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9 करोड़ के इस होटल में जादुई पानी पीने आते थे लोग, लेकिन हो जाती थी मौत, चौंकाने वाली सच्चाई

  • Authored by: किशन गुप्ता
  • Updated Apr 12, 2023, 03:23 PM IST

अमेरिका के टेक्सास में स्थित बेकर होटल की कहानी काफी भूतहा है। कहा जाता है कि यहां जादुई पानी पीने के लिए लोग आते थे, लेकिन इलाज न मिलने के कारण उनकी मौत हो जाती थी।

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बेकर होटल, टेक्सास, अमेरिका (फोटा साभार - इंस्टाग्राम 'thebakerhotelandspa')

KEY HIGHLIGHTS
  • बेकर होटल की भूतहा कहानी
  • अमेरिका के टेक्सास में स्थित है ये होटल
  • यहां जादुई पानी पीने आते थे लोग

Haunted Story of Baker Hotel: दुनिया गोल है, यहां कहीं न कहीं सबकुछ एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है। चाहे वह आस्था हो या अंधविश्वास। आज हम जिस स्टोरी के बारे में बात करने जा रहे हैं, वह इन दिनों से जुड़ा हुआ है। इस कहानी में आस्था भी है और अंधविश्वास भी। इस स्टोरी के बारे में जानकर आप चौंक जाएंगे तो आइए जानते हैं इस स्टोरी के बारे में...

हम बात कर रहे हैं टेक्सास (अमेरिका) के एक होटल के बारे में, जिसका नाम बेकर होटल है। इस होटल के बारे में कहा जाता है कि यहां जादुई पानी की तलाश में लोग आते थे, लेकिन पानी छोड़ उन्हें मौत नसीब हो जाती है। यह हॉन्टेड होटल तकरीबन 100 साल पुराना है। 1929 में शुरू हुए इस होटल को बनाने में करीब 9 करोड़ रुपये का खर्च आया था। अब आप इसी से अंदाजा लगा लीजिए कि ये होटल कितना शानदार होगा। इस 14 मंजिल वाले होटल में 450 कमरे हैं, जिसमें एक पूल और स्पा भी शामिल है। आलम ये है कि इतना लक्जरियस होटल होने के बाद लोग यहां से गुजरने से डरते हैं।

Haunted Story of Baker Hotel

बेकर होटल में जादुई पानी की कहानी (फोटा साभार - इंस्टाग्राम 'thebakerhotelandspa')

'जादुई पानी' की कहानी

ऐसा माना जाता है कि इस होटल में आई मानसिक रूप से बीमार एक महिला 'जादुई पानी' पीकर बिल्कुल ठीक हो गई थी। बाद में इस पानी को 'मिनरल रिच वॉटर' भी कहा गया। इस महिला के ठीक होने के बाद होटल काफी फेमस हो गया। फिर होटल खुलने के 2 साल बाद यानी 1931 में स्टॉक मार्केट क्रैश हो गया, जिससे होटल चलाना काफी मुश्किल हो गया, जिसके बाद होटल का मालिक दूसरा व्यक्ति बन गया।

Haunted Story of Baker Hotel

जर्जर स्थिति में बेकर होटल (फोटो साभार - इंस्टाग्राम 'thebakerhotelandspa')

फिर शुरू हुआ द्वितीय विश्व युद्ध का दौर...

द्वितीय विश्व युद्ध के चलते होटल को बंद करना पड़ गया। लेकिन लोगों का क्या है, 'जादुई पानी' वाले आस्था के चक्कर में यहां लगातार आते रहे, पानी तो मिला नहीं। ऐसे में बीमार लोग इलाज न मिल पाने के कारण यहीं दम तोड़ देते थे। ऐसे में आसपास के लोगों के मानना है कि इन्हीं लोगों की आत्माएं यहां आज भी भटकती हैं। यहां आने वाले लोगों को काफी परेशान भी करती हैं। कभी-कभी, यहां आने वाले लोगों के शरीर पर खरोंच या काटने के निशान भी मिलते हैं।

