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125 साल के कछुए चाणक्य की मौत, पोस्टमार्टम में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

  • Authored by: किशन गुप्ता
  • Updated Mar 19, 2024, 02:33 PM IST

हैदराबाद के नेहरू जूलॉजिकल पार्क में 125 साल के बुजुर्ग कछुए की मौत हो गई है। उसके पोस्टमार्टम में कुछ चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं।

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125 साल की उम्र में कछुए चाणक्य की मौत (Photo Credit - Twitter)

KEY HIGHLIGHTS
  • कछुए चाणक्य की मौत
  • 125 साल का था चाणक्य
  • 10 दिन से कुछ भी नहीं खा रहा था

Turtle Chanakya Died: हैदराबाद के नेहरू जूलॉजिकल पार्क में रहने वाले एक विशाल कछुए की मौत हो गई है। कछुए की उम्र 125 साल थी। पार्क के अधिकारियों की मानें तो बुजुर्ग कछुए ने 10 दिन से खाना पीना बंद कर दिया था, जिससे वहां के अधिकारी भी काफी चिंतित थे। दरअसल, पार्क में आने पर्यटकों के लिए कछुआ आकर्षण का केंद्र बना हुआ था। एनिमल लवर्स के लिए भी ये खबर काफी शॉकिंग है।

चाणक्य को साल 1963 में नामपल्ली के सार्वजनिक उद्यान से लाया गया था, जिसके बाद से ही हैदराबाद का चिड़ियाघर उसका घर बन गया था। बता दें, यह हैदराबाद का सबसे पुराना पार्क है, जिसे हैदराबाद के सातवें निजाम ने बनवाया था। पार्क के अधिकारियों का कहना है कि चाणक्य को शकरकंद और पालक बहुत था। चिड़ियाघर के कर्मचारी जब शनिवार की सुबह बाड़े में पहुंचे तो पाया कि नींद में उसकी मौत हो चुकी थी। अब ऐसे में उसके पोस्टमार्टम में भी चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं।

Turtle Chanakya

125 साल की उम्र में कछुए चाणक्य की मौत

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हुआ चौंकाना वाला खुलासा

चाणक्य की शुरुआती पोस्टमार्टम से जानकारी मिली है कि उसकी मौत मल्टीपल ऑर्गन फेल्योर के कारण हुई है। बाकी जांच के लिए उसके नमूने वेटरनरी बायोलॉजिकल एंड रेच इंस्टीट्यूट और वेटरनरी कॉलेज भेजे गए हैं। बता दें, चाणक्य गैलापागोस प्रजाति का था, जिसे चार्ल्स डार्विन के 'प्रजाति के विकास' सिद्धांत के लिए जाना जाता है। ऐसे में वन्यजीव प्रेमियों के बुजुर्ग कछुए चाणक्य का जाना बड़ा नुकसान है।

किशन गुप्ता
किशन गुप्ताauthor

<p>देश की धार्मिक राजधानी काशी में जन्म लिया और घाटों पर खेल-कूदकर बड़ा हुआ। साल 2019 में महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में मास्टर्स डिग्री ली। यही से पत्रकारिता की शुरुआत भी हुई। इसी साल जुलाई में हैदराबाद स्थित रामोजी रॉव के स्वामित्व वाले ईटीवी भारत से करियर की शुरुआत हुई। बतौर ट्रेनी यहां एक साल से अधिक का समय बिताया। यह पहली दफा था, जब घर से दूर निकला था। लेकिन चस्का था तो काम करने, एक अच्छा पत्रकार बनने का। यहां रहकर चंद्रयान - 2 को कवर करने का मौका मिला। इसके बाद राजस्थान में शिक्षक भर्ती को लेकर उम्मीदवारों की ओर से हुए हिंसक विरोध को भी करीब से देखा। इस दौरान पथराव का भी सामना करना पड़ा। लेकिन काम करने का एक जुनून था। यह पहली दफा था, जब मैंने किसी बड़ी न्यूज को कवर किया था। इसके बाद ये सिलसिला चलता गया। कुछ समय ऐसा भी आया, जब होम पेज भी काम करने को मिला। करीब एक साल से अधिक समय बिताने के बाद ईटीवी भारत से अलविदा लिया और अपने गृह जिले में पहुंचा, जहां के एक लोकल चैनल टूडेज इंडिया न्यूज में काम करने का मौका मिला। यहां करीब डेढ़ साल से अधिक का समय बिता, जहां रहकर बनारस के साथ-साथ पूर्वांचल को भी कवर करने का मौका मिला। राजनीति और क्राइम की खबरों में खासा रूचि होने के कारण अक्सर फोकस भी इसी पर रहता था। इस दौरान कोविड के दंश को भी देखा। कोरोना काल का यह वो भयानक मंजर था, जिसकी किसी को आशंका न थी। इस दौरान खबरों के माध्यम से देश के दुख-दर्द को करीब से महसूस करने का मौका मिला। फिर मई 2022 में वनइंडिया ज्वाइन कर ली, यहां से फीचर राइटिंग की शुरुआत करते हुए मैंने ट्रैवेल पर काम करना शुरू किया। ऑफिस बैंगलोर था, तो वहां जाने के लिए काफी सोचना भी पड़ा लेकिन दिमाग में था कि बड़ा कुछ करना है तो देश की आर्थिक राजधानी के लिए निकल पड़ा। यहां काफी कम समय ही बिता, करीब 9 महीने तक काम करने के बाद यहां से अलविदा लिया। फिर समय आया देश के प्रतिष्ठित संस्थान टाइम्स नेटवर्क से जुड़ने का। मार्च 2023 में मैं Timesnowhindi.com के वायरल टीम से जुड़ा। इस बीच तमाम ट्रेंडिंग, वायरल और अजब-गजब जैसी कई खबरें की। बीट अलग होने के कारण थोड़ा चैलेंजिंग था लेकिन उस चैलेंज को पूरा करते हुए और चुनौतियों का सामना करते हुए आज एक साल से ऊपर का समय हो गया है।</p>

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