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Railway Track Facts: आखिर रेलवे ट्रैक का लोहा क्यों नहीं होता चोरी, क्या है इसके पीछे की वजह

  • Authored by: किशन गुप्ता
  • Updated Nov 21, 2023, 05:14 PM IST

ट्रेन से तो आप सभी यात्रा की ही होगी। ऐसे में आपने देखा होगा कि रेलवे की पटरी खुले में रखी होती है। फिर भी कोई उसे चोरी नहीं कर पाता है। क्या आप इसके पीछे की वजह जानते हैं? आइए बताते हैं..

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प्रतीकारात्मक चित्र (Image Credit - iStock)

KEY HIGHLIGHTS
  • खुले में रखी होती है रेलवे ट्रैक
  • कभी चोरी नहीं होती है रेलवे ट्रैक
  • न चोरी होने की वजह है बेहद खास

Why Railway Track Cannot Be Stolen: भारतीय रेलवे का इतिहास बहुत पुराना है। इनके बारे में कई सारे रोचक तथ्य हैं, जिसके बारे में काफी कम ही लोगों को पता होगा। ऐसे में आज हम आपको भारतीय रेलवे से जुड़ी एक ऐसी बात बताने वाले हैं, जिसे सुनने के बाद आप एकदम से चौंक जाएंगे। वैसे ये ऐसा सवाल है, जो लगभग सभी के मन में आता होगा।

रेलवे पटरी क्यों नहीं होता चोरी

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रेलवे पटरी क्यों नहीं होता चोरी (Image Credit - iStock)

रेलवे पटरी के बारे में तो आप सभी जानते ही हैं। इसी पर से ट्रेन गुजरती है। लेकिन कभी आपने सोचा कि जहां कभी दुकान लूट ली जाती है तो कभी इंसान। ऐसे में खुले में रखा ये रेलवे ट्रैक चोरी क्यों नहीं होता। इसके पीछे क्या कारण है, इसके बारे में कभी आपने सोचने की कोशिश की। तो चलिए आपको बताते हैं इसके पीछे का कारण..

कोरा साइट पर पूछा गया ये सवाल

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कोरा साइट पर पूछा गया ये सवाल (Image Credit - iStock)

आप सभी ने सोशल मीडिया साइट कोरा (Quora) का नाम तो सुना ही होगा। यहां अक्सर लोग नई-नई चीजों को जानने के लिए प्रश्न पूछते हैं ताकि उसके जवाब उन्हें मिल सकें। ऐसे में कुछ लोगों ने रेलवे ट्रैक को लेकर किया था कि रेलवे पटरी चोरी क्यों नहीं होती? क्या कोई इसे चोरी कर सकता है या नहीं? ऐसे में इस सवाल का जो जवाब मिला, वह काफी दिलचस्प था।

जान लीजिए कारण

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जान लीजिए कारण (Image Credit - iStock)

जब ये सवाल कोरा साइट पर पूछा गया तो वहां 90 फीसदी लोगों को इसका जवाब ही नहीं मालूम था। ऐसे में एक यूजर ने बड़ा सही जवाब दिया। उसने बताया कि रेलवे ट्रैक का लोहा चुराना किसी के लिए भी काफी मुश्किल है। क्योंकि पटरियां बेहद भारी होती है और इसे लेकर चलने में भी काफी मुश्किल हो सकती है। इसका वजन (40 से 60 किलोग्राम प्रति मीटर) भी काफी अधिक होता है। अगर दो-तीन लोग भी हो तो तब भी इसे चोरी नहीं कर पाएंगे, क्योंकि इसके भारी वजन के कारण वे इसे लेकर भाग नहीं सकते।

रेलवे ट्रैक को खोलना भी काफी मुश्किल

Railway Track

रेलवे ट्रैक को खोलना भी काफी मुश्किल (Image Credit - iStock)

