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हजार साल पुरानी महिला की खोपड़ी में एक भी हड्डी नहीं, देखकर हैरान हुए आर्कियोलॉजिस्ट

  • Edited by: Ikramuddin
  • Updated Nov 7, 2023, 03:42 PM IST

आर्कियोलॉजिस्ट ने करीब हजार साल पुराने ऐसे अवशेषों की खोज की है, जिसने सबको हैरान कर दिया है। आर्कियोलॉजिस्ट खुद इस रहस्य को सुलझाने में जुटे हैं।

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तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है। (Photo/istock)

KEY HIGHLIGHTS
  • पुरातत्वविदों ने खोजा हजार साल पुराना कंकाल
  • महिला के कंकाल की खोपड़ी खाली
    नहीं मिली एक भी हड्डी
  • नहीं मिली एक भी हड्डी

इतिहास से जुड़ी कभी-कभी ऐसी चीजें सामने आती हैं कि होश उड़ जाते हैं। यकीन नहीं होता कि ऐसा भी हुआ होगा। अभी एक ऐसा ही चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां आर्कियोलॉजिस्ट की एक खोज ने सबको हौरान कर दिया। दरअसल पुरातत्वविदों ने करीब एक हजार साल पुराने इंसानी अवशेषों की खोज की है। अवशेष देखकर अनुमान लगाया गया कि दोनों महिला-पुरुष पति-पत्नी थे। मगर महिला के अवशेषों ने एक नई पहेली को जन्म दिया। क्योंकि पुरुष के पास दफनाई गई महिला का चेहरा और सिर पूरी तरह खोखला था। यानी महिला की खोपड़ी में एक भी हड्डी नहीं मिली।

खोपड़ी में नहीं मिली हड्डी

डेली मेल में छपी रिपोर्ट के मुताबिक पुरातत्वविद पति के बगल में दबी महिला के कंकाल की खोज के बाद हैरान हैं। अपने पति के बगल दफन हुई महिला की खोपड़ी का बाहरी और अंदर का हिस्सा गायब था। रिपोर्ट में बताया गया कि खोज मिली फीमेल कंकाल की लंबाई पांच फीट से थोड़ी ज्यादा थी। वो अपने पति के कंकाल के बगल में पीठ के बल पड़ी हुई मिली। उसके चेहरे की हड्डियां गायब थीं। इसके उलट महिला के बगल में नर कंकाल पड़ा था वो लंबाई में थोड़ा बड़ा था और उसके चेहरे पर पहचानने लायक हड्डियां थीं।

रहस्य सुलझाने में जुटे आर्कियोलॉजिस्ट

रिपोर्ट में बताया गया कि अजीब स्थिति में अवशेष मिलने के बाद पुरातत्वविद ये जानने की कोशिश में जुटे हैं कि इतने सालों तक मृत पड़े जोड़े के साथ वास्तव में क्या हुआ। अभी ये भी नहीं पता चल सका कि दोनों की मौत एक साथ हुई या फिर अलग-अलग। या फिर महिला की खोपड़ी से हड्डियां गायब होने की क्या वजह रही होगी। महिला के चेहरे की हड्डियां गायब होना अब एक रहस्य बना हुआ है। पुरातत्वविद अब इस रहस्य को सुलझाने की कोशिश में जुटी हैं। मालूम हो कि पति-पत्नी के अवशेषों की खोज सैक्सोनी के आइस्लेबेन में हेल्फ्टा के पूर्व शाही महल में की गई।
Ikramuddin
Ikramuddin author

<p>पत्रकारिता के पेशे में काम करते हुए करीब 9 साल पूरे हो चले हैं। साल 2011-14 में दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) के डॉ. भीमराव आंबेडकर कॉलेज (BRAC) से हिंदी पत्रकारिता में ग्रेजुएशन किया। फिर भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) नई दिल्ली से साल 2015 में पीजी डिप्लोमा किया। इसके बाद पत्रकारिता के क्षेत्र में दाखिल हुए और सीखने का सिलसिला आज तक जारी है। पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद सबसे पहले लाइव इंडिया टीवी चैनल के डिजिटल प्लेटफॉर्म में काम करने का मौका मिला। लाइव इंडिया डॉट कॉम में करीब दो साल तक काम किया और बहुत कुछ सीखा। राजनीति, खेल और अपराध के साथ तमाम क्षेत्रों में जमकर खबरें बनाईं और हर दिन कुछ नया सीखने का मौका मिला।चुनाव से जुड़ी बारीकियों और जनता से जुड़े मुद्दों को खबरों की शक्ल में कवर करने का काम इसी संस्थान में रहते हुए सीखा। चुनाव में आम लोगों के बुनियादी मुद्दों को समझने और उन्हें खबरिया प्लेटफॉर्म तक लाने का काम भी बखूबी सीखा। खबरों की बारीकियां सीखने और समझने के दौरान इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप के डिजिटल प्लेटफॉर्म जनसत्ता में काम किया। यहां करीब चार साल के करियर के दौरान खबरों से जुड़ी दूसरी बारीकियों को समझना जारी रखा। यहां ट्रेंडिंग खबरों पर खासा ध्यान रहा। सोशल मीडिया से जुड़ी तमाम बारीकियों को समझने का मौका इसी संस्थान में मिला। जनसत्ता डॉट कॉम में करीब चार साल बिताने के बाद जी मीडिया ग्रुप के इंडिया डॉट कॉम डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ने का मौका मिला। यहां वायरल, ऑफबीट, टीवी डिबेट और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म से रोचक खबरें बनाई। इंडिया डॉट कॉम में करीब दो साल बिताने के बाद सितंबर 2023 में टाइम्स नेटवर्क की प्लेटफॉर्म Timesnowhindi.com में वायरल टीम का हिस्सा हूं।</p>

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