गुजरात के एक दंपत्ति की 23 साल की शादी आखिरकार तलाक में बदल गई। इस रिश्ते के टूटने की वजह कोई बड़ा झगड़ा नहीं, बल्कि रसोई से जुड़ी एक आम बात थी। प्याज और लहसुन का उपयोग। पत्नी धार्मिक कारणों से प्याज और लहसुन नहीं खाती थी, जबकि पति और उसका परिवार इन चीजों का सेवन करते थे। यही बात समय के साथ बड़े विवाद का कारण बन गई।
यह मामला जब गुजरात हाईकोर्ट तक पहुंचा, तब हाईकोर्ट ने अहमदाबाद की फैमिली कोर्ट के तलाक के फैसले को सही माना और पत्नी की ओर से दायर की गई अपील को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि दोनों के बीच लंबे समय से मतभेद चल रहे थे और शादी को बचाना अब संभव नहीं है। पत्नी का कहना था कि वह स्वामीनारायण संप्रदाय को मानती है, जिसमें प्याज और लहसुन खाना मना होता है। शादी के बाद कुछ समय तक पति की मां पत्नी के लिए बिना प्याज-लहसुन का अलग खाना बनाती थीं, लेकिन यह व्यवस्था लंबे समय तक नहीं चल सकी। धीरे-धीरे घर में तनाव बढ़ता गया और रिश्ते बिगड़ते चले गए।
पति ने लगाया ये आरोप
पति ने आरोप लगाया कि पत्नी उसके साथ मानसिक रूप से क्रूर व्यवहार करती थी और उसे प्रताड़ित करती थी। इसी कारण पत्नी साल 2007 में बच्चे को लेकर अपना मायका चली गई। इसके बाद पति ने साल 2013 में पारिवारिक अदालत में तलाक की अर्जी दाखिल की। मई 2024 में अहमदाबाद फैमिली कोर्ट ने दोनों का तलाक मंजूर कर दिया। इसके बाद पत्नी ने हाईकोर्ट में अपील की, लेकिन सुनवाई के दौरान उसने तलाक का विरोध नहीं किया। उसकी मुख्य मांग सिर्फ इतनी थी कि उसे सही समय पर गुजारा भत्ता दिया जाए।
पत्नी ने कोर्ट से की ये डिमांड
पत्नी ने अदालत को बताया कि उसे 18 महीनों से भरण-पोषण की रकम नहीं मिली है। अदालत के रिकॉर्ड के मुताबिक कुल बकाया राशि लगभग 13 लाख रुपये है। इसमें से कुछ रकम पहले ही दी जा चुकी थी। हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि बाकी बची हुई राशि भी जांच के बाद पत्नी को दी जाए। इस तरह आखिरकार 23 साल पुरानी यह शादी कानूनी रूप से खत्म हो गई और दोनों के बीच चल रहे लंबे विवाद पर विराम लग गया।
