Trumps forced-labour tariffs- अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए टैरिफ (आयात शुल्क) के खिलाफ कानूनी लड़ाई तेज हो गई है। डेमोक्रेटिक नेतृत्व वाले 25 अमेरिकी राज्यों के गठबंधन ने ट्रंप प्रशासन के खिलाफ यूएस कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड (US Court of International Trade) में मुकदमा दायर किया है। यह कानूनी चुनौती ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 301 के तहत भारत सहित 60 व्यापारिक साझेदारों पर लगाए गए 10% से 12.5% आयात शुल्क के खिलाफ दर्ज की गई है।
व्यापारिक साझेदार प्रभावित
नए टैरिफ का असर भारत, यूरोपीय संघ (EU) और अन्य देशों पर पड़ रहा है, जो अमेरिका के कुल आयात का लगभग 99.4% हिस्सा बनाते हैं। भारत के लिए टैरिफ दर 12.5% से घटाकर 10% तय की गई है, लेकिन यह अब भी भारतीय निर्यात पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालती है। कैलिफोर्निया, न्यूयॉर्क, ओरेगन, न्यू जर्सी, पेंसिल्वेनिया और वाशिंगटन समेत 25 राज्यों ने कोर्ट से इन टैरिफ को रोकने, असंवैधानिक घोषित करने और वसूले गए टैक्स का रिफंड कराने की मांग की है।
अदालती फैसलों को दरकिनार करने का आरोप
राज्यों के अटॉर्नी जनरल का कहना है कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा पिछले आपातकालीन शुल्कों (IEEPA) को रद्द किए जाने के बाद, ट्रंप प्रशासन अब सेक्शन 301 का सहारा लेकर उन्हीं अवैध शुल्कों को लागू करने की कोशिश कर रहा है। CBS News की रिपोर्ट के अनुसार, यह वैश्विक आयात कर लगाने का ट्रंप प्रशासन का तीसरा प्रयास है।
'बंधुआ श्रम' का बहाना
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) का दावा है कि ये टैरिफ उन देशों पर लगाए गए हैं जो बंधुआ श्रम से बने सामानों को रोकने में विफल रहे हैं। हालांकि, राज्यों का तर्क है कि यह सिर्फ एक बहाना है और महज ढाई महीने में जल्दबाजी में की गई जांच के आधार पर टैरिफ थोप दिए गए। राज्यों के अधिकारियों का कहना है कि ये आयात शुल्क वास्तव में अमेरिकी परिवारों पर टैक्स की तरह काम करते हैं, जिससे ग्रॉसरी, घरेलू सामान और निर्माण सामग्री महंगी हो जाएगी।
व्हाइट हाउस का रुख
व्हाइट हाउस के प्रवक्ता कुश देसाई ने नीति का बचाव करते हुए कहा है कि "अमेरिका अपनी कानूनी शक्तियों का इस्तेमाल उन अनुचित नीतियों और प्रथाओं को खत्म करने के लिए कर रहा है जो अमेरिकी व्यापार और श्रमिकों पर बोझ डालती हैं। बंधुआ श्रम से बने सामान पर रोक न लगाना अनुचित है, और सेक्शन 301 (Section 301) इसके खिलाफ एक कानूनी रूप से मजबूत हथियार है।
आगे क्या होगा?
इस मामले की सुनवाई यूएस कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड में होगी। अगर अदालत राज्यों के पक्ष में फैसला सुनाती है, तो भारत समेत 60 देशों से आने वाले सामानों पर से अतिरिक्त शुल्क हटाया जा सकता है और अमेरिकी कस्टम्स को पहले वसूला गया शुल्क वापस करना पड़ सकता है।
