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सब्जी-दूध ही नहीं, अब जिंदगी भी डिलीवर कर रहा Blinkit! 6 मिनट में पहुंची एम्बुलेंस, दादी की बची जान

  • Authored by: Monu Jha
  • Updated Jan 15, 2026, 10:16 PM IST

दिल्ली में Blinkit App की एम्बुलेंस सेवा ने सिर्फ 6 मिनट में पहुंचकर एक बुजुर्ग महिला की जान बचाई। समय पर मेडिकल मदद मिलने से दादी की हालत संभल गई, जिससे यह साबित हुआ कि तकनीक जरूरत के वक्त जीवन रक्षक बन सकती है। पढ़ें आखिर क्या है पूरा मामला जो अब सोशल मीडिया पर वायरल है।

Blinkit Ambulance Service

6 मिनट में पहुंची एम्बुलेंस, दादी की बची जान (फोटो: Linkdin/Shivam Kukreja)

आज के समय में तकनीक सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि जरूरत के वक्त जिंदगी बचाने का जरिया भी बन सकती है। आमतौर पर जिस ऐप से लोग रोज सब्जी या जरूरी सामान मंगाते हैं, वही ऐप किसी की जान बचा सकता है यह बात दिल्ली के एक परिवार ने खुद महसूस की है। दिल्ली में रहने वाले शिवम कुकरेजा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म LinkedIn पर अपने परिवार के साथ हुई एक भावुक घटना साझा की। जिसमें उन्होंने लिखा है कि घटना तीन दिन पहले की है, जिसने हमें यह एहसास दिलाया कि सही समय पर मिली मदद किसी की जान बचा सकती है। उस सुबह करीब 8 बजे मेरी दादी घर में अचानक गिर गईं। वह होश में नहीं थीं, लेकिन उनकी सांस और धड़कन चल रही थी।

घर में सभी लोग घबरा गए थे और समझ नहीं पा रहे थे कि क्या करें। तुरंत 112 पर एम्बुलेंस के लिए कॉल किया गया, लेकिन जवाब आने में समय लग रहा था। ऐसे हालात में हर एक सेकंड बहुत भारी लगता है। उसी वक्त मुझे याद आया कि हाल ही में मैंने Blinkit App पर एम्बुलेंस सर्विस के बारे में देखा था। बिना देर किए मैंने ऐप खोला। वहां लिखा आया कि एम्बुलेंस 6 मिनट में पहुंच सकती है। मैंने तुरंत रिक्वेस्ट डाल दी। सिर्फ 1 मिनट के अंदर ब्लिंकिट की तरफ से एक कन्फर्मेशन कॉल आ गया। इसके बाद करीब 4 मिनट में ही एक एम्बुलेंस दो नर्सों के साथ हमारे घर के दरवाजे पर खड़ी थी।

blinkit

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10 मिनट में दादी को आया होश

नर्सों ने बिना समय गंवाए मेरी दादी की जांच शुरू की। उन्होंने ब्लड प्रेशर और शुगर लेवल चेक किया। पता चला कि उनका ब्लड शुगर बहुत ज्यादा गिरकर 40 तक पहुंच गया था। यह काफी खतरनाक स्थिति थी। नर्सों ने तुरंत उन्हें ड्रिप लगाई और जरूरी दवा दी। करीब 10 मिनट के अंदर ही मेरी दादी को होश आने लगा। यह देखकर हम सबने राहत की सांस ली। इसके बाद एम्बुलेंस टीम ने उन्हें सुरक्षित तरीके से अस्पताल पहुंचाया। जब हालात सामान्य हो गए, तो मैंने उनसे पूछा कि इस सेवा का कितना पैसा देना होगा, क्योंकि मुझे लगा यह एक पेड सर्विस होगी। लेकिन उनका जवाब सुनकर मैं हैरान रह गया। उन्होंने कहा, यह Blinkit का भरोसा है, इसके लिए हम कोई पैसे नहीं लेते। मैंने उन्हें टिप देने की भी कोशिश की, लेकिन उन्होंने विनम्रता से मना कर दिया।

blinkit viral news

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सोशल मीडिया यूजर्स ने किए कमेंट्स

अक्सर 10 मिनट की डिलीवरी को लेकर लोग सवाल उठाते हैं, लेकिन इस अनुभव ने दिखा दिया कि तकनीक और निजी कंपनियां अगर सही सोच के साथ काम करें, तो वे असल जिंदगी में बड़ा फर्क ला सकती हैं। सिर्फ दान मांगने के बजाय ब्लिंकिट ने एक ऐसी सुविधा बनाई, जो सच में जान बचाती है। अब मैं ब्लिंकिट या ज़ोमैटो पर चेकआउट के समय आने वाले 1–2 रुपये के दान को कभी नजरअंदाज नहीं करूंगा, क्योंकि कभी-कभी यही छोटे योगदान किसी के लिए जिंदगी बन जाते हैं।

सोशल मीडिया यूजर्स ने इस पोस्ट को पढ़ने के बाद कई तरह के कमेंट्स किए हैं। जिसमें पहले ने लिखा: "ऐसे क्षणों में, गति और इरादा किसी भी चीज़ से ज़्यादा मायने रखते हैं और यह दर्शाता है कि सही उद्देश्य के साथ बनाई गई तकनीक सचमुच जीवन बचा सकती है। खुशी है कि आपकी दादी सुरक्षित हैं। इस पहल के पीछे Blinkit टीम को बहुत-बहुत बधाई। धन्यवाद, दीपेंद्र गोयल।", वहीं पर दूसरे ने लिखा: "Blinkit सिर्फ तेज डिलीवरी ही नहीं करता, बल्कि अब जिंदगियां भी बचाता है। धन्यवाद, ऐसे ही अच्छा काम करते रहिए।"

डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया पोस्ट पर आधारित है। टाइम्स नाउ नवभारत किसी भी प्रकार के दावे की पुष्टि नहीं करता है।

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Monu Jha
Monu Jha author

मोनू कुमार टाइम्स नाउ नवभारत की डिजिटल टीम में वायरल और ट्रेंडिंग डेस्क पर काम कर रहे हैं। न्यूजरूम में 4 साल से अधिक का अनुभव रखने वाले मोनू वायरल कं... और देखें

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