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सच या सरासर झूठ! क्या अंतरिक्ष से भी दिखाई देती है चीन की दीवार, सच्चाई होश उड़ाने वाली

Great Wall of China Facts: चीन की दीवार हजारों किलोमीटर तक फैली हुई है। यह पहाड़ों से लेकर मैदानों तक और रेगिस्तान से होकर गुजरती है। इसकी ऊंचाई और लंबाई सुनकर लोगों को लगता है कि जरूर यह दीवार अंतरिक्ष से दिखती होगी। हालांकि, वैज्ञानिकों और अंतरिक्ष यात्रियों का कुछ और कहना है। वैज्ञानिकों का कहना है कि नंगी आंखों से इस दीवार को अंतरिक्ष से देख पाना बहुत नामुमकिन है।

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चीन की दीवार (iStock)

Great Wall of China Facts: हम सभी जानते हैं कि ग्रेट वॉल ऑफ चाइना यानि चीन की महान दीवार दुनिया के सात अजूबों में शुमार है। आपने दुनिया की सबसे बड़ी दीवार के बारे में बचपन से यह बात सुनी होगी कि यह अंतरिक्ष से भी दिखाई देती है। यहां तक कि कई लोगों को आपने यह कहते सुना होगा कि चीन की दीवार इंसान द्वारा बनाई गई चीजों में अंतरिक्ष से दिखने वाली इकलौती चीज है। लेकिन इसके पीछे की सच्चाई आपके होश उड़ाने वाली है। शायद ही आपको इसके पीछे की सच्चाई पता होगी। चलिए हम आपको इस दीवार की हकीकत बताते हैं।

चीन की महान दीवार का अनोखा झूठ

चीन की दीवार हजारों किलोमीटर तक फैली हुई है। यह पहाड़ों से लेकर मैदानों तक और रेगिस्तान से होकर गुजरती है। इसकी ऊंचाई और लंबाई सुनकर लोगों को लगता है कि जरूर यह दीवार अंतरिक्ष से दिखती होगी। हालांकि, वैज्ञानिकों और अंतरिक्ष यात्रियों का कुछ और कहना है। वैज्ञानिकों का कहना है कि नंगी आंखों से इस दीवार को अंतरिक्ष से देख पाना बहुत नामुमकिन है। यह दीवार भले ही लंबी हो और इसकी चौड़ाई भी काफी हो, लेकिन यह इतनी ज्यादा नहीं है कि अंतरिक्ष से देखने पर आपको दिखाई दे जाए।

10 लाख मजदूरों ने गंवाई थी जान

अंतरिक्ष यात्रियों का कहना है कि ऊपर से देखने पर इसका रंग पहाड़ों जैसा नजर आता है। यह अलग से पहचान में नहीं आती है। इसके उलट अगर अंतरिक्ष यात्रियों के पास बहुत अच्छे कैमरे होते हैं तो सैटेलाइट तस्वीरों में इसे देखा जा सकता है। लेकिन अंतरिक्ष में मौजूद कोई इंसान इसे अपनी आंखों से देख नहीं सकता है। चीन की दीवार अंतरिक्ष को लेकर यह बहुत ही लोकप्रिय मिथक है। यह बात बढ़ा-चढ़ाकर कही जाती रही है। बता दें कि चीन की दीवार (Great Wall of China) 21,196 किलोमीटर लंबी है। यह 7वीं शताब्दी ईसा पूर्व से मिंग राजवंश (1368-1644) में बनाई गई है। यह मंगोलों के आक्रमण से चीन की रक्षा के लिए बनाई गई थी। इसे 'दुनिया का सबसे बड़ा कब्रिस्तान' भी कहते हैं। माना जाता है कि इसके निर्माण में 10 लाख से अधिक मजदूरों ने अपनी जान गवांई थी।

Aditya Sahu
आदित्य साहूauthor

आदित्य साहू टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में स्पोर्ट्स और ट्रेडिंग कंटेंट लिखतें हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स की डिग्री हासिल करने के बाद वह पिछले 10 सालों से मीडिया में सक्रिय हैं। स्पोर्ट्स इवेंट की रियल टाइम कवरेज, डाटा टॉपिक्स और अनोखे कंटेंट आइडियाज को आकर्षक और एंगेजिंग तरीके से प्रस्तुत करना आदित्य की खासियत है। उनकी कॉपी राइटिंग और इंटरेस्टिंग हेडलाइन बनाने की क्षमता उन्हें डिजिटल दुनिया में अलग पहचान देती है। 15,000 से अधिक बायलाइन स्टोरी पब्लिश कर चुके आदित्य का लक्ष्य हर खबर को यूनिक एंगल और स्टोरीटेलिंग के रोचक अंदाज में पेश करना है।

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