रूसी तेल पर अमेरिका के दावों के बीच एस जयशंकर का अहम बयान, भारत का नजरिया कर दिया साफ
- Edited by: अमित कुमार मंडल
- Updated Feb 15, 2026, 07:56 AM IST
अमेरिका के साथ व्यापार समझौते के तहत भारत को रूसी तेल पर निर्भरता कम करने के कदम से क्या देश की रणनीतिक स्वायत्तता प्रभावित हुई है, इस सवाल के जवाब में जयशंकर ने कहा कि नई दिल्ली अभी भी रणनीतिक स्वायत्तता का प्रयोग करती है जो बहुत गहरी है और...राजनीतिक परिदृश्य से परे है।
एस जयशंकर ने दिया रूसी तेल खरीद मामले पर अहम बयान
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शनिवार को वाशिंगटन के इस दावे के मद्देनजर कि नई दिल्ली ने रूस से तेल आयात कम करने की प्रतिबद्धता जताई है, अहम बयान दिया है। जयशंकर ने कहा कि भारत रणनीतिक स्वायत्तता की नीति पर कायम है और ऊर्जा खरीद संबंधी फैसला उपलब्धता, लागत और जोखिमों को ध्यान में रखते हुए लिए जाएंगे। म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में अपने जर्मन समकक्ष जोहान वाडेफुल के साथ चर्चा में भाग लेते हुए जयशंकर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर अभूतपूर्व बदलावों के बीच दुनिया भर के देश अपनी नीतियों का पुनर्मूल्यांकन कर रहे हैं और एक-दूसरे को मजबूत करने के लिए साझा आधार तलाश रहे हैं।
रूसी तेल कटौती पर जयशंकर ने दिया क्या जवाब
अमेरिका के साथ व्यापार समझौते के तहत भारत को रूसी तेल पर निर्भरता कम करने के कदम से क्या देश की रणनीतिक स्वायत्तता प्रभावित हुई है, इस सवाल के जवाब में जयशंकर ने कहा कि नई दिल्ली अभी भी रणनीतिक स्वायत्तता का प्रयोग करती है जो बहुत गहरी है और...राजनीतिक परिदृश्य से परे है।
उन्होंने कहा कि हम रणनीतिक स्वायत्तता के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं क्योंकि यह हमारे इतिहास और विकास का अभिन्न अंग है। उन्होंने कहा, ऊर्जा के मुद्दों की बात करें तो, आज यह एक जटिल बाजार है। भारत में तेल कंपनियां—यूरोप की तरह, और शायद दुनिया के अन्य हिस्सों की तरह उपलब्धता, लागत और जोखिमों को ध्यान में रखते हुए वे निर्णय लेती हैं जो उनके सर्वोत्तम हित में हों।
ट्रंप प्रशासन के दावों पर भारत का कूटनीतिक जवाब
बता दें कि भारत ने ट्रंप प्रशासन के उन बार-बार के दावों की न तो पुष्टि की है और न ही खंडन किया है कि उसने अमेरिका के साथ व्यापार समझौते के तहत रूसी तेल खरीद को समाप्त करने की प्रतिबद्धता जताई है। इस समझौते के तहत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय निर्यात पर टैरिफ 50% से घटाकर 18% कर दिया है। इसमें पिछले साल रूसी तेल खरीद पर भारत पर लगाए गए 25% दंडात्मक शुल्क को हटाना भी शामिल है। जयशंकर ने कहा कि भारत के पास पश्चिमी देशों के साझेदारों से हमेशा सहमत हुए बिना स्वतंत्र निर्णय लेने का विकल्प मौजूद है। उन्होंने कहा, अगर आपके प्रश्न का सार यह है कि क्या मैं स्वतंत्र सोच रखूंगा और अपने निर्णय लूंगा, और क्या मैं ऐसे विकल्प चुनूंगा जो आपकी सोच से मेल न खाएं… तो हां, ऐसा हो सकता है।
जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र में सुधार की वकालत की
उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी प्रशासन द्वारा लिया गया रुख बदलाव और निरंतरता और आश्वासन की एक हद तक दोनों की ओर इशारा करता है, और यह मुद्दों, स्थितियों और संगठनों के प्रति वाशिंगटन के दृष्टिकोण में चल रहे बदलावों को दर्शाता है। जयशंकर ने कहा कि इन घटनाक्रमों ने संयुक्त राष्ट्र में सुधार की जरूरत को रेखांकित किया है। विशेष रूप से पिछले पांच वर्षों में दुनिया द्वारा झेले गए कई झटकों के बाद, जिनमें कोविड-19 महामारी, यूक्रेन संघर्ष, मध्य पूर्व में तनाव और चीन का उदय तथा वैश्विक व्यवस्थाओं पर इसका प्रभाव शामिल है।
जर्मनी ने बताया भारत को अहम भागीदार
जयशंकर ने कहा कि ऐसे समय में जब दुनिया अधिक बहुध्रुवीयता और निर्णय लेने के अधिक केंद्रों की ओर अग्रसर हो रही है, भारत के लिए यूरोप के साथ अपने संबंधों को पुनर्जीवित करना महत्वपूर्ण है। वाडेफुल ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर अनिश्चितताओं ने जर्मनी सहित यूरोप को समान मूल्यों और हितों वाले नए वैश्विक साझेदारों की तलाश करने के लिए प्रेरित किया है। उन्होंने कहा कि भारत जर्मनी के सबसे महत्वपूर्ण साझेदारों में से एक है। उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष संयुक्त राष्ट्र में सुधार के लिए मिलकर काम कर रहे हैं और व्यापार, रक्षा, जलवायु परिवर्तन के प्रति लचीलापन और लोकतंत्र और अंतरराष्ट्रीय नियमों पर आधारित मानकों की रक्षा में भी सहयोग कर रहे हैं।
