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50 साल से कबाड़ में पड़ी थी गाड़ी, अब बेचने पर मिले इतने करोड़ रुपए, परिवार भी रह गया दंग

  • Authored by: किशन गुप्ता
  • Updated Mar 27, 2023, 04:59 PM IST

दुनिया में कार लवर्स की कमी नहीं है, कई सारे ऐसे लोग हैं, जिन्हें पुरानी कार रखने का बड़ा ही शौक है। इसी शौक के कारण एक शख्स ने 1937 की बुगाटी को 30 करोड़ में खरीद लिया है। बताया जा रहा है कि यह कार करीब 50 साल तक कबाड़ में पड़ी थी।

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कबाड़ में पड़ी 1937 बुगाटी टाइप 57एस की दुर्लभ फोटो (Photo Credit - Twitter)

KEY HIGHLIGHTS
  • 1937 की बुगाटी को 30 करोड़ में खरीदा
  • 50 साल तक कबाड़ में पड़ी थी ये कार
  • कबाड़ में और भी अनमोल चीजें थी शामिल

दुनिया में हर तरह के शौकिन पाए जाते हैं। इनमें से कोई खाने का शौकिन होता है तो कोई कुछ पहनने का या फिर कुछ गाड़ियों का शौक रखते हैं। ऐसे में आज हम कार के ही एक शौकीन की बात करेंगे, जिनके लिए पुरानी कारों की श्रृंखला किसी सोने के भंडार से कम नहीं है। ऐसे में कबाड़ में पड़ी एक कार को करीब 30 करोड़ रुपए में खरीदा गया है, जिसे एक कार लवर ने खरीदा है।

जिस कार की हम बात कर रहे हैं, वह कार 1937 की बुगाटी टाइप 57-एस है। इतना ही नहीं, जिस गैरेज से इस दुर्लभ कार को खोजा गया है, उस गैराज में काफी और भी मूल्यवान चीजें मौजूद थी। इस कबाड़ में द्वितीय विश्व युद्ध के जासूसी ड्रोन भी पाए गए हैं। इसमें मेडिकल संबंधी कई सारी मशीनें भी शामिल हैं।

1937 की बेशकीमती कार 'बुगाटी टाइप 57-एस'

साल 1937 में इस कार को होवे ने खरीदा था, जो ब्रिटिश रेसिंग ड्राइवर्स क्लब के पहले अध्यक्ष थे। जिसके बाद करीब 8 साल तक ये कार उनके पास थी। फिर इस कार के मालिक लॉर्ड रिडले बने, जिनसे 1955 में डॉ. कैर ने ये कार खरीद ली, जिसके बदले उन्होंने 90 हजार रुपये चुकाई थी। इसके बाद काफी कम समय के लिए उन्होंने इस कार का इस्तेमाल किया और फिर इसे अपने गैरेज में पार्क कर दिया। जब 2007 में उनका निधन हुआ तब उनके परिवार के पास ये कबाड़ का ढेर ही था। लेकिन उन्हें कहां पता था कि ये कबाड़ ही उनकी किस्मत चमकाने वाली है। परिवार के सदस्यों को ऐसी उम्मीद ही नहीं थी कि कोई इस कबाड़ के भी इतने पैसे दे सकता है।

डेलीमेल से बातचीत के दौरान डॉ. कैर के भतीजे ने बताया, "हमें मालूम था कि उनके पास कुछ कारों का संग्रह है लेकिन वे कौन सी कारें हैं, ये मालूम नहीं था।" एक किवदंती के रूप में आसपास के लोग कहा करते थे कि उनके पास बुगाटी कार थी लेकिन किसी को इसके बारे में सटीक जानकारी नहीं थी। उन्होंने बताया कि यह कार अपने समय की सुपर कारों में से एक थी, जो करीब 50 सालों से कबाड़ में पड़ी हुई थी।

किशन गुप्ता
किशन गुप्ताauthor

<p>देश की धार्मिक राजधानी काशी में जन्म लिया और घाटों पर खेल-कूदकर बड़ा हुआ। साल 2019 में महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में मास्टर्स डिग्री ली। यही से पत्रकारिता की शुरुआत भी हुई। इसी साल जुलाई में हैदराबाद स्थित रामोजी रॉव के स्वामित्व वाले ईटीवी भारत से करियर की शुरुआत हुई। बतौर ट्रेनी यहां एक साल से अधिक का समय बिताया। यह पहली दफा था, जब घर से दूर निकला था। लेकिन चस्का था तो काम करने, एक अच्छा पत्रकार बनने का। यहां रहकर चंद्रयान - 2 को कवर करने का मौका मिला। इसके बाद राजस्थान में शिक्षक भर्ती को लेकर उम्मीदवारों की ओर से हुए हिंसक विरोध को भी करीब से देखा। इस दौरान पथराव का भी सामना करना पड़ा। लेकिन काम करने का एक जुनून था। यह पहली दफा था, जब मैंने किसी बड़ी न्यूज को कवर किया था। इसके बाद ये सिलसिला चलता गया। कुछ समय ऐसा भी आया, जब होम पेज भी काम करने को मिला। करीब एक साल से अधिक समय बिताने के बाद ईटीवी भारत से अलविदा लिया और अपने गृह जिले में पहुंचा, जहां के एक लोकल चैनल टूडेज इंडिया न्यूज में काम करने का मौका मिला। यहां करीब डेढ़ साल से अधिक का समय बिता, जहां रहकर बनारस के साथ-साथ पूर्वांचल को भी कवर करने का मौका मिला। राजनीति और क्राइम की खबरों में खासा रूचि होने के कारण अक्सर फोकस भी इसी पर रहता था। इस दौरान कोविड के दंश को भी देखा। कोरोना काल का यह वो भयानक मंजर था, जिसकी किसी को आशंका न थी। इस दौरान खबरों के माध्यम से देश के दुख-दर्द को करीब से महसूस करने का मौका मिला। फिर मई 2022 में वनइंडिया ज्वाइन कर ली, यहां से फीचर राइटिंग की शुरुआत करते हुए मैंने ट्रैवेल पर काम करना शुरू किया। ऑफिस बैंगलोर था, तो वहां जाने के लिए काफी सोचना भी पड़ा लेकिन दिमाग में था कि बड़ा कुछ करना है तो देश की आर्थिक राजधानी के लिए निकल पड़ा। यहां काफी कम समय ही बिता, करीब 9 महीने तक काम करने के बाद यहां से अलविदा लिया। फिर समय आया देश के प्रतिष्ठित संस्थान टाइम्स नेटवर्क से जुड़ने का। मार्च 2023 में मैं Timesnowhindi.com के वायरल टीम से जुड़ा। इस बीच तमाम ट्रेंडिंग, वायरल और अजब-गजब जैसी कई खबरें की। बीट अलग होने के कारण थोड़ा चैलेंजिंग था लेकिन उस चैलेंज को पूरा करते हुए और चुनौतियों का सामना करते हुए आज एक साल से ऊपर का समय हो गया है।</p>

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