी 28.2 प्रतिशत से बढ़कर 36.2 प्रतिशत हो गई जबकि शहरी गरीबी 11 प्रतिशत से बढ़कर 17.4 प्रतिशत तक पहुंच गई। प्रांतीय स्तर के आंकड़ों से पता चलता है कि सभी क्षेत्रों में गरीबी में वृद्धि दर्ज की गई है।
बलूचिस्तान में सबसे ज्यादा गरीबी
पंजाब प्रांत में यह 16.5 प्रतिशत से बढ़कर 23.3 प्रतिशत हो गई, सिंध में 24.5 प्रतिशत से बढ़कर 32.6 प्रतिशत, खैबर पख्तूनख्वा में 28.7 प्रतिशत से बढ़कर 35.3 प्रतिशत और बलूचिस्तान में 41.8 प्रतिशत से बढ़कर 47 प्रतिशत हो गई। बलूचिस्तान में गरीबी दर सबसे अधिक दर्ज की गई, जबकि चारों प्रांतों में पंजाब में गरीबी दर सबसे कम रही। पाकिस्तान आर्थिक सर्वेक्षण को सरकार द्वारा हर वर्ष बजट से पहले उपलब्ध कराए जाने वाले आंकड़ों का एक विश्वसनीय स्रोत माना जाता है।
