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36000 फिलिस्तीनियों की मौत के बाद गाजा में खत्म होगी जंग! अमेरिका का प्रस्ताव UN सुरक्षा परिषद में पास

Ceasefire in Gaza: अमेरिका द्वारा गाजा में संघर्ष विराम के लिए लाये गए प्रस्ताव पर सोमवार को चीन सहित 14 सदस्य देशों ने वोट किया, जबकि रूस ने मतदान में भाग नहीं लिया। इसके तहत बंधकों की रिहाई के बदले में इजरायल के साथ संघर्ष को समाप्त करने की जिम्मेदारी हमास पर डाल दी गई है।

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Israel-Hamas war

Photo : AP

Ceasefire in Gaza: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में गाजा में युद्ध विराम के लिए अमेरिका का प्रस्ताव पारित हो गया। इसके तहत बंधकों की रिहाई के बदले में इजरायल के साथ संघर्ष को समाप्त करने की जिम्मेदारी हमास पर डाल दी गई है। अमेरिका द्वारा लाये गए प्रस्ताव पर सोमवार को चीन सहित 14 सदस्य देशों ने वोट किया, जबकि रूस ने मतदान में भाग नहीं लिया। इसके साथ ही ये प्रस्ताव पारित हो गया।

इसके तहत तीन-चरण में गाजा में शांति प्रस्ताव लागू किया जाएगा, जिसमें कतर और मिस्र की भूमिका भी होगी। अमेरिकी स्थायी प्रतिनिधि लिंडा थोमा-ग्रीनफील्ड ने मतदान के बाद कहा, आज इस परिषद ने हमास को एक स्पष्ट संदेश दिया है कि युद्ध विराम समझौते को स्वीकार करो। उन्होंने कहा, इजरायल पहले ही इस समझौते पर सहमत हो चुका है और अगर हमास भी ऐसा ही करता है तो लड़ाई आज ही रुक सकती है।

बंधकों की रिहाई हुई तो इजराइल रोकेगा जंग

उन्होंने कहा, मिस्र और कतर ने अमेरिका को भरोसा दिया है कि वे हमास के साथ रचनात्मक तरीके से जुड़ने के लिए काम करना जारी रखेंगे और अमेरिका यह सुनिश्चित करने में मदद करेगा कि इजरायल भी अपने दायित्वों को पूरा करे, बशर्ते कि हमास इस समझौते को स्वीकार कर ले। इजरायली राजनयिक रीट शापिर बेन-नफ्ताली ने परिषद से कहा, अगर हमास बंधकों को रिहा कर दे और आत्मसमर्पण कर दे तो युद्ध समाप्त हो जाएगा। एक भी गोली नहीं चलेगी।परिषद का यह प्रस्ताव अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन के इजरायल पहुंचने के बीच आया। बता दें, इजरायली वॉर कैबिनेट में शामिल विपक्षी नेता बेनी गैंट्ज़ ने रविवार को प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर बंधकों को वापस लाने और युद्ध को समाप्त करने के बजाय अपने राजनीतिक हितों को प्राथमिकता देने का आरोप लगाते हुए इस्तीफा दे दिया था।

अब तक 36000 फिलिस्तीनियों की हुई है मौत

हमास द्वारा नियंत्रित गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इजरायल के जवाबी हमलों में अब तक 36,000 से अधिक फिलिस्तीनी मारे गए हैं। थॉमस-ग्रीनफील्ड के अनुसार, सुरक्षा परिषद द्वारा स्वीकृत योजना छह सप्ताह के युद्ध विराम के साथ शुरू होगी, जिसमें इजरायली बंधकों, जिसमें महिलाएं, घायल और बुजुर्ग हैं, को छुड़ाया जाएगा और इसके बदले में इजरायली हिरासत से फिलिस्तीनियों को छोड़ा जाएगा। फिर इजरायल को गाजा के आबादी वाले क्षेत्रों से अपने सैनिकों को वापस बुलाना होगा और नागरिकों को अपने घरों में लौटने की अनुमति दी जाएगी। दूसरे चरण में, गाजा में मौजूद सभी अन्य बंधकों की रिहाई और गाजा से इजरायली सेना की पूरी तरह वापसी के बदले में शत्रुता का स्थायी अंत होगा। अंतिम चरण में गाजा के लिए एक पुनर्निर्माण योजना की शुरुआत होगी, और गाजा में मौजूद इजरायली और अन्य लोगों के अवशेषों को उनके परिवारों को वापस किया जाएगा।

(एजेंसी इनपुट - IANS)

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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