बाबा महाकाल की नगरी मध्य प्रदेश के उज्जैन में एक शादी के दौरान अनोखा नजारा देखने को मिला। जो परंपरा और आधुनिक सोच दोनों का सुंदर मेल था। आमतौर पर बारात में दूल्हा घोड़ी पर बैठकर जाता है, लेकिन यहां दूल्हन को भी दूल्हे की तरह ही शाही अंदाज में घोड़ी पर बैठाकर ले जाया गया। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर काफी तेजी से वायरल हो रहा है। यह रस्म राजस्थानी श्रीमाली ब्राह्मण समाज में "दुल्हन की बंदोली" के नाम से जानी जाती है।
इस अनूठी रस्म में दुल्हन, दूल्हे की तरह ही शाही अंदाज में सज-धजकर घोड़ी पर सवार हुई। ढोल-नगाड़ों की थाप और परिजनों के उत्साह के बीच जब दुल्हन की सवारी दूल्हे के घर की तरफ बढ़ी तो दृश्य किसी प्राचीन 'स्वयंवर' की तरह दिखाई दे रहा था। पूरा माहौल किसी पुराने स्वयंवर जैसा लग रहा था। समाज के लोगों ने बताया कि यह रस्म बेटे और बेटी दोनों को बराबरी का सम्मान देने का प्रतीक है।
महिलाओं ने मंगल गीत गाकर दुल्हन का किया स्वागत
जैसे बेटे की बारात निकलती है, वैसे ही बेटियों को भी वही सम्मान दिया जाता है। जब दुल्हन की बंदोली दूल्हे के घर पहुंची, तो वहां दूल्हे की मां और परिवार की महिलाओं ने मंगल गीत गाते हुए दुल्हन की आरती उतारी और उसका स्वागत किया। इसके बाद दूल्हे के घर की तरफ से दुल्हन को शादी का लहंगा और जोड़ा भेंट किया जाता है। दुल्हन वही पहनकर मंडप में बैठती है।
गौरी पूजन के बाद होने वाली यह रस्म न सिर्फ परंपराओं को जिंदा रखती है, बल्कि समाज को यह संदेश भी देती है कि खुशियों और सम्मान का अधिकार लड़कियों का भी उतना ही है, जितना लड़कों का है। आपको बता दें कि इस विवाह में एक खास बात यह भी होती है कि जब फेरे का समय होता है तब दूल्हा शुरू के होने वाले चार पैरों में दुल्हन को अपनी गोद में उठाकर फेरे लेता है।
