आज यानी 1 अप्रैल 2026 से देश में बहुत कुछ बदल रहा है। एक ओर जहां एलपीजी की कीमतों में इजाफा हुआ है, वहीं आज से बिहार में भी ‘टाइम ऑफ डे’ (TOD) टैरिफ प्रणाली लागू होने जा रही है जो कि पहले से ही देश के 22 राज्यों में लागू है। जिसके तहत दिन और शाम के समय के हिसाब से बिजली की दरें तय होंगी। इस नई व्यवस्था का मकसद बिजली खपत को संतुलित करना और उपभोक्ताओं को राहत देना है। इस बदलाव के बाद उपभोक्ताओं को हर महीने करीब 90 रुपये तक की बचत हो सकती है।
उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर
सरकारी दावे के मुताबिक नई व्यवस्था के अनुसार, दिन के समय बिजली सस्ती होगी, जबकि शाम के पीक आवर्स में बिजली महंगी पड़ेगी। इससे उपभोक्ता अपने उपयोग को समय के अनुसार प्लान कर सकेंगे और खर्च कम कर पाएंगे। सरकार का मानना है कि इससे बिजली की मांग को बेहतर तरीके से मैनेज किया जा सकेगा।
सस्ती बिजली के लिए सरकार दे रही अनुदान
सरकार सस्ती बिजली उपलब्ध कराने के लिए डिस्कॉम (बिजली वितरण कंपनियों) को अनुदान भी दे रही है। 2023-24 में 13,314 करोड़ रुपये, 2024-25 में 15,343 करोड़ रुपये, 2025-26 में 19,792 करोड़ रुपये और 2026-27 में 23,164 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इससे बिजली की दरों को नियंत्रित रखने में मदद मिलेगी।
कैसे मिलेगा फायदा?
अगर कोई उपभोक्ता अपने बिजली उपयोग को दिन के समय शिफ्ट करता है, तो उसे कम दर पर बिजली मिलेगी। उदाहरण के तौर पर, 300 यूनिट तक की खपत पर करीब 90 रुपये तक की बचत हो सकती है। वहीं, शाम के समय ज्यादा बिजली उपयोग करने पर बिल बढ़ सकता है।
पीक आवर्स में ज्यादा दरें लागू
शाम के समय, जब बिजली की मांग अधिक होती है, उस दौरान बिजली की दरें 10% से 20% तक अधिक हो सकती हैं। इसका उद्देश्य लोगों को पीक टाइम में कम बिजली उपयोग के लिए प्रोत्साहित करना है।
नई व्यवस्था से बदलेगा उपभोग का तरीका
इस नई प्रणाली से उपभोक्ताओं की आदतों में बदलाव देखने को मिल सकता है। लोग वॉशिंग मशीन, गीजर और अन्य भारी उपकरणों का उपयोग दिन के समय करना पसंद करेंगे, जिससे बिजली की बचत के साथ-साथ बिल भी कम आएगा। एक बात याद रखें कि यह नियम फिलहाल केवल स्मार्ट मीटर यूजर्स के लिए ही है।