वर्तमान में जर्जर हो चुका है बेकर होटल

सोशल मीडिया पर लोगों ने होटल की पुरानी तस्वीर को शेयर किया है, जिसे देखने के बाद आपके रौंगटे खड़े हो जाएंगे। मानिए जैसे ये कोई होटल नहीं बल्कि भूतहा बंगला हो। तस्वीरों में यहां का मंजर काफी डरावना लग रहा है, ऐसे में अब लोगों में यह डर बन चुका है कि यहां 'जादुई पानी' की तलाश में आने वाले लोगों में डर फैल रहा है, जिससे वे यहां आना नहीं चाहते।

किशन गुप्ता
किशन गुप्ताauthor

<p>देश की धार्मिक राजधानी काशी में जन्म लिया और घाटों पर खेल-कूदकर बड़ा हुआ। साल 2019 में महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में मास्टर्स डिग्री ली। यही से पत्रकारिता की शुरुआत भी हुई। इसी साल जुलाई में हैदराबाद स्थित रामोजी रॉव के स्वामित्व वाले ईटीवी भारत से करियर की शुरुआत हुई। बतौर ट्रेनी यहां एक साल से अधिक का समय बिताया। यह पहली दफा था, जब घर से दूर निकला था। लेकिन चस्का था तो काम करने, एक अच्छा पत्रकार बनने का। यहां रहकर चंद्रयान - 2 को कवर करने का मौका मिला। इसके बाद राजस्थान में शिक्षक भर्ती को लेकर उम्मीदवारों की ओर से हुए हिंसक विरोध को भी करीब से देखा। इस दौरान पथराव का भी सामना करना पड़ा। लेकिन काम करने का एक जुनून था। यह पहली दफा था, जब मैंने किसी बड़ी न्यूज को कवर किया था। इसके बाद ये सिलसिला चलता गया। कुछ समय ऐसा भी आया, जब होम पेज भी काम करने को मिला। करीब एक साल से अधिक समय बिताने के बाद ईटीवी भारत से अलविदा लिया और अपने गृह जिले में पहुंचा, जहां के एक लोकल चैनल टूडेज इंडिया न्यूज में काम करने का मौका मिला। यहां करीब डेढ़ साल से अधिक का समय बिता, जहां रहकर बनारस के साथ-साथ पूर्वांचल को भी कवर करने का मौका मिला। राजनीति और क्राइम की खबरों में खासा रूचि होने के कारण अक्सर फोकस भी इसी पर रहता था। इस दौरान कोविड के दंश को भी देखा। कोरोना काल का यह वो भयानक मंजर था, जिसकी किसी को आशंका न थी। इस दौरान खबरों के माध्यम से देश के दुख-दर्द को करीब से महसूस करने का मौका मिला। फिर मई 2022 में वनइंडिया ज्वाइन कर ली, यहां से फीचर राइटिंग की शुरुआत करते हुए मैंने ट्रैवेल पर काम करना शुरू किया। ऑफिस बैंगलोर था, तो वहां जाने के लिए काफी सोचना भी पड़ा लेकिन दिमाग में था कि बड़ा कुछ करना है तो देश की आर्थिक राजधानी के लिए निकल पड़ा। यहां काफी कम समय ही बिता, करीब 9 महीने तक काम करने के बाद यहां से अलविदा लिया। फिर समय आया देश के प्रतिष्ठित संस्थान टाइम्स नेटवर्क से जुड़ने का। मार्च 2023 में मैं Timesnowhindi.com के वायरल टीम से जुड़ा। इस बीच तमाम ट्रेंडिंग, वायरल और अजब-गजब जैसी कई खबरें की। बीट अलग होने के कारण थोड़ा चैलेंजिंग था लेकिन उस चैलेंज को पूरा करते हुए और चुनौतियों का सामना करते हुए आज एक साल से ऊपर का समय हो गया है।</p>

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