यूटिलिटी

Train के सफर में क्या होता है TDR; इसे क्यों और कब फाइल किया जाता है

अक्सर ट्रेन से सफर करने वाले लोग समझते हैं कि चार्ट बनने के बाद टिकट कैंसिल नहीं हो सकता और पैसा डूब जाता है लेकिन असल में यहीं TDR काम आता है।

Image

Train (Photo: iStock)

ट्रेन से सफर करते हैं तो आपने कभी न कभी TDR यानी Ticket Deposit Receipt का नाम जरूर सुना होगा। हालांकि, बहुत से यात्री यह नहीं जानते कि आखिर TDR कब और क्यों भरा जाता है। इसे कुछ यूं समझें कि ट्रेन टिकट होने के बावजूद अगर आप कुछ कारणों से ट्रेन से सफर ही नहीं करते हैं तो TDR भर कर अपना टिकट का रिफंड वापस पा सकते हैं। इस आर्टिकल में आपको TDR से जुड़ी सारी जरूरी जानकारी दे रहे हैं-

TDR क्या है

भारतीय रेलवे (Indian Railways) में TDR (Ticket Deposit Receipt) एक ऐसी सुविधा है, जिसके जरिए यात्री कुछ खास परिस्थितियों में टिकट का रिफंड क्लेम कर सकते हैं। अगर यात्रा के दौरान किसी तरह की परेशानी आ जाए या यात्री ट्रेन में सफर ही न कर पाए, तो ऐसे मामलों में TDR भरना जरूरी होता है।

कब भरा जाता है TDR

TDR in Indian Railways

Train (Photo: iStock)

TDR तब भरा जाता है जब यात्री टिकट होने के बावजूद यात्रा नहीं कर पाता या रेलवे की वजह से उसे दिक्कत होती है। उदाहरण के तौर पर अगर ट्रेन बहुत ज्यादा लेट हो जाए और यात्री सफर न करे, ट्रेन रद्द हो जाए, सीट कन्फर्म न मिले या कोच में समस्या हो तो यात्री TDR फाइल कर सकता है। इसके जरिए रेलवे से रिफंड मांगा जाता है।

अगर ट्रेन निर्धारित समय से तीन घंटे या उससे ज्यादा देर से चल रही हो और यात्री यात्रा नहीं करना चाहता, तो वह TDR भर सकता है। इसी तरह अगर AC कोच में एसी काम न कर रहा हो या यात्री को उसकी बुक की गई सीट न मिले, तब भी यह सुविधा लागू होती है।

कई बार यात्रियों का टिकट RAC या वेटिंग में रहता है और सीट कन्फर्म नहीं हो पाती। ऐसे मामलों में अगर यात्री यात्रा नहीं करता, तो उसे TDR फाइल करना पड़ सकता है। हालांकि यह नियम टिकट की स्थिति और बुकिंग के तरीके पर निर्भर करता है।

कैसे भरा जाता है TDR

ऑनलाइन टिकट बुक करने वाले यात्री IRCTC वेबसाइट या ऐप के जरिए आसानी से TDR फाइल कर सकते हैं। इसके लिए My Bookings सेक्शन में जाकर संबंधित टिकट चुनना होता है और फिर TDR का कारण दर्ज करना होता है। रेलवे बाद में मामले की जांच करता है और नियमों के अनुसार रिफंड जारी किया जाता है। हालांकि, TDR भरने की भी एक समय सीमा होती है। अलग-अलग कारणों के हिसाब से इसे तय समय के भीतर फाइल करना जरूरी होता है। अगर यात्री समय सीमा के बाद आवेदन करता है, तो उसका रिफंड क्लेम खारिज भी हो सकता है। इसलिए यात्रियों को यात्रा से जुड़ी समस्या होने पर जल्द से जल्द TDR भर देना चाहिए।

क्या तुरंत मिल जाता है रिफंड?

ध्यान देने वाली बात यह है कि TDR भरने का मतलब यह नहीं होता कि रिफंड तुरंत मिल जाएगा। रेलवे पहले मामले की जांच करता है और यह देखता है कि यात्री का दावा सही है या नहीं। जांच पूरी होने के बाद ही रिफंड मंजूर किया जाता है। कई मामलों में इसमें कुछ दिन या हफ्ते भी लग सकते हैं।

पैसा कब तक आता है वापस

अब आपके जेहन में यह भी सवाल होगा कि TDR भरने के बाद पैसा कब तक वापस आता है? अगर ट्रेन रद्द हो जाती है या बहुत ज्यादा लेट होती है तो TDR का रिफंड आमतौर पर 5 से 7 कार्य दिवसों में प्रॉसेस हो जाता है। वहीं AC खराब होने, कम क्लास में यात्रा करने या टिकट होने के बावजूद यात्रा न करने जैसे मामलों में रेलवे पहले जांच करता है। इसलिए ऐसे केस में रिफंड आने में करीब 30 से 90 दिन तक का समय लग सकता है।

Shivani Kotnala
शिवानी कोटनाला author

शिवानी कोटनाला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। पत्रकारिता के करियर में 3 साल से ज्यादा के अनुभव के साथ शिवानी ने ... और देखें

End of Article