इसके अलावा रेलवे ट्रैक को टाई या स्लीपरों से सुरक्षित रूप से बांधा जाता है। इसे मजबूती से बांधने और टिकाए रहने के लिए ट्रैक के नीचे गिट्टी या सबग्रेड के लिए लंगर डाले जाते हैं। ऐसे में इसे खोलना इतना आसान नहीं होता। इसीलिए कहा जाता है कि रेलवे ट्रैक को चुराना बेहद मुश्किल है। इसीलिए रेल पटरी चोरी नहीं हो सकती। लेकिन अगर किसी स्थिति में चोरी हो जाए तो इसे कोई कबाड़ी नहीं खरीदता, क्योंकि इस पर भारतीय रेलवे की मुहर होती है।

शुद्ध लोहे की नहीं होती पटरियां

चोरी न होने के पीछे की दूसरी बड़ी इसका शुद्ध लोहे का ना होना बताया जाता है। दरअसल, यह स्टील की बनी होती हैं। इसे तैयार करने में इस्तेमाल होने वाला स्टील एक विशेष प्रकार का मिश्र धातु है जो काफी कठोर और टिकाऊ होता है। इसी के चलते इसे काटना भी काफी मुश्किल हो जाता है। इसीलिए कोई इसे आसानी से चोरी करके ले ही नहीं जा सकता।

किशन गुप्ता
किशन गुप्ताauthor

<p>देश की धार्मिक राजधानी काशी में जन्म लिया और घाटों पर खेल-कूदकर बड़ा हुआ। साल 2019 में महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में मास्टर्स डिग्री ली। यही से पत्रकारिता की शुरुआत भी हुई। इसी साल जुलाई में हैदराबाद स्थित रामोजी रॉव के स्वामित्व वाले ईटीवी भारत से करियर की शुरुआत हुई। बतौर ट्रेनी यहां एक साल से अधिक का समय बिताया। यह पहली दफा था, जब घर से दूर निकला था। लेकिन चस्का था तो काम करने, एक अच्छा पत्रकार बनने का। यहां रहकर चंद्रयान - 2 को कवर करने का मौका मिला। इसके बाद राजस्थान में शिक्षक भर्ती को लेकर उम्मीदवारों की ओर से हुए हिंसक विरोध को भी करीब से देखा। इस दौरान पथराव का भी सामना करना पड़ा। लेकिन काम करने का एक जुनून था। यह पहली दफा था, जब मैंने किसी बड़ी न्यूज को कवर किया था। इसके बाद ये सिलसिला चलता गया। कुछ समय ऐसा भी आया, जब होम पेज भी काम करने को मिला। करीब एक साल से अधिक समय बिताने के बाद ईटीवी भारत से अलविदा लिया और अपने गृह जिले में पहुंचा, जहां के एक लोकल चैनल टूडेज इंडिया न्यूज में काम करने का मौका मिला। यहां करीब डेढ़ साल से अधिक का समय बिता, जहां रहकर बनारस के साथ-साथ पूर्वांचल को भी कवर करने का मौका मिला। राजनीति और क्राइम की खबरों में खासा रूचि होने के कारण अक्सर फोकस भी इसी पर रहता था। इस दौरान कोविड के दंश को भी देखा। कोरोना काल का यह वो भयानक मंजर था, जिसकी किसी को आशंका न थी। इस दौरान खबरों के माध्यम से देश के दुख-दर्द को करीब से महसूस करने का मौका मिला। फिर मई 2022 में वनइंडिया ज्वाइन कर ली, यहां से फीचर राइटिंग की शुरुआत करते हुए मैंने ट्रैवेल पर काम करना शुरू किया। ऑफिस बैंगलोर था, तो वहां जाने के लिए काफी सोचना भी पड़ा लेकिन दिमाग में था कि बड़ा कुछ करना है तो देश की आर्थिक राजधानी के लिए निकल पड़ा। यहां काफी कम समय ही बिता, करीब 9 महीने तक काम करने के बाद यहां से अलविदा लिया। फिर समय आया देश के प्रतिष्ठित संस्थान टाइम्स नेटवर्क से जुड़ने का। मार्च 2023 में मैं Timesnowhindi.com के वायरल टीम से जुड़ा। इस बीच तमाम ट्रेंडिंग, वायरल और अजब-गजब जैसी कई खबरें की। बीट अलग होने के कारण थोड़ा चैलेंजिंग था लेकिन उस चैलेंज को पूरा करते हुए और चुनौतियों का सामना करते हुए आज एक साल से ऊपर का समय हो गया है।</p>

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