Train Water System: ट्रेन में सफर करते समय हम पानी का इस्तेमाल तो रोज करते हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि आखिर ये पानी आता कहां से है। कई लोगों को लगता है कि शायद पानी का टैंक कोच की छत पर लगा होता होगा, लेकिन असल सच्चाई इससे बिल्कुल अलग है।
भारतीय रेलवे के ज्यादातर कोच, जैसे ICF, LHB और AC कोच में पानी के टैंक नीचे की तरफ लगे होते हैं। इन्हें अंडरकैरेज वॉटर टैंक कहा जाता है। यानी ये टैंक कोच (railway interesting facts) के फर्श के नीचे, ट्रेन के निचले हिस्से (अंडरफ्रेम) में फिट किए जाते हैं। यही वजह है कि ये आसानी से दिखाई नहीं देते और लोगों को इनके बारे में पता भी नहीं चलता।
सामान्य कोच में करीब 400 से 700 लीटर तक पानी होता स्टोर
इन टैंकों (train water system) की क्षमता भी काफी अच्छी होती है। एक सामान्य कोच में करीब 400 से 700 लीटर तक पानी स्टोर किया जा सकता है। वहीं AC कोच में अक्सर दो या उससे ज्यादा टैंक लगे होते हैं, जिनमें हर एक की क्षमता लगभग 400-450 लीटर होती है। ये टैंक आमतौर पर कोच के दोनों सिरों पर, खासकर टॉयलेट के पास या बीच में लगाए जाते हैं। जब ट्रेन किसी स्टेशन पर रुकती है, तब इन टैंकों में पानी भरा जाता है। इसके लिए रेलवे कर्मचारी पाइप की मदद से कोच के साइड में बने इनलेट से पानी भरते हैं।
यात्रियों तक ऐसे पहुंचता है पानी
इसके बाद एक छोटी मोटर या पंप की मदद से यह पानी ऊपर की ओर पहुंचाया जाता है, जहां से बाथरूम, वॉश बेसिन और अन्य जगहों पर इसका इस्तेमाल होता है। क्योंकि ये टैंक नीचे छुपे होते हैं, इसलिए लोगों को लगता है कि पानी कहीं ऊपर स्टोर किया गया है। लेकिन अगर आप कभी प्लेटफॉर्म पर खड़े होकर ट्रेन के नीचे ध्यान से देखें (पूरी सावधानी के साथ), तो आपको ये टैंक दिखाई दे सकते हैं। खासकर जब इनमें से पानी ओवरफ्लो होता है, तब नीचे से पानी टपकता हुआ भी नजर आता है। यह छोटी सी जानकारी हमें बताती है कि रेलवे की व्यवस्था कितनी सोच-समझकर बनाई गई है, ताकि यात्रियों को हर सुविधा आसानी से मिल सके, भले ही वह हमें दिखाई न दे।
