Ceiling Fan Power Consumption: गर्मियों के मौसम में भारत के हर घर में जो एक इलेक्ट्रॉनिक चीज चौबीसों घंटे चलती है, वह है सीलिंग फैन यानी छत का पंखा। एयर कंडीशनर (AC) और कूलर की तुलना में पंखा कम बिजली जरूर खाता है, लेकिन चूंकि यह घर के लगभग हर कमरे में लगा होता है और लगातार चलता रहता है, इसलिए कई लोगों के मन में यह सवाल जरूर उठता है कि आखिर एक पंखा महीनेभर में कितनी बिजली की खपत करता है। अक्सर लोग सोचते हैं कि पंखे से बिजली का बिल बहुत कम आता है, इसलिए वे इसे दिन-रात चालू छोड़ देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपके घर में लगे पुराने पंखे चुपके से आपके बिजली का बिल बढ़ा रहे होते हैं? इस बात को समझने के लिए पंखे की वॉट क्षमता (Wattage) और बिजली यूनिट के गणित को आसान भाषा में समझना बेहद जरूरी है, ताकि आप अपने मासिक खर्च का सही अंदाजा लगा सकें और भारी-भरकम बिल से बच सकें।
आमतौर पर हमारे घरों में इस्तेमाल होने वाले साधारण सीलिंग फैन 50 वॉट से लेकर 80 वॉट तक के होते हैं। मान लेते हैं कि आपके घर में लगा पंखा औसतन 70 वॉट का है और गर्मियों के दिनों में वह रोजाना करीब 15 घंटे चलता है। इस हिसाब से एक पंखा एक दिन में लगभग 1,050 वॉट यानी करीब 1.05 यूनिट बिजली की खपत करता है। अब अगर इसी गणित को पूरे महीने (30 दिन) के हिसाब से देखा जाए, तो एक पंखा महीनेभर में लगभग 31.5 यूनिट बिजली खा जाता है।
भारत के अलग-अलग राज्यों और शहरों में बिजली की दरें (टैरिफ) अलग-अलग होती हैं, लेकिन यदि हम औसतन 7 रुपये प्रति यूनिट की दर भी मानकर चलें, तो एक पंखे का महीने का खर्च करीब 220 रुपये आता है। अब जरा सोचिए, अगर आपके घर में ऐसे 3 या 4 पंखे लगे हैं और वे इसी तरह चलते हैं, तो सिर्फ पंखों का ही बिल 600 से 800 रुपये प्रति महीना पहुंच जाता है।
आप अपना सकते हैं ये ऑप्शन
बिजली के इस बढ़ते खर्च को कम करने और पैसे बचाने का आज के समय में एक बेहतरीन विकल्प मौजूद है, जिसे 'बीएलडीसी' (BLDC - Brushless Direct Current) फैन्स कहा जाता है। पारंपरिक पंखों की तुलना में बीएलडीसी पंखे आधुनिक तकनीक पर काम करते हैं और बहुत ही कम बिजली की खपत करते हैं। जहां एक पुराना साधारण पंखा 70 से 80 वॉट बिजली लेता है, वहीं एक नया बीएलडीसी पंखा मात्र 28 से 35 वॉट में ही उतनी ही हवा देता है। इसका मतलब यह हुआ कि बीएलडीसी पंखा सीधे तौर पर आपकी बिजली की खपत को आधा या उससे भी कम कर देता है।
अगर आप अपने घर के पुराने पंखों को इस नई तकनीक वाले पंखों से बदल देते हैं, तो आपका मासिक बिजली बिल काफी हद तक कम हो सकता है और पंखे खरीदने की लागत कुछ ही महीनों में बिजली की बचत के रूप में वसूल हो जाती है।
आदतों में बदलाव से भी पड़ेगा असर
इसके अलावा, कुछ छोटी-छोटी आदतों को सुधारकर भी आप पंखे से होने वाले बिजली के खर्च को नियंत्रित कर सकते हैं। सबसे बुनियादी नियम यह है कि जब भी आप कमरे से बाहर जाएं, तो पंखा बंद करना न भूलें। कई लोगों को लगता है कि थोड़ी देर के लिए पंखा खुला छोड़ने से कोई फर्क नहीं पड़ता, लेकिन यही छोटी लापरवाहियां महीने के अंत में बड़ा बिल बनकर सामने आती हैं। साथ ही, पंखे के रेगुलेटर की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है।
पुराने जमाने के बड़े और भारी रेगुलेटर बिजली की खपत को कम नहीं करते थे, बल्कि वे केवल गति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त बिजली को गर्मी के रूप में बर्बाद करते थे। इसलिए हमेशा आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक रेगुलेटर का ही इस्तेमाल करें।
