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Traffic Challan फेक तो नहीं? स्कैमर के जाल में न फंस जाएं आप! इन रेड फ्लैग से करें पहचान

डिजिटल दौर में साइबर अपराधी आए दिन नए-नए तरीकों से ठगी को अंजाम दे रहे हैं। अगर आपको भी ट्रैफिक चालान का मैसेज या ईमेल आया है तो आपको तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए।

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कहीं फेक तो नहीं आपके ईमेल में आया ट्रैफिक चालान (AI Generated Image)

आज के डिजिटल दौर में ऑनलाइन पेमेंट और इंटरनेट सर्विस का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। जहां एक तरफ डिजिटल सुविधाओं ने लोगों का जीवन आसान बनाया है, वहीं दूसरी तरफ साइबर अपराधी भी नए-नए तरीकों से लोगों को ठगने की कोशिश कर रहे हैं। साइबर अपराधी फेक ट्रैफिक चालान स्कैम (Fake Traffic Challan Scam) चला रहे हैं, जिसमें नकली ट्रैफिक चालान के नाम पर लोगों से पैसे ऐंठे जा रहे हैं।

इस तरह के स्कैम में ठग लोगों को मैसेज या ईमेल भेजकर दावा करते हैं कि उनकी गाड़ी का ट्रैफिक चालान कट गया है। इसके साथ एक लिंक दिया जाता है, जिस पर क्लिक कर जुर्माना भरने के लिए कहा जाता है। जैसे ही कोई व्यक्ति इस लिंक पर क्लिक करता है और अपनी बैंकिंग डिटेल्स दर्ज करता है, साइबर अपराधी तुरंत इन डिटेल्स का इस्तेमाल ठगी के लिए कर लेते हैं।

नकली ट्रैफिक चालान स्कैम कैसे काम करता है?

सबसे पहले आएगा फर्जी एसएमएस

सबसे पहले ठग एक मैसेज भेजते हैं, जिसमें दावा किया जाता है कि आपकी गाड़ी का ट्रैफिक चालान पेंडिंग है। मैसेज में आधिकारिक भाषा का इस्तेमाल किया जाता है, गाड़ी से जुड़ी जानकारी बताई जाती है और जल्द भुगतान करने की आखिरी तारीख बताकर दबाव बनाया जाता है।

लिंक पर क्लिक करवाने का बनाया जाएगा दबाव

फर्जी मैसेज में एक लिंक दिया जाता है, जो देखने में आधिकारिक परिवहन वेबसाइट जैसा लग सकता है। लेकिन ध्यान से देखने पर इसमें छोटे बदलाव होते हैं। जैसे डोमेन नाम अलग होना, स्पेलिंग में मामूली बदलाव या छोटा (Shortened) लिंक इस्तेमाल करना, जिससे असली वेबसाइट की पहचान छिप जाती है।

फेक वेबसाइट पर पहुंचेगा विक्टिम

लिंक पर क्लिक करने के बाद यूजर एक ऐसी वेबसाइट पर पहुंच जाता है, जो देखने में बिल्कुल सरकारी पोर्टल जैसी बनाई जाती है। इसमें वही रंग, डिजाइन और फॉन्ट इस्तेमाल किए जाते हैं, जिससे लोगों को भरोसा हो जाए।

कई बार इस फर्जी वेबसाइट पर नकली चालान नंबर, वाहन की जानकारी और अपराध से जुड़ी डिटेल भी दिखाई जाती है, ताकि यह असली लगे।

कार्ड की डिटेल्स मांगी जाएगी

इसके बाद पेमेंट पेज खुलता है, जहां यूजर से कार्ड नंबर, एक्सपायरी डेट और CVV जैसी जानकारी मांगी जाती है। कुछ फर्जी वेबसाइट OTP की मांग भी कर सकती हैं। जैसे ही यूजर यह जानकारी दर्ज करता है, साइबर अपराधियों को आपके कार्ड से जुड़ी जरूरी जानकारी मिल जाती है।

बैंक अकाउंट से कट जाएंगे पैसे

जानकारी मिलने के बाद ठग तुरंत अनऑथराइज्ड ट्रांजैक्शन करने की कोशिश कर सकते हैं। कई बार यह लेनदेन विदेशी मर्चेंट या पेमेंट गेटवे के जरिए किया जाता है, जिससे पैसे वापस पाना मुश्किल हो सकता है।

नकली चालान मैसेज ऐसे पहचानें

सेंडर आईडी, मोबाइल नंबर पर दें ध्यान

असली ट्रैफिक चालान से जुड़े मैसेज आमतौर पर सरकारी वेरिफाइड सेंडर आईडी से आते हैं। अगर मैसेज किसी सामान्य 10 अंकों वाले मोबाइल नंबर से आया है, तो तुरंत सतर्क हो जाएं।

डोमेन को न करें नजरअंदाज

आधिकारिक सरकारी वेबसाइट आमतौर पर .gov.in डोमेन का इस्तेमाल करती हैं। असली ई-चालान पोर्टल echallan.parivahan.gov.in है। अगर लिंक .com, .net, .online या किसी दूसरे डोमेन पर खत्म हो रहा है, तो वह फर्जी हो सकता है।

भाषा की करें जांच

असली सरकारी नोटिस में सामान्य और औपचारिक भाषा होती है। अगर मैसेज में "तुरंत कार्रवाई होगी", "गिरफ्तारी वारंट जारी होगा" या "आज ही लाइसेंस रद्द हो जाएगा" जैसी बातें लिखी हैं, तो यह डर पैदा करने की कोशिश हो सकती है।

पेमेंट डिटेल्स पर दें ध्यान

असली सरकारी पेमेंट पोर्टल पर आमतौर पर UPI, नेट बैंकिंग और कार्ड जैसे कई भुगतान विकल्प होते हैं। अगर कोई वेबसाइट सिर्फ कार्ड की जानकारी मांग रही है, तो यह आपकी जानकारी चुराने की कोशिश हो सकती है।

चालान डिटेल्स को करें चेक

असली चालान में चालान नंबर, वाहन नंबर, उल्लंघन की तारीख, स्थान और जुर्माने की राशि जैसी जानकारी होती है। फर्जी मैसेज में अक्सर ऐसी स्पष्ट जानकारी नहीं होती।

Shivani Kotnala
शिवानी कोटनालाauthor

शिवानी कोटनाला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। पत्रकारिता के करियर में 3 साल से ज्यादा के अनुभव के साथ शिवानी ने बिजनेस और टेक से जुड़ी खबरों पर काम किया है। यूटीलिटी, शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग से जुड़ी खबरों पर वह लगातार लिख रही हैं। शिवानी ने डिजिटल के साथ-साथ न्यूज एजेंसी में भी काम किया है।

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