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बागी ऋतब्रत बनर्जी ही रहेंगे बंगाल विधानसभा में LoP, कलकत्ता हाई कोर्ट का स्पीकर के फैसले पर रोक से इनकार, ममता को बड़ा झटका

Justice Krishna Rao Ritabrata Banerjee: जस्टिस कृष्ण राव ने विधानसभा स्पीकर द्वारा बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष (LoP) नियुक्त करने के फैसले पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया है।

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बागी ऋतब्रत बनर्जी ही रहेंगे बंगाल विधानसभा में LoP, कलकत्ता हाई कोर्ट का स्पीकर के फैसले पर रोक से इनकार, ममता को बड़ा झटका

Calcutta High Court TMC: पश्चिम बंगाल की सियासत में जारी घमासान के बीच सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) को कानूनी मोर्चे पर एक बड़ा झटका लगा है। कलकत्ता हाई कोर्ट ने राज्य विधानसभा के स्पीकर रथिंद्रनाथ बोस के उस फैसले पर अंतरिम रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया है, जिसमें उन्होंने टीएमसी के बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी (Ritabrata Banerjee) को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष (LoP) के रूप में मान्यता दी थी।

यह फैसला टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी की पसंद के उम्मीदवार और वरिष्ठ नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय (Sobhandeb Chattopadhyay) के लिए एक करारा झटका माना जा रहा है, जिन्हें पार्टी आधिकारिक तौर पर इस पद पर देखना चाहती थी।

जस्टिस कृष्ण राव ने सुनाया फैसला

कलकत्ता हाई कोर्ट के जस्टिस कृष्ण राव की सिंगल बेंच ने इस मामले की सुनवाई करते हुए टीएमसी की याचिका पर तुरंत कोई भी अंतरिम रोक लगाने से मना कर दिया। टीएमसी की ओर से वरिष्ठ वकील और लोकसभा सांसद कल्याण बनर्जी ने दलील दी थी कि किसी भी राजनीतिक दल में नेता प्रतिपक्ष चुनने का अधिकार 'पॉलिटिकल पार्टी' (ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली मूल टीएमसी) को होता है, न कि 'लेजिस्लेटिव पार्टी' (विधायकों के गुट) को। उन्होंने आरोप लगाया कि स्पीकर का यह फैसला संविधान के मूल ढांचे पर प्रहार करता है। हालांकि, कोर्ट ने फिलहाल स्पीकर के आदेश को पलटने या उस पर स्टे लगाने से इनकार करते हुए अगली प्रक्रियाओं की तरफ रुख किया है।

क्या है पूरा विवाद और 'सिग्नेचर थ्योरी'?

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद, टीएमसी ने शोभनदेव चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष बनाने का प्रस्ताव विधानसभा स्पीकर को भेजा था। लेकिन इस कहानी में ट्विस्ट तब आया जब दो विधायकों, ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने शिकायत दर्ज कराई कि शोभनदेव के समर्थन वाले पत्र पर उनके हस्ताक्षर जाली हैं।

इसके तुरंत बाद, मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के निर्देश पर इस मामले की सीआईडी (CID) जांच शुरू हो गई। इस बगावत को देखते हुए टीएमसी ने 1 जून को ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को 'पार्टी विरोधी गतिविधियों' के आरोप में निष्कासित कर दिया।

58 विधायकों का समर्थन और स्पीकर की मुहर

पार्टी से निकाले जाने के बावजूद, ऋतब्रत बनर्जी ने पासा पलट दिया। उन्होंने टीएमसी के 80 में से 58 बागी विधायकों के समर्थन का पत्र स्पीकर रथिंद्रनाथ बोस को सौंप दिया और खुद को असली विपक्षी गुट का नेता घोषित करने की मांग की। 3 जून को स्पीकर ने इस बहुमत को स्वीकार करते हुए रीताब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष (LoP) और संदीपन साहा को मुख्य सचेतक (Chief Whip) के रूप में मान्यता दे दी। इसी फैसले के खिलाफ शोभनदेव चट्टोपाध्याय और खुद ममता बनर्जी ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

Nitin Arora
नितिन अरोड़ाauthor

नितिन अरोड़ा टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया में उनका 6 वर्षों का अनुभव है। वह राजनीति, देश–विदेश की बड़ी घटनाओं और समसामयिक मुद्दों को गहराई से समझकर उन्हें सटीक और सरल भाषा में प्रस्तुत करने में माहिर हैं। उन्होंने अपने करियर में लगातार करंट अफेयर्स, पॉलिटिकल डेवलपमेंट्स, डिप्लोमैटिक घटनाएं और डिफेंस सेक्टर से जुड़े विषयों पर प्रभावशाली कॉन्टेंट तैयार किया है और अबतक 6 हजार से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। विभिन्न टॉपिक्स पर एक्सप्लेनेर, डेटा-आधारित रिपोर्ट्स और विश्लेषणात्मक कॉपी लिखने में उनकी मजबूत पकड़ है।

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