Bangladesh violence: हिंसा के बीच बांग्लादेश में तख्तापलट हो गया है। बढ़ते विरोध के बीच एक तरफ जहां प्रधानमंत्री शेख हसीना ने ढाका छोड़ दिया है वहीं देश की कमान सेना ने अपने हाथों में लिया है। शेख हसीना सेना के एक हेलीकॉप्टर से ढाका से निकल गई हैं। वह कहां गई हैं इसकी कोई जानकारी नहीं मिली है। इस बीच कहा जा रहा है कि वह भारत आ सकती हैं। सेना प्रमुख ने प्रेस कांफ्रेंस में साफ कर दिया कि वह इस्तीफा दे चुकी हैं।
भाषण रिकॉर्ड करने का भी नहीं मिला मौका
बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अपने इस्तीफे की मांग को लेकर हो रहे बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों के कारण राजधानी ढाका छोड़ दिया। वह और उनकी बहन सुरक्षित स्थान के लिए गणभवन (प्रधानमंत्री का आधिकारिक निवास) छोड़ चुके हैं। वह एक भाषण रिकॉर्ड करना चाहती थीं, लेकिन उन्हें ऐसा करने का मौका भी नहीं मिल सका।लंदन रवाना होने की संभावना
बांग्लादेश में बड़े पैमाने पर सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बाद प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे चुकीं शेख हसीना के लंदन रवाना होने की जानकारी है। मामले के बारे में जानकारी रखने वाले लोगों ने यह जानकारी दी। सूत्रों ने बताया कि वह लंदन जा रही हैं।

शेख हसीना ने देश छोड़ा
पीएम आवास में घुसी भीड़, जमकर तोड़फोड़
बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री शेख हसीना के सरकारी आवास में घुस गई और तोड़फोड़ शुरू कर दी है। हजारों लोग आवास के बाहर प्रदर्शन कर रहे हैं। बांग्लादेश को आजादी दिलाने वाले नायक शेख मुजीबुर रहमान की प्रतिमा को ही प्रदर्शनकारी गिराने में जुटे हैं। लोग आवास घुसकर तोड़फोड़ मचा रहे हैं और इन्हें रोकने वाला कोई नहीं है। वहीं, पुलिस का यहां नामोंनिशान नहीं दिख रहा। वहीं, ढाका में भी जगह-जगह आगजनी का दौर भी शुरू हो गया है।ढाका में आर्मी चीफ की प्रेस कांफ्रेंस
ढाका में सेना प्रमुख जनरल वकार-उज-जमान ने प्रेस कांफ्रेंस करके शेख हसीना के इस्तीफे की पुष्टि की। उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री शेख हसीना ने इस्तीफा दे दिया है। अंतरिम सरकार का गठन होगा। हम सब मिलकर एक सुंदर भविष्य का निर्माण करेंगे। हमने सभी देशों के साथ मिलकर बैठक में चर्चा की है और यह काफी अच्छी रही। भरोसा रखिए मैंं कमान संभाल रहा हूं। हमें कुछ समय दें, हम जरूर किसी अच्छे समाधान पर पहुंचेंगे। लोग मारे जा रहे हैं, इसलिए हमने ये दायित्व लिया है, आप सबका सहयोग चाहिए। हम प्रदर्शनकारी छात्रों से बात करेंगे और उनकी सभी मांगें मानेंगे। पुलिस और सुरक्षाबलों को छात्रों पर गोली न चलाने का आदेश दिया गया है। अब कोई हिंसा नहीं होगी। हिंसा करके कोई फायदा नहीं है।
सेना प्रमुख जनरल वकार-उज-जमान ने प्रदर्शनकारी छात्रों के लिए कहा कि आपकी जो मांगें हैं, उसे हम पूरा करेंगे। देश में शांति वापस लाएंगे। तोड़फोड़-आगजनी, मारपीट से दूर रहिए। आप लोग हमारे साथ मिलकर चलेंगे तो हालात सुधरेंगे। मारपीट हिंसा से कुछ नहीं मिलेगा। संघर्ष और अराजकता से दूर रहिए।
शेख हसीना के बेटे की अपील
इस बीच बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना के बेटे ने सोमवार को देश के सुरक्षा बलों से उनके शासन पर किसी भी तरह के कब्जे को रोकने का आग्रह किया है। अमेरिका से सजीब वाजेद जॉय ने फेसबुक पर एक पोस्ट में कहा, आपका कर्तव्य हमारे लोगों और हमारे देश को सुरक्षित रखना और संविधान को बनाए रखना है। इसका मतलब है कि किसी भी अनिर्वाचित सरकार को एक मिनट के लिए भी सत्ता में न आने दें, यह आपका कर्तव्य है। वहीं, बांग्लादेश के कानून मंत्री ने कहा कि स्थिति बहुत खराब है, क्या हो रहा है, मुझे खुद नहीं पता।300 से अधिक की मौत
दरअसल, बांग्लादेश के विभिन्न हिस्सों में प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस्तीफे की मांग को लेकर फिर हिंसा शुरू हो गई है। प्रदर्शनकारियों और सत्तारूढ़ आवामी लीग के समर्थकों के बीच रविवार को भीषण झड़पों में 14 पुलिसकर्मियों सहित 300 लोगों की मौत हो गई और सैकड़ों अन्य घायल हो गए। इसके चलते अधिकारियों ने मोबाइल इंटरनेट सेवा बंद कर दी और अनिश्चितकाल के लिए पूरे देश में कर्फ्यू लागू कर दिया। असहयोग आंदोलन को लेकर देशभर में हुई झड़पों, गोलीबारी और जवाबी हमलों में 300 से अधिक लोगों की जान चली गई। पुलिस मुख्यालय के अनुसार, देशभर में 14 पुलिसकर्मियों के मारे जाने की खबर है जिनमें से 13 सिराजगंज के इनायतपुर थाने के थे। अखबार के अनुसार, कोमिला के इलियटगंज में एक व्यक्ति की हत्या कर दी गई। इसके अलावा 300 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। हिंसा का ये दूसरा दौर है, कुछ दिनों की शांति के बात प्रदर्शनकारी सड़कों पर हैं। आखिर क्यों हो रही है बांग्लादेशों में हिंसा और क्या हैं छात्रों की मांगें, समझते हैं।
आरक्षण है हिंसा की वजह
दरअसल, ढाका और अन्य शहरों में विश्वविद्यालय के छात्र 1971 में पाकिस्तान से देश की आजादी के लिए लड़ने वाले युद्ध नायकों के रिश्तेदारों के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की कुछ नौकरियों को आरक्षित करने पर संग्राम छिड़ा हुआ है। आरक्षण व्यवस्था के खिलाफ छात्र कई दिनों से रैलियां और प्रदर्शन कर रहे हैं। मौजूदा आरक्षण प्रणाली के तहत 56 प्रतिशत सरकारी नौकरियां आरक्षित हैं, जिनमें से 30 प्रतिशत 1971 के मुक्ति संग्राम के स्वतंत्रता सेनानियों के वंशजों के लिए, 10 प्रतिशत पिछड़े प्रशासनिक जिलों, 10 प्रतिशत महिलाओं, पांच प्रतिशत जातीय अल्पसंख्यक समूहों और एक प्रतिशत नौकरियां दिव्यांगों के लिए आरक्षित हैं। इसके खिलाफ ही छात्र जुटे हुए हैं हसीना सरकार से व्यवस्था बदलने की मांग कर रहे हैं।
