यूटिलिटी

किसानों के लिए वरदान है यह योजना, फसल का नुकसान होने पर सरकार देती है 22000 प्रति एकड़ मुआवजा

राज्य सरकार इस योजना के तहत किसानों को बीज, खाद और खेती के लिए जरूरी अन्य सामग्री खरीदने में सहायता देती है, जिससे नुकसान के बाद भी किसान अपने काम को जारी रख सकें।

Image

इस योजना से हजारों किसानों को बड़ी सहायता मिलती है।(फोटो क्रेडिट-iStock)

भारत एक कृषि प्रधान देश है और अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग तरह की फसलें उगाई जाती हैं। किसानों के सामने मौसम को लेकर एक बड़ी अनिश्चितता रहती है। कई बार अचाना मौसम खराब होने की वजह से पूरी तरह से तैयार फसल बर्बाद हो जाती है और किसानों की महीनों की मेहनत खराब हो जाती है। हालांकि अब राज्स्थान सरकार ने किसानों को बड़ी राहत दे दी है।

आपको बता दें कि राजस्थान में खेती का ज्यादातर हिस्सा बारिश पर निर्भर करता है। कई बार सूखा, ओलावृष्टि, ज्यादा बारिश जैसी अलग-अलग प्राकृतिक घटनाओं की वजह से किसानों को फसल का नुकसान होता रहता है। इस समस्या से बचने के लिए राज्य सरकार किसनों के लिए कृषि आदान अनुदान सहायता योजना लेकर आई है। इस योजना में सरकार किसानों को आर्थिक सहायता देती है ताकि वे दोबारा खेती का काम शुरू कर सकें।

किन किसानों को मिलता है लाभ?

इस योजना का लाभ उन किसानों को मिलता है जिनकी फसलें प्राकृतिक आपदाओं की वजह से खराब होती हैं। सरकार ने सूखा, बाढ़, अत्यधिक वर्षा, ओलावृष्टि और अन्य प्राकृतिक कारणों से हुई फसल क्षति को इसके दायरे में रखा गया है। किसानों को सहायता देने से पहले प्रशासन और कृषि विभाग द्वारा नुकसान का सर्वे और मूल्यांकन किया जाता है। रिपोर्ट के आधार पर पात्र किसानों को आर्थिक सहायता राशि प्रदान की जाती है।

राज्य सरकार ने सहायता राशि का निर्धारण एसडीआरएफ के निर्धारित मानकों के अनुसार किया है। किसानों को उनकी फसल के प्रकार और सिंचाई की स्थिति के आधार पर अनुदान दिया जाता है। वर्षा पर निर्भर फसलों के लिए 8,500 रुपये प्रति हेक्टेयर, सिंचित फसलों के लिए 17,000 रुपये प्रति हेक्टेयर और बारहमासी फसलों के लिए 22,500 रुपये प्रति हेक्टेयर तक की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। योजना के तहत सहायता का लाभ अधिकतम 2 हेक्टेयर भूमि तक ही दिया जाता है।

योजना की सबसे खास बात

राजस्थान राज्य सरकार की इस योजना की सबसे बड़ी बात यह है कि किसानों को इसके लिए अलग से आवेदन करने की आवश्यकता नहीं होती। फसल नुकसान से प्रभावित किसानों का विवरण संबंधित पटवारी द्वारा या डीएमआईए पोर्टल पर दर्ज किया जाता है। निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार खरीफ फसलों से जुड़ी जानकारी 31 मार्च तक और रबी फसलों का विवरण 30 सितंबर तक पोर्टल पर अपलोड किया जाता है।

Gaurav Tiwari
गौरव तिवारीauthor

गौरव तिवारी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में टेक और ऑटो बीट को कवर करते हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 9 वर्षों के अनुभव के साथ, गौरव तकनीकी दुनिया की तेजी से बदलती जानकारियो को सरल और समझने योग्य भाषा में पेश करने के लिए जाने जाते हैं। वह गैजेट रिव्यू, टेलिकॉम अपडेट्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर क्राइम, टिप्स एंड ट्रिक्स, ई-कॉमर्स और ऑटोमोबाइल सेक्टर की महत्वपूर्ण खबरों पर लगातार काम करते हैं। गौरव अब तक 10,000 से अधिक आर्टिकल्स लिख चुके हैं। उनकी स्टोरीज न सिर्फ टेक-सेवी पाठकों के लिए उपयोगी होती हैं, बल्कि आम यूजर्स को भी नई तकनीक समझने और अपनाने में मदद करती हैं।

और पढ़ें
End of Article