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जिस बुलेट ट्रेन पर इतराता था चीन, उसी का कर्ज बना 'जी का जंजाल', अब किराए में करने जा रहा भारी-भरकम इजाफा

China Increases Bullet Train Fares: चीन में बुलेट ट्रेन नेटवर्क देश के इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण की क्षमता का प्रतीक है। हालांकि, इस इंफ्रास्ट्रक्चर को डेवलप करने के लिए चीन ने भारी कर्ज लिया है। जानकारी के मुताबिक, चीन में रेल नेटवर्क को संचालित करने वाली इंडस्ट्री चाइना स्टेट रेलवे ग्रुप का कर्ज 870 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है।

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भारत में बनेगी बुलेट ट्रेन

China Increases Bullet Train Fares: मजबूत अर्थव्यवस्था और इंफ्रास्ट्रक्चर के नाम पर दंभ भरने वाला चीन इन दिनों कर्ज के जाल में फंस चुका है। देश की हालत यह हो गई है कि बीते एक-दो साल में चीन में बिजली-पानी के दाम पर महंगाई का जबरदस्त असर पड़ा है। इतना ही नहीं अन्य क्षेत्रों की सार्वजनिक सेवाओं की कीमतें भी बढ़ना जारी हैं। अब चीन अपने रेल नेटवर्क के सबसे स्ट्रॉग बुलेट ट्रेन का किराया बढ़ाने जा रहा है, जिसका बोझ चीन की जनता की जेब पर सीधे तौर पर पड़ेगा। जानकारी के मुताबिक, चीन बढ़ती लागत और भारी कर्ज को कम करने के लिए अपनी चार प्रमुख बुट्रेन ट्रेन लाइनों पर सवारियों के लिए किराए में तेजी से बढ़ोत्तर करने जा रहा है।

ऐसा तब है जब चीन में सार्जनिक सेवाओं को स्थानीय सरकारों द्वारा भारी-भरकम सब्सिडी दी जाती है, लेकिन बढ़ते ऋण का मतलब है कि चीन की प्रांतीय सरकारों के पास कीमतें कम रखने के लिए पैसों की भारी कमी है। ऐसे में चीन में सब्सिडी वाली सार्वजनिक सेवाओं को घाटे को रोकने के लिए इस कदम को उठाया जा रहा है। यह चीन की जनता के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। दरअसल, इस साल की शुरुआत में यहां के कुछ शहरों में पानी और प्राकृतिक गैस के बिल भी बढ़ा दिए गए थे।

चाइना रेलवे पर 870 बिलियन डॉलर तक का कर्ज

चीन में बुलेट ट्रेन का किराया बढ़ना एक गंभीर राजनीतिक मुद्दा है क्योंकि यहां का बुलेट ट्रेन नेटवर्क देश के इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण की क्षमता का प्रतीक है। हालांकि, इस इंफ्रास्ट्रक्चर को डेवलप करने के लिए चीन ने भारी कर्ज लिया है। जानकारी के मुताबिक, चीन में रेल नेटवर्क को संचालित करने वाली इंडस्ट्री चाइना स्टेट रेलवे ग्रुप का कर्ज 870 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। इस नेटवर्क को बनाने में आया कर्ज स्टेट रेलवे ग्रुप तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका इसर प्रांतीय व नगरीय सरकारों पर भी पड़ने लगा है। अब कर्ज से छुटकारा पाने के लिए चीन बुलेट ट्रेन में प्रथम और द्वितीय श्रेणी के टिकटों के लिए अधिकतम किराया लगभग 20% बढ़ सकता है। वहीं बिजनेस-क्लास सीटों के लिए किराया 39% तक बढ़ने का अनुमान है।

28000 मील लंबा है बुलेट ट्रेन का नेटवर्क

बता दें, चीन में 2008 से बुलेट ट्रेन का जाल बिछाया जा रहा है और वर्तमान में यह 28000 मील लंबा हो चुका है। बुलेट ट्रेन के रूट्स चीन में हर प्रमुख शहर के साथ-साथ छोटे नगरों और कस्बों को भी जोड़ते हैं। चीन की बुलेट ट्रेनें आमतौर पर 186 या 217 मील प्रति घंटे की रफ्तार से चलती हैं। यहां की पटरियां सीधी होने के कारण रेलगाड़ियां बिना धीमी गति के लंबी दूरी तक चलती हैं।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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