आज का वायरल वीडियो (25-JAN-2026): बनारस को मुक्ति का शहर माना जाता है, जहां लोग इस दुनिया से मोहमाया त्याग कर खुद को पाने की खोज में आए होते हैं, और ऐसा होता भी है। उन लोगों की मुलाकात खुद से होती भी है। इस बात को सही साबित करता एक वीडियो इस वक्त जमकर वायरल हो रहा है, जिसमें बनारस के गंगा घाट पर आधी रात करीब 2 बजे वहां के कुछ पंडित शांत बैठे हैं और दर्द भरे नग़मे गा रहे हैं।
पूरी तन्मयता से दर्द भरे नग़मे गाते दिखे लोग
घाट पर बैठे पंडित जी लोग पूरे जोश के साथ तेज आवाज में राहत फतेह अली खान का गाया हुआ गाना "मोहब्बत में दग़ा की थी, सो काफ़िर थे, सो काफ़िर हैं..." गाते दिख रहे हैं। चारों तरफ गहरा अंधेरा, गंगा की हल्की लहरों की सरसराहट, दूर-दूर जलते छोटे-छोटे दीये और बीच में यह दर्द भरी ग़ज़ल। कोई मंच नहीं, कोई माइक नहीं, बस सच्चे सुर और गहरे एहसास ने इस नजारे को बनारस के असली रंग में पिरो दिया।
लोगों का सुर बना सुकून
यह नजारा किसी फिल्मी नजारे से कम नहीं। पुजारी पूरी तन्मयता से गा रहे हैं, जैसे यह उनकी रोज की इबादत हो। दिन में जहां घाट भक्तों, पर्यटकों और चहल-पहल से भरे रहते हैं, वहीं रात में वहां एक अलग सुकून छा जाता है। उसी सुकून में जब यह गज़ल गूंजती है, तो सुनने वाले का दिल खुद-ब-खुद उस दर्द से जुड़ जाता है। यह सिर्फ एक गाना नहीं, बल्कि टूटे भरोसे, अधूरी मोहब्बत और जिंदगी के कड़वे सच की हकीकत है।
वीडियो को मिले करोड़ों व्यूज
सोशल मीडिया पर लोग इस वीडियो पर जमकर कमेंट कर रहे हैं। कोई कहता है, "ये बनारस है, यहां दर्द भी इबादत बन जाता है।" तो कोई लिखता है, "ये गाना नहीं, टूटे दिल की आरती है।" कई यूजर्स ने बताया कि इसने उन्हें अपनी पुरानी यादें ताजा कर दीं। इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर @priyamalviya नाम की यूजर ने शेयर किया है। जिसे अब तक करोड़ों लोगों ने देखा और लाखों की तादाद में लोगों ने इसे लाइक किया है।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया पोस्ट पर आधारित है। टाइम्स नाउ नवभारत किसी भी प्रकार के दावे की पुष्टि नहीं करता है।
