रूसी विपक्षी नेता एलेक्सी नवेलनी को दिया गया था जहर, 5 यूरोपीय देशों ने क्रेमलिन पर लगाया आरोप
- Edited by: शिव शुक्ला
- Updated Feb 14, 2026, 07:37 PM IST
ब्रिटेन समेत पांच यूरोपीय देशों ने दावा किया है कि रूसी विपक्षी नेता एलेक्सी नवेलनी को घातक विष ‘एपिबैटिडीन’ दिया गया था। इन देशों ने इस हमले के लिए सीधे रूस को जिम्मेदार ठहराया है। हालांकि, रूस की ओर से अभी इस आरोप पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
व्लादिमिर पुतिन और एलेक्सी नवेलनी।
रूसी विपक्षी नेता एलेक्सी नवेलनी की मौत को लेकर ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, स्वीडन और नीदरलैंड समेत पांच यूरोपीय देशों ने बड़ा दावा किया है। इन देशों का कहना है कि रूसी विपक्षी नेता एलेक्सी नवेलनी को एक घातक जहर देकर निशाना बनाया गया था। इन देशों ने इस हमले के लिए रूस को जिम्मेदार ठहराया है। शनिवार को जारी पांचो देशों के संयुक्त बयान में यह दावा किया गया है। बता दें कि दो साल पहले रूसी विपक्षी नेता की हिरासत में मौत हो गई थी।
दक्षिण अमेरिका में पाए जाने वाले मेंढकों का दिया गया था जहर
इन देशों के विदेश मंत्रालयों ने शनिवार को जारी संयुक्त बयान में कहा कि नवेलनी के सैंपलों की जांच के बाद विश्लेषण में “एपिबैटिडीन” नामक घातक विष की पुष्टि हुई है। यह जहर दक्षिण अमेरिका में पाए जाने वाले जहरीले मेंढकों (पॉयजन डार्ट फ्रॉग) में पाया जाता है और बेहद खतरनाक माना जाता है। इस बयान में कहा गया है कि इस हमले को अंजाम देने के लिए आवश्यक संसाधन, उद्देश्य और अंतरराष्ट्रीय कानून की अवहेलना करने की क्षमता केवल रूसी राज्य के पास ही थी। यूरोपीय देशों का कहना है कि यह घटना अंतरराष्ट्रीय मानकों और मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है।
एलेक्सी नवेलनी थे रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के मुखर आलोचक
बता दें कि एलेक्सी नवेलनी रूस में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के मुखर आलोचक माने जाते थे और वे लंबे समय से राजनीतिक दबाव और कानूनी मामलों का सामना कर रहे थे। उनकी दो वर्ष पहले मृत्यु हो गई थी, जिसके बाद से उनकी मौत को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठते रहे हैं। यूरोपीय देशों के इस ताजा दावे से रूस और पश्चिमी देशों के बीच पहले से जारी तनाव और बढ़ सकता है। हालांकि, रूस की ओर से इन आरोपों पर फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। यह मामला एक बार फिर रूस में राजनीतिक विरोधियों की सुरक्षा और मानवाधिकारों को लेकर अंतरराष्ट्रीय बहस को तेज कर सकता है।
