Iran Israel War: अमेरिका और इजराइल ने शनिवार को ईरान पर बड़ा हमला शुरू किया, जिसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी जनता से अपने भाग्य की बागडोर अपने हाथ में लेने और 1979 से देश पर शासन कर रहे इस्लामी नेतृत्व के खिलाफ विद्रोह करने का आह्वान किया। ईरान के सरकारी मीडिया ने शनिवार शाम को ’रेड क्रिसेंट’ के हवाले से बताया कि कम से कम 201 लोग मारे गए हैं और 700 से अधिक घायल हुए हैं।
ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए क्षेत्र में इजराइल और अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलें और ड्रोन दागे तथा हमले रातभर जारी रहे। ऐसा प्रतीत होता है कि पहला हमला ईरान सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के कार्यालयों के आसपास के इलाकों में हुआ और ईरानी मीडिया ने देशभर में हमलों की खबरें दी तथा राजधानी तेहरान से धुएं का गुबार उठता दिखायी दिया। ट्रंप ने बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान शुरू होने की घोषणा करते हुए एक वीडियो के माध्यम से कहा, जब हम अपना काम पूरा कर लेंगे, तो अपनी सरकार पर कब्ज़ा कर लेना। वह आपकी होगी जिसकी बागडोर आप अपने हाथ में ले सकोगे। संभवतः आने वाली कई पीढ़ियों में यह आपके पास एकमात्र मौका होगा। कई वर्षों से आप अमेरिका से मदद मांगते रहे हैं, लेकिन आपको कभी मदद नहीं मिली।
भविष्य का फैसला खुद अपने हाथों में ले सकें
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी इस व्यापक लक्ष्य को दोहराया। उन्होंने कहा-हमारा संयुक्त अभियान बहादुर ईरानी लोगों के लिए ऐसी परिस्थितियां पैदा करेगा, जिससे वे अपने भविष्य का फैसला खुद अपने हाथों में ले सकें। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एनबीसी न्यूज से कहा कि जहां तक मुझे पता है, खामेनेई और राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान जीवित हैं और उन्होंने इस हमले को अकारण, अवैध और पूरी तरह से अनुचित बताया।
कोई अमेरिकी हताहत नहीं हुआ
हमलों की शुरुआत के लगभग 12 घंटे बाद, अमेरिकी सेना ने कहा कि सैकड़ों ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमलों के बावजूद अमेरिकी ठिकानों पर कोई अमेरिकी हताहत नहीं हुआ और मामूली नुकसान हुआ। उसने कहा कि ईरान में रिवोल्यूशनरी गार्ड कमान की सुविधाओं, वायु रक्षा क्षमताओं, मिसाइल और ड्रोन प्रक्षेपण स्थलों और सैन्य हवाई अड्डों को निशाना बनाया गया। इन हमलों ने ईरान में अमेरिकी हस्तक्षेप के एक चौंकाने वाले नए अध्याय की शुरुआत कर दी और यह आठ महीनों के भीतर दूसरी बार है जब ट्रंप प्रशासन ने इस्लामी गणराज्य के खिलाफ सैन्य बल का इस्तेमाल किया है।
ल के हफ्तों में तनाव काफी बढ़ गया
ये हमले ऐसे समय में हुए जब हाल के हफ्तों में तनाव काफी बढ़ गया था। अमेरिकी युद्धपोत क्षेत्र में तैनात किए जा चुके थे और ट्रंप ने कहा था कि वह ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने के लिए एक समझौता चाहते हैं। यह उस समय हो रहा है जब देश के भीतर भी हालात चुनौतीपूर्ण हैं और राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शनों के बाद सरकार के खिलाफ असंतोष बढ़ रहा है। हमलों के जवाब में ईरान ने वैसी ही प्रतिक्रिया दी, जैसी वह कई महीनों से देने की धमकी दे रहा था। सबसे पहले उसने इजराइल को निशाना बनाते हुए मिसाइलों और ड्रोन की एक श्रृंखला दागी। इसके बाद उसने बहरीन, कुवैत और कतर में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए।
संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी पर हुए ईरानी मिसाइल के नुकीले छर्रे से एक व्यक्ति की मौत हो गई। सरकारी मीडिया ने यह जानकारी दी। इसके बाद संयुक्त अरब अमीरात और इराक ने अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया है।
