International Anti-Corruption Day : हर साल 9 दिसंबर को भ्रष्टाचार के खिलाफ जागरूकता फैलाने के लिए अंतरराष्ट्रीय भ्रष्टाचार विरोधी दिवस (International Anti Corruption Day) मनाया जाता है। यूएनओ की पहल पर वर्ष 2005 से इसकी इसकी शुरुआत हुई है। भारत समेत पूरी दुनिया के लिए भ्रष्टाचार गंभीर चुनौती बनी हुई है। वर्ष 2020 के करप्शन इंडेक्स में भारत 194 देशों की सूची में 77 वें स्थान पर था और एक साल बाद 2021 में 5 पायदान खिसक कर 82 वें स्थान पर पहुंच गया। भ्रष्टाचार ऐसी सामाजिक बुराई है जो किसी भी देश या समाज को खोखला ही नहीं कर देती है बल्कि विकास की राह में बाधक होती है। इस निराशाजनक स्थिति में बदलाव के लिए आवश्यक है कि हमारी अगली पीढ़ी ईमानदारी की अहमियत को पहचाने और अपनाए।
बच्चों में सकारात्मक गुणों को विकसित करने में सबसे अहम भूमिका परिवार, समाज और स्कूल निभाते हैं। सच्चाई, ईमानदारी, अनुशासन जैसे गुण व्यक्तित्व में ही चार चांद नहीं लगाते सफलता के शिखर तक पहुंचने में मददगार साबित होते हैं। ऊंचाइयों को छूने वाले कई लोगों ने माना है कि उनकी सफलता में सच्चाई, ईमानदारी, अनुशासन जैसे गुणों की अहम भूमिका रही है। बच्चों में ऐसे सद्गुणों के विकास के लिए भारी भरकम कोर्स की जरूरत नहीं है। रोजमर्रा की छोटी-छोटी बातों से उन्हें ईमानदारी की बड़ी सीख दी जा सकती है। ईमानदारी का गुण उन्हें सफलता की मंजिल तक ले जाएगा।
बातों–बातों में काम की बात
बच्चों से रोजमर्रा की बातें करते हुए उन्हें बताएं कि क्या ठीक और क्या नहीं। अगर बच्चा स्कूल में किसी की पेंसिल-रबर जैसी चीजें खोने की बात करें तो उस समय उदाहरण देकर बताएं कि किसी की कोई प्यारी चीज खो जाती है तो कितना दुख होता है। इस तरह के प्रयासों से उनके मन में ईमानदारी के प्रति आस्था जगाई जा सकती है।
चीजें बांटने की दें जिम्मेदारी
दोस्तों या परिजनों के बीच चीजों को बांटने की जिम्मेदारी बच्चों को दें। काम के बाद उनके बेहतर प्रयास की सराहना करें। अगर उन्होंने ईमानदारी नहीं बरती तो उन्हें बताएं कि अगली बार यह उनके साथ भी हो सकता है। ऐसे प्रयास बच्चों को जिम्मेदार और ईमानदार बनने में सहायक साबित होंगे।
प्रेरक कहानियां सुनाएं
कहानियों का बच्चों पर गहरा असर पड़ता है। मशहूर रूसी मनोवैज्ञानिक लेव वायगोत्स्की के अनुसार कहानियां बच्चों के दिमाग पर गहरा असर करती हैं। वह सुस्त बच्चों को भी चुस्त बना देती हैं। बच्चे कहानियों से प्रेरणा लेते हैं और उन्हें वर्तमान परिस्थितियों को बदलने के लिए राह दिखाती हैं। ऐसे में यह साफ है कि कहानियां सुनाना और सुनना मनोवैज्ञानिक और शैक्षणिक दोनों की तरह से बच्चों के लिए फायदेमंद हैं। इसलिए बचपन से ही बच्चों को ईमानदारी से जुड़ी प्रेरक कहानियां सुनाएं। ये उनके विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
डिस्क्लेमर: प्रस्तुत लेख में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए हैं और इसे पेशेवर सलाह के रूप में नहीं लिया जा सकता।
