Interesting Facts: करीब 30 करोड़ साल पुराने एक जीवाश्म को लेकर वैज्ञानिकों ने बड़ा खुलासा किया है। जिस जीवाश्म को पहले दुनिया का सबसे पुराना ऑक्टोपस माना जा रहा था, अब उसे Nautiloid यानी नॉटिलोइड बताया गया है। यह जीव आज के Nautilus का पुराना रिश्तेदार माना जाता है। यह जीवाश्म “पोल्सेपिया मेजोनेंसिस” नाम से जाना जाता है और इसे अमेरिका के इलिनोइस इलाके में खोजा गया था। इसकी बनावट में आठ भुजाएं और पंख जैसी आकृति दिखाई देती थी, इसलिए करीब 25 साल पहले वैज्ञानिकों ने इसे ऑक्टोपस (knowledge facts) मान लिया था। उस समय तकनीक सीमित थी, जिससे इसकी सही पहचान नहीं हो पाई।
रेडुला में एक पंक्ति में 11 दांत जैसे पाए गए तत्व
हाल ही में वैज्ञानिकों ने इस जीवाश्म की फिर से जांच की। इसके लिए आधुनिक सिंक्रोट्रॉन इमेजिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया, जिससे चट्टान के अंदर छिपी बारीक चीजें भी साफ दिखाई देने लगीं। इस जांच में एक खास संरचना मिली, जिसे “रेडुला” कहा जाता है। यह छोटे-छोटे दांतों जैसी पंक्तियों से बनी होती है और मोलस्क जीवों में पाई जाती है। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इस रेडुला में एक पंक्ति में 11 दांत जैसे तत्व पाए गए। यह संख्या नॉटिलोइड से मेल खाती है, जबकि ऑक्टोपस में आमतौर पर 7 या 9 दांत ही होते हैं। इसी आधार पर वैज्ञानिकों ने साफ किया कि यह जीवाश्म ऑक्टोपस नहीं, बल्कि नॉटिलोइड है।
नई तकनीक की मदद से असली सच्चाई आई सामने
वैज्ञानिकों का मानना है कि जब यह जीव मरा, तो उसके शरीर में बदलाव (विघटन) हुआ, जिससे उसकी बनावट ऑक्टोपस जैसी दिखने लगी। इसी वजह से पहले गलत पहचान हो गई थी। अब नई तकनीक की मदद से असली सच्चाई सामने आ गई है। इस खोज से यह भी संकेत मिलता है कि ऑक्टोपस का विकास बहुत बाद में हुआ, संभवतः जुरासिक काल में। साथ ही, यह नॉटिलोइड के नरम ऊतकों के अब तक के सबसे पुराने प्रमाणों में से एक है। कुल मिलाकर कहें तो इस रिसर्च ने एक पुराने भ्रम को खत्म कर दिया है। यह भी साबित हुआ कि विज्ञान में नई तकनीक के आने से पुरानी खोजों की सच्चाई बदल सकती है और नए रहस्य सामने आ सकते हैं।
