Supreme Court BCI Law Colleges: सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया के लॉ कॉलेजों और यूनिवर्सिटी को रेगुलेट करने के अधिकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने कहा कि वह इस बात की जांच करेगा कि क्या BCI के पास कानून की पढ़ाई और लॉ कॉलेजों को नियंत्रित करने का वैधानिक अधिकार है।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही थी। मामला BCI-PEARL FIRST Trust और ट्रस्ट की ओर से संचालित लॉ संस्थानों से जुड़ा है।
BCI कानून की पढ़ाई का एक्सपर्ट कैसे?
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने सवाल उठाया कि BCI को कानून की पढ़ाई को रेगुलेट करने वाली विशेषज्ञ संस्था कैसे माना जा सकता है?
कोर्ट ने कहा कि कानून की पढ़ाई से जुड़े मामलों में कानून के विशेषज्ञों और शिक्षाविदों की भूमिका ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि BCI सामान्य नियम बना सकता है, जैसे लॉ का कोर्स कितने साल का होगा. लेकिन क्या BCI को लॉ कॉलेजों और यूनिवर्सिटी को कंट्रोल करने का अधिकार भी है, यह बड़ा सवाल है।
चीफ जस्टिस ने पूछा कि आखिर BCI लॉ कॉलेजों को रेगुलेट कैसे कर सकता है? अगर BCI का कानूनी रोल किसी व्यक्ति के वकील बनने के बाद शुरू होता है, तो क्या यह अधिकार लॉ स्कूल और यूनिवर्सिटी को नियंत्रित करने तक भी जाता है?
BCI खुद कॉलेज चलाए तो हितों का टकराव?
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने BCI की भूमिका और उसके अधिकारों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अगर कोई संस्था लॉ कॉलेजों को रेगुलेट करती है और खुद भी लॉ कॉलेज चलाती है, तो हितों के टकराव का सवाल उठ सकता है।
प्रशांत भूषण ने BCI-PEARL FIRST Trust का भी मुद्दा उठाया। उनका कहना था कि इस ट्रस्ट के जरिए गोवा और आंध्र प्रदेश में लॉ कॉलेज स्थापित किए गए हैं और कुछ कानूनी प्रावधानों के कारण इन संस्थानों पर BCI का काफी नियंत्रण है।
सुप्रीम कोर्ट की नजर में असली सवाल क्या?
सुनवाई के दौरान कोर्ट का फोकस इस बात पर रहा कि BCI की वैधानिक शक्तियों की सीमा आखिर कितनी है।क्या BCI सिर्फ वकालत के पेशे और बार में प्रवेश से जुड़े मामलों को रेगुलेट कर सकता है या उसे लॉ कॉलेजों और यूनिवर्सिटी की शिक्षा व्यवस्था को नियंत्रित करने का भी अधिकार है?सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि वह इसी कानूनी सवाल की जांच करेगा।
