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डोनाल्ड ट्रंप ही नहीं इन अमेरिका के इन राष्ट्रपतियों पर भी चल चुकी है गोली, लंबी है लिस्ट

Assassination attempt on US Presidents: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हत्या का प्रयास कोई पहली घटना नहीं है। अमेरिका में राष्ट्रपति और पूर्व राष्ट्रपति पर हमले का इतिहास काफी पुराना है। अब्राहम लिंकन, जॉन एफ कैनेडी जैसे राष्ट्रपतियों की हत्या भी की जा चुकी है। यहां तक की जॉर्ज बुश और बराक ओबामा की भी हत्या का प्रयास हुआ था।

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डोनाल्ड ट्रंप पर हमला

Assassination attempt on US Presidents: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर हमला हुआ है। उनकी रैली के दौरान गोलीबारी की गई। कई राउंड फायरिंग हुई। इसमें ट्रंप घायल भी हुए हैं। हालांकि, वह सुरक्षित हैं। अमेरिकी सीक्रेस सर्विस ने बताया है कि एक हमलावर को मार गिराया गया और गोलीबारी की घटना में रैली में शामिल एक व्यक्ति की भी मौत हुई है। सामने आए वीडियो को देखकर लगता है कि यह हमला ट्रंप की हत्या के लिए किया गया था।

गोलीबारी में एक गोली उनके कान को छूते हुए निकल गई, जिसके बाद ट्रंप जमीन पर गिर पड़े। उनके चेहरे पर खून भी देखा गया। अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने इस हमले की निंदा की है। उन्होंने कहा है कि अमेरिका में हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है। हालांकि, अमेरिका में राष्ट्रपति या पूर्व राष्ट्रपति की हत्या या हत्या के प्रसास की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी कई राष्ट्रपति व पूर्व राष्ट्रपति की हत्या का प्रयास किया जा चुका है। आइए जानते हैं उनके बारे में...

राष्ट्रपति एंड्रयू जैक्सन: अमेरिका में 1835 में रिचर्ड लॉरेंस ने कैपिटल बिल्डिंग के बाहर राष्ट्रपति जैक्शन की हत्या का प्रयास किया। यह हमला तब हुआ, जब वह एक अंतिम संस्कार में भाग ले रहे थे। राष्ट्रपति जैक्शन पर दो गोलियां चलाई गईं। हालांकि, दोनों ही मिसफायर हो गईं।

अब्राहम लिंकन: अमेरिकी राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन को 1865 में एक थिएटर में गोली मार दी गई थी। इससे पहले भी 1861 और 1864 में उनकी हत्या के दो प्रयास किए जा चुके थे।

जेम्स ए गारफील्ड: 1881 को वाशिंगटन डीसी के बाल्टीमोर और पोटोमैक रेलवे स्टेशन पर राष्ट्रपति जेम्स ए. गारफील्ड को गोली मार दी गई थी। उन्हें दो गोली लगी थीं। 19 सितंबर, 1881 को उनकी मृत्यु हो गई।

विलियम मैककिनले: 6 सितंबर, 1901 को अमेरिका के राष्ट्रपति विलियम मैककिनले को एक सार्वजनिक कार्यक्रम में दो गोली मारी गईं, जिसके बाद उनकी मौत हो गई।

फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट: ट्रंप की तरह ही फ्रैंकलिन डी रूजवेल्ट पर 1912 के चुनाव अभियान के दौरान हमला हुआ था। मिल्वौकी में भाषण देने के लिए जाते समय उन पर गोली चली थी। 1933 में राष्ट्रपति पद पर रहने के दौरान भी उनकी हत्या का प्रयास किया गया था।

हैरी एस. ट्रूमैन: रूजवेल्ट की मृत्यु के बाद ट्रूमैन ने अमेरिकी राष्ट्रपति का पद संभाला। 1950 में प्यूर्टो रिकान राष्ट्रवादियों द्वारा व्हाइट हाउस के सामने उन पर गोली चलाई गई।

जॉन एफ. कैनेडी: अमेरिकी राष्ट्रपति कैनेडी की कार को उड़ाने की योजना बनाई थी, लेकिन यह साजिश नाकाम रही। इसके बाद 1963 में कैनेडी की हत्या कर दी गई।

जेराल्ड फ़ोर्ड: अमेरिकी राष्ट्रपति फोर्ड की कैलिफोर्निया में हत्या के दो अलग-अलग प्रयास किए गए, दोनों ही प्रयास महिलाओं द्वारा किए गए थे।

रोनाल्ड रीगन: वाशिंगटन के एक होटल के बाहर रीगन को 1981 में गोली मार दी गई थी, इस हमले में वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

जॉर्ज डब्ल्यू. बुश: 2005 में जॉर्जिया में एक भाषण के दौरान बुश पर ग्रेनेड फेंका गया, लेकिन विस्फोट नहीं हुआ।

बराक ओबामा: 2011 में व्हाइट हाउस में गोलीबारी के दौरान एक व्यक्ति पर ओबामा की हत्या के प्रयास का आरोप लगाया गया था।

पूर्व राष्ट्रपतियों को आजीवन मिली है सीक्रेट सर्विस की सुरक्षा

अमेरिका में 1965 से सभी पूर्व राष्ट्रपतियों को पद छोड़ने के बाद आजीवन सीक्रेट सर्विस सुरक्षा प्राप्त है। 1997 में इसे कुछ समय के लिए बदल दिया गया था और पद छोड़ने के बाद सुरक्षा को केवल दस साल तक सीमित किया गया था, लेकिन राष्ट्रपति ओबामा ने 2012 में आजीवन सुरक्षा बहाल कर दी थी।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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