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मरे इंसान होने लगेंगे जिंदा? इस जगह पर लिक्विड नाइट्रोजन में रखे गए हैं 199 'मृत' लोग, दिखाएंगे भविष्य में राह

  • Agency by: Agency
  • Updated Oct 13, 2022, 05:59 PM IST

लिक्विड नाइट्रोजन से भरे टैंकों के अंदर 199 मनुष्यों को रखा गया है। ये लोग गंभीर बीमारियों से ग्रसित हैं। इन बीमारियों का आज की तारीख में कोई इलाज नहीं है। दावा है कि अगर भविष्य में इन बीमारियों का कोई इलाज मिलता है तो इन्हें वापस से जिंदा किया जा सकता है।

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लिक्विड नाइट्रोजन में रखे गए हैं 199 'मृत' लोग

Photo : Twitter

आज की तारीख में विज्ञान ने काफी तरक्की कर ली है, लेकिन आज भी उसके पास कुछ सवालों, बीमारियों के जवाब नहीं हैं। कैंसर समेत कई ऐसी घातक बीमारियां हैं, जिसमें लगभग इंसान की मौत हो जाती है। मेडिकल साइंस में इसका इलाज नहीं है। हालांकि अब वैज्ञानिकों ने इससे लोगों को बचाने के एक अलग ही रास्ता निकाला है।

रॉयटर्स के अनुसार अमेरिका के एरिजोना में एक ऐसा सिस्टम विकसित किया गया है, जहां 199 लोगों को लिक्विड नाइट्रोजन से भरे टैंकों में रखा गया है। इन लोगों को गंभीर बीमारियां हैं। जिसका कोई इलाज है। ये एक तरह से मरे माने जा चुके हैं। इन्हें यहां इसलिए रखा गया है ताकि भविष्य में अगर इन बीमारियों का इलाज मिलता है, तो उन्हें टैंक से बाहर निकाल कर ठीक किया जा सके। दावा है कि इस टैंक में वो उसी अवस्था में रहेंगे, जिस अवस्था में उन्हें रखा गया था।

इस 199 लोगों में शामिल सबसे छोटी उम्र की एक 9 साल की लड़की है। इसे ब्रेन कैंसर था। माता-पिता दोनों डॉक्टर थे, कई सर्जरी हुई लेकिन ये ठीक नहीं हुई। जिसके बाद माता-पिता ने उम्मीद के सहारे इस मासूम को अलकोर फाउंडेशन के प्रोजेक्ट में शामिल कर दिया। अलकोर फाउंडेशन ही लिक्विड नाइट्रोजन वाले सिस्टम का जन्मदाता है। एल्कोर के मुख्य कार्यकारी मैक्स मोर ने कहा- "उसके माता-पिता दोनों डॉक्टर थे और उसकी कई मस्तिष्क सर्जरी हुई थीं और दुर्भाग्य से कुछ भी काम नहीं किया। इसलिए उन्होंने हमसे संपर्क किया।"

किसी व्यक्ति को कानूनी रूप से मृत घोषित किए जाने के बाद क्रायोप्रिजर्वेशन प्रक्रिया शुरू होती है। रोगी के शरीर से रक्त और अन्य तरल पदार्थ निकाल दिए जाते हैं और हानिकारक बर्फ क्रिस्टल के गठन को रोकने के लिए डिज़ाइन किए गए रसायनों के साथ रिप्लेस कर दिया जाता है।

ये लिक्विड नाइट्रोजन वाला फर्मूला तभी सफल माना जाएगा, जब इनमें से किसी एक को भविष्य में निकाल कर उनका सफल इलाज होगा। अगर वो वापस जिंदा और स्वस्थ हो गए तो यह प्रयोग किसी चमत्कार से कम नहीं होगा और हर साल दुनिया भर में लाखों लोगों की जान बचाई जा सकेगी।

शिशुपाल कुमार
शिशुपाल कुमारauthor

शिशुपाल कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क में कार्यरत एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें 13 वर्षों का अनुभव हासिल है। राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय और क्राइम रिपोर्टिंग में गहरी रुचि और मजबूत पकड़ के साथ वे समाचारों की बारीकियों को समझने और उन्हें प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं। शिशुपाल ने अपने करियर की शुरुआत एक इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट के रूप में की, जहां उन्होंने प्रोडक्शन से लेकर ग्राउंड रिपोर्टिंग तक पत्रकारिता के कई महत्वपूर्ण पहलुओं में काम किया। फील्ड रिपोर्टिंग और डेस्क दोनों स्तरों पर उनकी दक्षता है। अब तक शिशुपाल कुमार 15,000 से अधिक खबरें प्रकाशित कर चुके हैं। वह ब्रेकिंग न्यूज, रियल-टाइम कवरेज, डेटा-आधारित विश्लेषण और एक्सप्लेनर लिखने में खास महारत रखते हैं। उनकी स्टोरीज तथ्यों की सटीकता और सहज भाषा की वजह से पाठकों पर मजबूत प्रभाव छोड़ती हैं।

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