मानसून का मौसम जहां गर्मी से राहत देता है, वहीं सड़क हादसों का खतरा भी बढ़ा देता है। बारिश के दौरान गीली और फिसलन भरी सड़कों पर वाहन चलाते समय सबसे अहम भूमिका टायर निभाते हैं। अगर टायर की पकड़ यानी ग्रिप अच्छी नहीं है या वह ज्यादा घिस चुका है, तो ब्रेक लगाने के बावजूद वाहन फिसल सकता है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि बारिश के मौसम में कार और बाइक के लिए किस तरह के टायर सबसे सुरक्षित होते हैं और पुराने टायर कब बदल देने चाहिए।
बारिश में सही टायर क्यों हैं जरूरी?
बारिश के दौरान सड़क पर पानी की पतली परत बन जाती है। यदि टायर का ट्रेड यानी ग्रोव पर्याप्त गहरा नहीं है, तो पानी आसानी से बाहर नहीं निकल पाता और वाहन फिसलने लगता है। इसे हाइड्रोप्लानिंग कहा जाता है। यही वजह है कि मानसून में अच्छे ग्रिप वाले टायर दुर्घटनाओं के जोखिम को काफी हद तक कम कर सकते हैं।
कार के लिए कौन-से टायर हैं बेहतर?
बारिश के मौसम में कार के लिए ऐसे टायर सबसे सुरक्षित माने जाते हैं जिनका ट्रेड पैटर्न गहरा हो और जो पानी को तेजी से बाहर निकाल सकें। रेडियल ट्यूबलेस टायर आज के समय में सबसे बेहतर विकल्प माने जाते हैं। इन टायरों की सड़क पर पकड़ मजबूत होती है और गीली सतह पर ब्रेकिंग भी बेहतर मिलती है। अगर आप ऐसे इलाके में रहते हैं जहां लंबे समय तक भारी बारिश होती है, तो बेहतर वेट ग्रिप वाले प्रीमियम टायर चुनना अधिक सुरक्षित हो सकता है।
बाइक के लिए कैसे टायर चुनें?
बाइक और स्कूटर के लिए भी गहरे ग्रूव वाले ट्यूबलेस टायर बेहतर माने जाते हैं। इनका डिजाइन इस तरह होता है कि पानी जल्दी बाहर निकल जाता है और सड़क पर बेहतर पकड़ बनी रहती है। स्पोर्ट्स या स्मूद टायर बारिश में सामान्य टायरों की तुलना में कम सुरक्षित हो सकते हैं, इसलिए मानसून में ऐसे टायरों से बचना बेहतर है।
पुराने टायर कब बदल देना चाहिए?
जानकारों के अनुसार, यदि टायर का ट्रेड बहुत ज्यादा घिस चुका है या उसकी गहराई लगभग 1.6 मिमी से कम रह गई है, तो उसे तुरंत बदल देना चाहिए। इसके अलावा यदि टायर में कट, दरार, उभार (Bulge) या बार-बार पंचर होने की समस्या आने लगे, तो नया टायर लगवाना ही सुरक्षित रहता है। भले ही टायर ज्यादा इस्तेमाल न हुआ हो, लेकिन 5 से 6 साल पुराने टायरों की रबर सख्त होने लगती है, जिससे उनकी पकड़ कम हो जाती है। ऐसे टायरों को भी समय पर बदल देना चाहिए।
टायर बदलने की जरूरत कैसे पहचानें?
टायर की स्थिति पहचानने के लिए उसके ट्रेड वियर इंडिकेटर (TWI) को देखें। यदि ट्रेड इस इंडिकेटर के बराबर आ गया है, तो यह संकेत है कि टायर बदलने का समय आ चुका है। साथ ही, यदि बारिश में वाहन बार-बार फिसलने लगे या ब्रेकिंग दूरी बढ़ जाए, तो टायर की जांच जरूर करानी चाहिए।
मानसून में सुरक्षित ड्राइविंग के लिए रखें इन बातों का ध्यान
बारिश के मौसम में केवल अच्छे टायर होना ही काफी नहीं है। टायर में कंपनी द्वारा निर्धारित एयर प्रेशर बनाए रखें, अचानक तेज ब्रेक लगाने से बचें और गीली सड़क पर तेज रफ्तार में वाहन न चलाएं। नियमित रूप से व्हील अलाइनमेंट और बैलेंसिंग की जांच भी कराते रहें ताकि टायर समान रूप से घिसें और बेहतर प्रदर्शन करें।
