Swami Sarvapriyananda : सिलिकॉन वैली की कंपनियां जब किसी समस्या को सिर्फ कंप्यूटिंग पावर से हल नहीं कर पातीं, तो आमतौर पर और इंजीनियर रखती हैं। ये सॉफ्टवेयर इंजीनियर अक्सर भारत से रखे जाते हैं। एंथ्रोपिक ने इस बार इससे आगे का रास्ता चुना। कंपनी ने धार्मिक विद्वानों, दार्शनिकों और धर्मशास्त्रियों की एक बैठक बुलाई, जिसमें भारत के एक संन्यासी भी शामिल थे। सवाल यह था कि हम जो चीज बना रहे हैं, वह असल में क्या है और उसकी सीमाएं क्या होनी चाहिए।
कौन हैं स्वामी सर्वप्रियानंद
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक बैठक में न्यूयॉर्क की वेदांत सोसाइटी के प्रमुख स्वामी सर्वप्रियानंद को भी बुलाया गया। वे अद्वैत वेदांत के विद्वान हैं। उन्होंने सार्वजनिक रूप से पुष्टि की है कि एंथ्रोपिक ने उन्हें कैलिफोर्निया बुलाया था। यह आयोजन Claude के प्रशिक्षण और AI नैतिकता से जुड़ा था। जून में दिए एक भाषण में उन्होंने कहा कि गोपनीयता समझौते (NDA) के कारण वे ब्योरा नहीं दे सकते। उन्होंने बताया कि प्रतिभागियों को कंपनी के ताजा काम की झलक दिखाई गई, जिसमें Mythos और प्रोजेक्ट ग्लासविंग शामिल थे।
स्वामी सर्वप्रियानंद 1994 में रामकृष्ण मिशन से जुड़े। इससे पहले उन्होंने भुवनेश्वर के ज़ेवियर इंस्टीट्यूट से MBA किया था। उन्होंने 2004 में संन्यास लिया और 2017 में न्यूयॉर्क की वेदांत सोसाइटी के आध्यात्मिक प्रमुख बने। वे 2019-20 में हार्वर्ड डिविनिटी स्कूल के फेलो भी रहे। माण्डूक्य उपनिषद पर उनके व्याख्यानों को ऑनलाइन लाखों बार देखा जा चुका है।
15 से ज्यादा परंपराओं से संवाद
एंथ्रोपिक के अनुसार कंपनी ने कई महीनों तक 15 से अधिक धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं के विद्वानों, पादरियों और नैतिकता विशेषज्ञों से बात की। इनमें यहूदी, ईसाई, बौद्ध, सिख और इस्लामी परंपराएं शामिल हैं। कंपनी चाहती है कि Claude किसी एक परंपरा को अपनाने के बजाय सबसे सीखे, खासकर उनसे जिन्होंने सदियों तक सद्गुण, चरित्र, नैतिक ज़िम्मेदारी और अच्छे जीवन पर विचार किया है। ऐसी चर्चाओं का असर Claude के संविधान, प्रशिक्षण में मज़बूत किए जाने वाले मूल्यों और सुरक्षा परीक्षणों पर पड़ सकता है।
क्या उन्नत AI में किसी रूप की चेतना हो सकती है?
एंथ्रोपिक के सह-संस्थापक क्रिस्टोफर ओलाह, जो AI के भीतरी कामकाज को समझने पर काम करते हैं, पूरे संवाद में मौजूद रहे। उन्होंने प्रतिभागियों से इस संभावना पर चर्चा की कि मॉडल इंसानी भावनाओं और व्यक्तित्व जैसा व्यवहार दिखा सकते हैं। NYT की एक रिपोर्ट के मुताबिक शोधकर्ता धार्मिक चिंतकों से यह गंभीरता से सोचने को कह रहे हैं कि उन्नत AI में किसी रूप की चेतना या नैतिक दर्जा हो सकता है। रब्बी अब्राहम नवोन को लगा कि शोधकर्ता Claude की चर्चा सॉफ्टवेयर से ज्यादा एक संभावित चेतन सत्ता की तरह कर रहे थे।
वेदांत का नजरिया
स्वामी सर्वप्रियानंद मानते हैं कि AI बुद्धि से जुड़े कार्य दोहरा सकता है, क्योंकि वेदांत में बुद्धि और मन दृश्य, यानी वस्तुनिष्ठ, तत्व हैं। लेकिन शुद्ध चेतना अलग विषय है। वे बुद्धि और चेतना में फ़र्क करते हैं और सवाल उठाते हैं कि क्या मशीन जागरूकता पैदा कर सकती है या सिर्फ़ जागरूक प्राणी के व्यवहार की नकल।
एक प्रयोग में एंथ्रोपिक ने Claude को ऐसा टूल दिया जो बड़े फ़ैसलों से पहले उसे उसकी नैतिक प्रतिबद्धताएं याद दिलाता है। कंपनी के मुताबिक आंतरिक परीक्षणों में इससे कुछ तरह के गलत व्यवहार घटे।
