PoK Protests: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में विरोध-प्रदर्शन काफी तेज हो गए हैं। प्रदर्शन की अगुवाई करने वाली जम्मू कश्मीर ज्वाइंट आवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने अपनी मांगों को पूरा करने के लिए इस्लामाबाद को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। JAAC ने चेतावनी दी है कि उसकी 38 मांगें यदि पूरी नहीं हुईं तो उनका यह प्रदर्शन 'अंतिम और फाइनल' होगा। अपनी मांगों को लेकर JAAC ने शहबाज सरकार पर अपना दबाव काफी बढ़ा दिया है। पीओके में रावलाकोट सहित कई जगहों पर हजारों की संख्या में लोग प्रदर्शन कर रहे हैं।
27 जुलाई को होने वाले क्षेत्रीय चुनावों का विरोध
JAAC 27 जुलाई को होने वाले क्षेत्रीय चुनावों का विरोध कर रहा है और इसके लिए 9 जुलाई से नामांकन का दौर शुरू होगा। इससे पहले इस संगठन ने बड़े प्रदर्शन की चेतावनी दी है। JAAC का कहना है कि यदि उनकी 38 मांगें पूरी नहीं हुईं तो वे मुजफ्फराबाद की तरफ मार्च करेंगे और यह प्रदर्शन हाल के वर्षों में सबसे ज्यादा व्यापक होगा। दरअसल, JAAC का सबसे ज्यादा विरोध विधानसभा की आरक्षित 12 सीटों पर है। ये सीटें कश्मीर से आए शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं, JAAC इसे खत्म करने की मांग कर रहा है। संगठन का कहना है कि इन आरक्षित सीटों के जरिए पाकिस्तान उनकी अंदरूनी राजनीति में गैर-जरूरी दखल देता है।
संसाधनों से समृद्ध, लेकिन विकास से वंचित PoK
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में घने जंगल, ग्रेफाइट, संगमरमर और बहुमूल्य रत्न जैसे खनिजों के साथ-साथ प्रचुर जल संसाधन मौजूद हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पाकिस्तान के पंजाब और सिंध के कृषि क्षेत्रों में सिंचाई के लिए इस्तेमाल होने वाले लगभग 70% पानी की आपूर्ति सिंधु नदी प्रणाली से होती है, जिसका बड़ा हिस्सा PoK से होकर गुजरता है। इसके अलावा, यहां की जलविद्युत परियोजनाएं पाकिस्तान की कुल बिजली का करीब 10 से 15% उत्पादन करती हैं।
प्राकृतिक संपदा का लाभ नहीं मिलता
इसके बावजूद स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र की प्राकृतिक संपदा का लाभ उन्हें नहीं मिलता। उनका कहना है कि इन संसाधनों से होने वाली अधिकांश आय पाकिस्तान के मुख्य हिस्सों में चली जाती है, जबकि PoK में बुनियादी ढांचे, सड़क, शिक्षा और सार्वजनिक सेवाओं का विकास बेहद सीमित है।
66% आबादी खेती, पशुपालन पर निर्भर
आर्थिक तंगी PoK के लोगों की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक बनी हुई है। 2025 में प्रकाशित नेचर जर्नल के एक अध्ययन के अनुसार, यहां की लगभग 66% आबादी खेती और पशुपालन पर निर्भर है, लेकिन 57.1% लोग खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे हैं। वहीं, करीब 29% आबादी कुपोषित है, जो पाकिस्तान के राष्ट्रीय औसत 19.9% से काफी अधिक है। पहाड़ी इलाकों में स्थिति और भी गंभीर है, जहां लगभग 90% परिवार खाद्य असुरक्षा से प्रभावित बताए जाते हैं।
स्वास्थ्य सुविधाएं बेहद कमजोर
स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति भी चिंताजनक है। पाकिस्तान की वॉलंटरी नेशनल रिव्यू रिपोर्ट के अनुसार, पांच वर्ष से कम उम्र के 39% बच्चे अवरुद्ध वृद्धि (स्टंटिंग) का शिकार हैं। वहीं, मातृ मृत्यु दर 1 लाख जीवित जन्मों पर 104 मौतें दर्ज की गई है, जो क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमजोर स्थिति को दर्शाती है।
