देश में बहुत से लोग अपने अधिकारों के लिए कानूनी लड़ाई लड़ना चाहते हैं, लेकिन वकीलों की फीस और अदालत से जुड़े खर्चों के कारण वे ऐसा नहीं कर पाते। हालांकि, बहुत कम लोगों को जानकारी होगी कि भारत में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए मुफ्त कानूनी सहायता (Free Legal Aid) की व्यवस्था मौजूद है। इसके तहत पात्र लोगों को बिना किसी शुल्क के वकील, कानूनी सलाह और अन्य जरूरी सहायता उपलब्ध करवाई जाती हैं। यह व्यवस्था इस सिद्धांत पर आधारित है कि न्याय तक पहुंच केवल आर्थिक रूप से सक्षम लोगों का अधिकार नहीं है, बल्कि हर नागरिक को समान रूप से न्याय पाने का अवसर मिलना चाहिए।
क्या है मुफ्त कानूनी सहायता?
भारत में मुफ्त कानूनी सहायता की व्यवस्था विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 (Legal Services Authorities Act, 1987) के तहत की गई है। इस कानून के अनुसार आर्थिक रूप से कमजोर और कुछ विशेष श्रेणियों के लोगों को मुफ्त कानूनी सेवाएं प्रदान की जाती हैं। इस व्यवस्था का संचालन राष्ट्रीय स्तर पर National Legal Services Authority (NALSA), राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरणों और जिला कानूनी सेवा प्राधिकरणों के माध्यम से किया जाता है। लेटेस्ट सरकारी आंकड़े बताते हैं कि पिछले तीन वर्षों में निःशुल्क कानूनी सहायता का लाभ उठाने वाले लोगों की संख्या में वृद्धि हुई है। 2022-23 से 2024-25 तक, विधिक सेवा प्राधिकरणों द्वारा दी गई कानूनी सहायता और सलाह से 44.22 लाख से अधिक लोग को लाभ मिला है।
मुफ्त कानूनी सहायता के लिए आवेदन
निःशुल्क कानूनी सहायता पाने के लिए पात्र व्यक्ति संबंधित विधिक सेवा प्राधिकरण में ऑफलाइन या ऑनलाइन आवेदन कर सकता है। आवेदन लिखित रूप में, फॉर्म भरकर या मौखिक रूप से भी किया जा सकता है। इसके अलावा, राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) और राज्य या जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों की वेबसाइट पर उपलब्ध ऑनलाइन सुविधा के जरिए भी आवेदन किया जा सकता है।
आवेदन प्राप्त होने के बाद संबंधित प्राधिकरण उसकी जांच करता है और यह तय करता है कि आवेदक मुफ्त कानूनी सहायता पाने का पात्र है या नहीं। पात्र पाए जाने पर उसे कानूनी सलाह, वकील की नियुक्ति या अदालत में प्रतिनिधित्व जैसी सुविधाएं प्रदान की जाती हैं। आवेदक को नियुक्त वकील की जानकारी दी जाती है और फिर वकील मामले को आगे बढ़ाने के लिए उससे संपर्क करता है।
