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Ajab Gajab: दुनिया का सबसे अलग-थलग द्वीप, जहां पहुंचने में पहले लोगों को लग जाते थे 5 से 7 दिन

सेंट हेलेना दक्षिण अटलांटिक महासागर में स्थित दुनिया से अलग-थलग एक द्वीप है। यह द्वीप इसलिए मशहूर है क्योंकि फ्रांस के सम्राट नेपोलियन बोनापार्ट को यहीं कैद रखा गया था और यहीं उनकी मृत्यु हुई थी। ज्वालामुखी से बने इस द्वीप पर ऊंची चट्टानें, शांत जीवन और सीमित सुविधाएं हैं। पहले यहां पर जहाज से पहुंचने में 5–7 दिन लगते थे।

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दुनिया का सबसे अलग-थलग द्वीप (फोटो: iStock)

सेंट हेलेना दक्षिण अटलांटिक महासागर में स्थित एक छोटा सा द्वीप है। यह अफ्रीका के पश्चिमी तट से लगभग 1,800–2,000 किलोमीटर दूर है। इसे दुनिया के सबसे अलग-थलग बसे द्वीपों में गिना जाता है। सेंट हेलेना ब्रिटेन (United Kingdom) का British Overseas Territory है। इस द्वीप के फेमस होने का एक बड़ा कारण पूर्व का फ्रांस का शासक नेपोलियन बोनापार्ट था। यहां पर फ्रांस के महान सम्राट नेपोलियन बोनापार्ट को अंग्रेजों ने कैद करके रखा था और यहीं पर साल 1821 में उसकी मृत्यु हुई थी। नेपोलियन का घर Longwood House आज भी एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। आज भी इस द्वीप पर उनकी कब्र और रहने की जगह मौजूद है, जिसे देखने के लिए दूर-दूर से इतिहास के शौकीन लोग आते हैं। सेंट हेलेना एक ज्वालामुखी से बना द्वीप है। इसकी जमीन ऊबड़-खाबड़ और पथरीली है।

यहां चारों तरफ 500 से 700 मीटर ऊंची खड़ी चट्टानें हैं, जो इसे किसी मजबूत किले जैसा बना देती हैं। इस द्वीप की जनसंख्या लगभग 4 हजार से लेकर –5 हजार तक है। यहां की राजधानी जेम्सटाउन (Jamestown) है। यहां रहने वाले लोगों को Saints कहा जाता है। इस आइलैंड पर आने का सबसे पुराना तरीका समुद्री मार्ग है। पहले यहां सिर्फ जहाज से ही पहुंचा जा सकता था। दक्षिण अफ्रीका से जहाज द्वारा लोग यहां पर 5-7 दिन में पहुंचते थे। यहां आने वाले लोगों को करीब एक हफ्ते तक समुद्र में रात गुजारानी पड़ती थी। हालांकि अब यह तरीका बहुत कम इस्तेमाल होता है।

अब सेंट हेलेना कैसे पहुंचते हैं पर्यटक या लोग

अब सेंट हेलेना पहुंचने का सबसे आम तरीका कह लीजिए या रास्ता। वो है हवाई मार्ग। ज्यादातर लोग अब इस माध्यम से ही इस द्वीप पर आते हैं। यहां का नजदीकी एयरपोर्ट St Helena Airport है। जो साल 2016 में शुरू हुआ था। दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग से यहां के सेंट हेलेना के लिए सीधी फ्लाइट मिलती है। जिसमें लगभग लगभग 6 से 6.5 घंटे लगते हैं।

कैसा रहता है मौसम और आधुनिक सुविधाएं

यहां पर सालभर सुहावना मौसम बना रहता है। समुद्र के किनारे होने के कारण यहां ना ज्यादा ठंड होती है और ना ही ज्यादा गर्मी होती है। पर्यटन के लिए यह अनुकूल स्थान है। यहां पर मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट उपलब्ध है। लेकिन बड़े शहरों जैसी तेज सुविधाओं की अभी भी कमी ही है। आज भी यहां पहुंचना आसान नहीं और यही खास वजह इसे सबसे अलग पहचान देता है। यहां पर जीवन बेहद शांत, धीमा और सरल है। ना ज्यादा ट्रैफिक और ना ही भागदौड़ है।

भारत से इस द्वीप पर कैसे पहुंचे

भारत से सेंट हेलेना द्वीप पहुंचने के लिए आपको पहले दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग जाना होगा। जो कि 8-10 घंटे की फ्लाइट है। यहां से इस द्वीप पर जाने के लिए आपको 6 से 6.5 घंटे लगेंगे। मौसम खराब होने पर फ्लाइट कैंसिल हो सकती है। यहां आने के लिए बहुत सीमित फ्लाइट है। यहां के लोग मछली पकड़ने का काम करते हैं। इसके अलावा लोगों के पास सरकारी नौकरियां हैं। एक सीमित सीमा तक यहां खेती भी होती है। पर्यटन भी लोगों का मुख्य आजीविका का साधन है।

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मोनू झाauthor

मोनू कुमार टाइम्स नाउ नवभारत की डिजिटल टीम में वायरल और ट्रेंडिंग डेस्क पर काम कर रहे हैं। न्यूजरूम में 4 साल से अधिक का अनुभव रखने वाले मोनू वायरल कंटेंट, ऑफबीट खबरों और सोशल मीडिया ट्रेंड्स को पहचानने में बेहद दक्ष हैं। यूनीक एंगल तलाशने और कहानियों को आकर्षक अंदाज में प्रस्तुत करने की उनकी क्षमता उन्हें डिजिटल कंटेंट स्पेस में अलग पहचान देती है। मोनू कुमार 4,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं, जिनमें कई वायरल रिपोर्ट्स, ट्रेंड-बेस्ड अपडेट्स और सोशल मीडिया-फोकस्ड कंटेंट शामिल हैं।

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