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ताजमहल ही नहीं, इन खूबसूरत ऐतिहासिक स्मारकों से भी झलकती है शाहजहां की कलाकारी

इन स्मारकों को देखकर कोई भी समझ सकता है कि शाहजहां की वास्तुकला केवल ताज महल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मुग़ल साम्राज्य की संस्कृति और जीवनशैली का भी परिचायक है।

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ताजमहल से इतर शाहजहां ने कौन-कौन सी इमारतें बनवाई थीं। (Photos: iStock)

शाहजहां का नाम सुनते ही सबसे पहले ताज महल का ख्याल आता है, लेकिन उनकी वास्तुकला का दायरा इससे कहीं अधिक विस्तृत है। दिल्ली, आगरा और लाहौर में कई अन्य स्मारक हैं, जो उनके स्थापत्य कौशल और साम्राज्य की संस्कृति को दर्शाते हैं। आइए, इन अद्भुत स्मारकों पर एक नजर डालते हैं।

लाल किला, दिल्ली

लाल किला, जिसे लाल किला भी कहा जाता है, 1638 में शाहजहां द्वारा निर्मित किया गया था। यह किला शाहजहानाबाद की राजधानी का केंद्र था। इसके भीतर स्थित दीवान-ए-खास, दीवान-ए-आम, रंग महल और हम्माम जैसे महत्वपूर्ण संरचनाएं इस बात का प्रमाण हैं कि शाहजहां ने सफेद संगमरमर, पिएट्रा ड्यूरा और औपचारिक ज्यामिति पर कितना जोर दिया। यह केवल एक स्मारक नहीं, बल्कि एक पूरा शाही परिसर है।

Lal Qila

लाल किला (Photo: iStock)

जामा मस्जिद, दिल्ली

1650 में निर्मित जामा मस्जिद भारत की सबसे बड़ी मस्जिदों में से एक है। इसकी विशाल आंगन, तीन द्वार, और लाल बलुआ पत्थर-श्वेत संगमरमर का संयोजन शाहजहां की शैली का प्रतीक है। यह एक प्रमुख धार्मिक संस्थान और नए शहर के लिए एक नागरिक स्थल के रूप में कार्य करती है।

jama Masjid

जामा मस्जिद (Photo: iStock)

शालीमार बाग, लाहौर

शाहजहां ने मुग़ल बाग़ परंपरा को एक नई दिशा दी। शालीमार बाग में कई स्तरों वाला लेआउट, नियंत्रित जल चैनल, फव्वारे और मंडप हैं। इसके जल विज्ञान प्रणाली, जो एक ऊंचे जलवाहक द्वारा संचालित होती थी, उस समय के लिए अत्याधुनिक थी। यह परिसर मनोरंजन, दरबार की बैठकों और मौसमी विश्राम के लिए विकसित किया गया था।

Shalimar Garden

शालीमार बाग (Photo: iStock)

नौलखा पैवेलियन, लाहौर किला

लाहौर किले के भीतर स्थित यह छोटा संगमरमर का संरचना 1631 में बनाई गई थी। इसका घुमावदार छत और विस्तृत इनले वर्क इसे ताज महल की कलाकारी के समान बनाता है। यह स्थान रॉयल महिलाओं के लिए एक निजी स्थान के रूप में कार्य करता था।

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नौलखा पवेलियन (Photo: iStock)

मुसम्मन बुर्ज, आगरा किला

आगरा किले में स्थित मुसम्मन बुर्ज एक संगमरमर का अष्टकोणीय टॉवर है, जो यमुना नदी के ऊपर एक बालकनी से नजर डालता है। यह किले के अन्य हिस्सों की तुलना में शांत और कम देखा जाने वाला स्थान है। यहाँ शाहजहां ने अपने अंतिम वर्ष बिताए, जबकि ताज महल का दृश्य उनके सामने था।

Mujassim Burj

मुसम्मन बुर्ज (Photo: iStock)

मोती मस्जिद, आगरा किला

1654 में पूर्ण हुई मोती मस्जिद, सफेद संगमरमर की एक समान संरचना है, जिसे शाही पूजा के लिए बनाया गया था। इसके आंतरिक नक्कारखाने और साफ-सुथरी रेखाएं, शाहजहां की पवित्र वास्तुकला में संयम की पसंद को दर्शाती हैं। यह अक्सर पर्यटकों द्वारा अनदेखी की जाती है।

Moti Masjid

मोती मस्जिद (Photo: iStock)

इन स्मारकों को देखकर कोई भी समझ सकता है कि शाहजहां की वास्तुकला केवल ताज महल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मुग़ल साम्राज्य की संस्कृति और जीवनशैली का भी परिचायक है।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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