इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की प्रक्रिया में अक्सर लोग डेडलाइन छूट जाने या फॉर्म भरते समय गलत जानकारी दर्ज हो जाने की समस्या से जूझते हैं। ऐसी स्थिति में इनकम टैक्स विभाग करदाताओं को राहत देने के लिए तीन मुख्य विकल्प प्रदान करता है बिलेटेड ITR (Belated ITR), रिवाइज्ड ITR (Revised ITR) और अपडेटेड ITR (Updated ITR)। हालांकि, ज्यादातर लोग इन तीनों के बीच के अंतर को लेकर असमंजस में रहते हैं। सही जानकारी के अभाव में गलत फॉर्म चुनने से भारी जुर्माना लग सकता है या रिफंड अटक सकता है।
बिलेटेड ITR क्या है?
पहला विकल्प है बिलेटेड ITR (Belated ITR), जो तब भरा जाता है जब आप 31 जुलाई की तय डेडलाइन तक अपना ओरिजिनल ITR जमा नहीं कर पाते हैं। यदि आप नियत तारीख तक रिटर्न नहीं भर सके हैं, तो आप धारा 139(4) के तहत 31 दिसंबर तक बिलेटेड रिटर्न फाइल कर सकते हैं। हालांकि, देर से रिटर्न दाखिल करने पर धारा 234F के तहत पेनल्टी चुकानी पड़ती है। जिन करदाताओं की सालाना कमाई ₹5 लाख से अधिक है, उन्हें ₹5,000 की लेट फीस देनी होती है, जबकि ₹5 लाख से कम आय वालों के लिए यह पेनल्टी ₹1,000 तय की गई है।
रिवाइज्ड ITR क्या है?
दूसरा विकल्प है रिवाइज्ड ITR (Revised ITR), जिसका इस्तेमाल ओरिजिनल या बिलेटेड रिटर्न में हुई किसी भी गलती को सुधारने के लिए किया जाता है। अगर आपने समय पर ITR तो फाइल कर दिया, लेकिन बाद में पता चला कि कोई आय छूट गई है, बैंक ब्याज की गलत एंट्री हो गई है या गलत डिडक्शन क्लेम हो गया है, तो आप धारा 139(5) के तहत 31 दिसंबर तक रिवाइज्ड ITR जमा कर सकते हैं। इस फॉर्म को भरने के लिए अलग से कोई अतिरिक्त जुर्माना (Late Fee) नहीं देना पड़ता है।
अपडेटेड ITR कब फाइल करें?
तीसरा और सबसे अंतिम विकल्प है अपडेटेड ITR (ITR-U), जिसे धारा 139(8A) के तहत पेश किया गया है। यदि आप 31 जुलाई और 31 दिसंबर की दोनों डेडलाइन चूक जाते हैं या फिर पुराने रिटर्न में छूटी हुई कमाई की सही जानकारी देना चाहते हैं, तो संबंधित असेसमेंट ईयर खत्म होने के बाद 24 महीने (2 साल) के भीतर ITR-U दाखिल किया जा सकता है। ध्यान दें कि ITR-U केवल अतिरिक्त टैक्स और आय दिखाने के लिए होता है (इससे रिफंड क्लेम नहीं किया जा सकता)। इसमें समय सीमा के हिसाब से 25% से 50% तक का अतिरिक्त टैक्स (Additional Tax) और ब्याज पेनल्टी के रूप में देना पड़ता है।
