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दिल्ली वालों को लगेगा झटका! महंगी होगी बिजली, इतना बढ़ जाएगा आपका बिल

Electricity Tariff Hike: दिल्ली वालों के लिए बिजली महंगी होने जा रही है। दरअसल, DERC ने बिजली वितरण कंपनियों को अतिरिक्त Fuel and Power Purchase Adjustment Surcharge वसूलने की अनुमति दे दी है।

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दिल्ली वालों के लिए महंगी हुई बिजली (AI Generated Image)

Electricity Tariff Hike: दिल्ली में रहने वाले लोगों को बिजली महंगे होने का झटका लग सकता है। दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग (DERC) ने बिजली वितरण कंपनियों (Discoms) को लगातार दूसरे महीने भी ग्राहकों से अतिरिक्त ईंधन और बिजली खरीद समायोजन अधिभार (Fuel and Power Purchase Adjustment Surcharge - FPPAS) वसूलने की अनुमति दे दी है। इसका सीधा असर उपभोक्ताओं के मासिक बिजली बिल पर पड़ सकता है।

क्या है FPPAS?

Fuel and Power Purchase Adjustment Surcharge एक अतिरिक्त शुल्क है, जिसे बिजली कंपनियां तब वसूलती हैं जब बिजली उत्पादन या खरीदने की लागत बढ़ जाती है। यह शुल्क हर महीने तय किया जाता है और बिजली बिल में अलग से जोड़ा जाता है। इसकी गणना ग्राहक के फिक्स्ड चार्ज और एनर्जी चार्ज के कुल योग के प्रतिशत के आधार पर की जाती है।

किस कंपनी के ग्राहकों पर कितना असर?

न्यूज एजेंसी भाषा (पीटीआई) की एक लेटेस्ट रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली की तीनों प्रमुख बिजली वितरण कंपनियों के लिए अलग-अलग अतिरिक्त अधिभार मंजूर किया गया है।

  • BSES Rajdhani Power Limited (BRPL) के ग्राहकों पर 7.94% अतिरिक्त अधिभार लगाया जाएगा।
  • BSES Yamuna Power Limited (BYPL) के लिए यह दर 7.43% तय की गई है।
  • Tata Power Delhi Distribution Limited (TPDDL) के ग्राहकों के लिए 6% अतिरिक्त अधिभार लगाया जाएगा।

कुल अधिभार अब कितना होगा?

DERC के नियमों के अनुसार, सामान्य परिस्थितियों में एक बिलिंग साइकिल में FPPAS की अधिकतम सीमा 10% होती है। हालांकि इस बार आयोग ने विशेष अनुमति देते हुए अतिरिक्त वसूली की मंजूरी भी दी है। इसके बाद मई 2026 के लिए कुल FPPAS इस प्रकार रहेगा—

  • BRPL: 17.94%
  • BYPL: 17.43%
  • TPDDL: 12.21%

यानी उपभोक्ताओं के बिजली बिल में पहले से अधिक अतिरिक्त शुल्क जुड़ सकता है।

अतिरिक्त अधिभार लगाने की जरूरत क्यों पड़ी?

बिजली वितरण कंपनियों का कहना है कि मई 2026 के दौरान बिजली खरीदने की वास्तविक लागत उनकी निर्धारित बेस पावर परचेज कॉस्ट से काफी अधिक रही। ऐसे में केवल 10% की सीमा के भीतर वसूली करने से उनका पूरा खर्च नहीं निकल पा रहा था। इसी वजह से कंपनियों ने जून और जुलाई के लिए DERC से अतिरिक्त राहत की मांग की थी। आयोग ने इस पर विचार करते हुए अतिरिक्त अधिभार लगाने की अनुमति दे दी, ताकि बिजली खरीद पर हुए बढ़े हुए खर्च का कुछ हिस्सा कंपनियां वसूल सकें।

उपभोक्ताओं के लिए इसका क्या मतलब है?

अगर आप दिल्ली में रहते हैं और BRPL, BYPL या TPDDL के ग्राहक हैं तो आने वाले बिजली बिल पहले की तुलना में अधिक हो सकते हैं। बिल में यह राशि सीधे बिजली यूनिट के हिसाब से नहीं, बल्कि फिक्स्ड चार्ज और एनर्जी चार्ज के आधार पर अतिरिक्त प्रतिशत के रूप में जोड़ी जाएगी। हालांकि यह बढ़ोतरी सभी उपभोक्ताओं के लिए समान नहीं होगी। जिस कंपनी से आपका बिजली कनेक्शन है और आपकी बिजली खपत जितनी अधिक होगी, बिल पर उसका असर भी उतना ही ज्यादा दिखाई दे सकता है।

Shivani Kotnala
शिवानी कोटनाला author

शिवानी कोटनाला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। पत्रकारिता के करियर में 3 साल से ज्यादा के अनुभव के साथ शिवानी ने ... और देखें

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