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Ajab Gajab : आर्किटेक्ट कपल ने बनाया भांग के पौधे से घर, खूबसूरती देख आंखों पर नहीं होगा यकीन

  • Authored by: किशन गुप्ता
  • Updated Jul 22, 2023, 03:53 PM IST

भांग के पौधे से बने इस घर को बनाने में करीब दो साल का समय लगा है। साल 2021 में उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने 800 वर्ग फुट में फैले इस घर का उद्घाटन किया था। इस घर का नाम हेंप हाउस रखा गया है।

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हेम्प हाउस, उत्तराखंड (Image Credit - Social Media)

KEY HIGHLIGHTS
  • कपल ने बनाया भांग के पौधे से घर
  • बनने में लगा था दो साल का समय
  • हेंप हाउस रखा गया है नाम

Hemp House In Uttarakhand: इन दिनों लोग अपने घरों सुंदर व सुरक्षित बनाने के लिए क्या नहीं कर रहे हैं। ऐसे में एक आर्टिटेक्ट कपल ने कमाल कर दिया है। इस कपल ने भांग के पौधे से घर बना दिया है। जी हां, सुनने में थोड़ा अजीब जरूर लग रहा हो। लेकिन ये सच है। उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के यमकेश्वर ब्लॉक में रहने वाले आर्किटेक्ट नम्रता कंडवाल और गौरव दीक्षित ने हेम्पक्रीट (Hempcrete) से एक सुंदर सा घर बनाया है। उनका कहना है कि भारत में इस तरह का बना हुआ यह पहला घर है।

वैसे हेम्पक्रीट के नाम से काफी लोग वाकिफ नहीं होंगे तो पहले इसी के बारे में जान लेते हैं। हेम्पक्रीट कुछ और नहीं बल्कि भांग के पौधे, लकड़ी, मिट्टी और पानी का मिश्रण है। इसमें कुछ खनिज भी मिलाए जाते हैं। इस तरह के घर ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसे देशों में काफी प्रचलित है। इस घर को बनाने में करीब 30 लाख रुपए का खर्च आया था, जिसे बनकर तैयार होने में दो साल का समय लग गया था। इस घर का उद्घाटन साल 2021 में उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने किया था, जो 800 वर्ग फीट में फैला हुआ है।

अब बन चुका है होमस्टे

इस घर की छत पर 3 किलोवाट का सोलर पैनल और 5000 लीटर ग्राउंड वाटर स्टोरेज की सुविधा भी रखी है। वर्तमान में इस घर को 'होम स्टे' का रूप दे दिया गया है, ताकि यहां आने वाले पर्यटक भी इस घर का आनंद ले सकें। इस घर को मनमोहक रूप देने के लिए पर्यावरण-अनुकूल (Eco Friendly) चीजों से सजाया गया है। इस घर को बनाने में कपल ने 3 टन भांग का इस्तेमाल किया है। कपल का कहना है कि भांग के बने हुए घर नमी को सोख लेते हैं, दीवारों पर फफूंदी भी पड़ते। और तो और कार्बन अब्सॉर्ब कर घर की हवा को शुद्ध बना देता है।

एलोरा की गुफाओं में भी इस्तेमाल किए गए हैं भांग के पौधे

अगर आप कभी महाराष्ट्र के 'एलोरा की गुफा' घूमने जाए तो वहां आपको 1500 साल पुरानी कई कलाकृति आज भी वैसी की वैसी ही हैं। इसका कारण है कि इसे बनाने में भांग के पौधे का इस्तेमाल किया गया है। यहा कारण है कि डेढ हजार साल पुरानी ये गुफाओं की श्रृंखला आज भी सुरक्षित है। इसमें मिट्टी, चूने के प्लास्टर और भांग के पौधों का मिश्रण इस्तेमाल किया गया है। यही कारण है कि एलोरा की गुफाओं में कीट-पतंगे भी नहीं पाए जाते।

किशन गुप्ता
किशन गुप्ताauthor

<p>देश की धार्मिक राजधानी काशी में जन्म लिया और घाटों पर खेल-कूदकर बड़ा हुआ। साल 2019 में महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में मास्टर्स डिग्री ली। यही से पत्रकारिता की शुरुआत भी हुई। इसी साल जुलाई में हैदराबाद स्थित रामोजी रॉव के स्वामित्व वाले ईटीवी भारत से करियर की शुरुआत हुई। बतौर ट्रेनी यहां एक साल से अधिक का समय बिताया। यह पहली दफा था, जब घर से दूर निकला था। लेकिन चस्का था तो काम करने, एक अच्छा पत्रकार बनने का। यहां रहकर चंद्रयान - 2 को कवर करने का मौका मिला। इसके बाद राजस्थान में शिक्षक भर्ती को लेकर उम्मीदवारों की ओर से हुए हिंसक विरोध को भी करीब से देखा। इस दौरान पथराव का भी सामना करना पड़ा। लेकिन काम करने का एक जुनून था। यह पहली दफा था, जब मैंने किसी बड़ी न्यूज को कवर किया था। इसके बाद ये सिलसिला चलता गया। कुछ समय ऐसा भी आया, जब होम पेज भी काम करने को मिला। करीब एक साल से अधिक समय बिताने के बाद ईटीवी भारत से अलविदा लिया और अपने गृह जिले में पहुंचा, जहां के एक लोकल चैनल टूडेज इंडिया न्यूज में काम करने का मौका मिला। यहां करीब डेढ़ साल से अधिक का समय बिता, जहां रहकर बनारस के साथ-साथ पूर्वांचल को भी कवर करने का मौका मिला। राजनीति और क्राइम की खबरों में खासा रूचि होने के कारण अक्सर फोकस भी इसी पर रहता था। इस दौरान कोविड के दंश को भी देखा। कोरोना काल का यह वो भयानक मंजर था, जिसकी किसी को आशंका न थी। इस दौरान खबरों के माध्यम से देश के दुख-दर्द को करीब से महसूस करने का मौका मिला। फिर मई 2022 में वनइंडिया ज्वाइन कर ली, यहां से फीचर राइटिंग की शुरुआत करते हुए मैंने ट्रैवेल पर काम करना शुरू किया। ऑफिस बैंगलोर था, तो वहां जाने के लिए काफी सोचना भी पड़ा लेकिन दिमाग में था कि बड़ा कुछ करना है तो देश की आर्थिक राजधानी के लिए निकल पड़ा। यहां काफी कम समय ही बिता, करीब 9 महीने तक काम करने के बाद यहां से अलविदा लिया। फिर समय आया देश के प्रतिष्ठित संस्थान टाइम्स नेटवर्क से जुड़ने का। मार्च 2023 में मैं Timesnowhindi.com के वायरल टीम से जुड़ा। इस बीच तमाम ट्रेंडिंग, वायरल और अजब-गजब जैसी कई खबरें की। बीट अलग होने के कारण थोड़ा चैलेंजिंग था लेकिन उस चैलेंज को पूरा करते हुए और चुनौतियों का सामना करते हुए आज एक साल से ऊपर का समय हो गया है।</p>

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